भारत के कई इलाकों में खेत धीरे-धीरे बंजर होते जा रहे हैं। मिट्टी में जीवांश कम हो रहा है, पैदावार गिर रही है और पानी भी जल्दी सूख जाता है। वैज्ञानिक तरीके अपनाकर ऐसी जमीन को फिर से उपजाऊ बनाया जा सकता है। मिट्टी की सेहत और ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ाने से खेत सोने की तरह फलने-फूलने लगते हैं।
मिट्टी बंजर क्यों हो जाती है
अत्यधिक रासायनिक खाद, लगातार एक ही फसल, खेत को खाली छोड़ना और फसल अवशेष जलाने से मिट्टी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ जाता है। इससे मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीव मरने लगते हैं और ऑर्गेनिक कार्बन की मात्रा तेजी से घटती है। नतीजा यह होता है कि मिट्टी सख्त हो जाती है, पानी सोखने की क्षमता कम हो जाती है और फसलें कमजोर पड़ जाती हैं।
ऑर्गेनिक कार्बन मिट्टी की जान है
मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन वह तत्व है जो मिट्टी को जीवित रखता है। यह सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का काम करता है, मिट्टी की संरचना सुधारता है और पानी व पोषक तत्वों को लंबे समय तक रोककर रखता है। जब ऑर्गेनिक कार्बन बढ़ता है तो मिट्टी नरम होती है, जड़ें आसानी से फैलती हैं और फसलें स्वस्थ रहती हैं। बंजर जमीन को सुधारने का सबसे महत्वपूर्ण कदम यही है कि मिट्टी में कार्बन की मात्रा बढ़ाई जाए।
वैज्ञानिक तरीके से मिट्टी सुधारें
मिट्टी की जांच सबसे पहले करवाएं। इससे पता चलता है कि मिट्टी में क्या कमी है और पीएच कितना है। उसके बाद जैविक पदार्थों का नियमित इस्तेमाल शुरू करें। गोबर की सड़ी खाद, कम्पोस्ट और वर्मीकम्पोस्ट डालने से मिट्टी में कार्बन तेजी से बढ़ता है। फसल अवशेषों को जलाने की बजाय खेत में ही गलाकर मिला दें। इससे मिट्टी की उर्वरता धीरे-धीरे लौटने लगती है।
हरी खाद वाली फसलें भी बहुत फायदेमंद साबित होती हैं। खेत खाली होने पर ढैंचा या सनई बोकर 40 से 45 दिन बाद फूल आने से पहले खेत में जोत दें। ये फसलें नाइट्रोजन भी बढ़ाती हैं और कार्बन की मात्रा भी सुधारती हैं।
मिट्टी सुधार के आसान और असरदार उपाय
- गोबर की खाद या कम्पोस्ट नियमित रूप से डालें ताकि कार्बन लंबे समय तक बना रहे
- हरी खाद की फसल उगाकर सही समय पर मिट्टी में मिलाएं
- फसल अवशेषों को खेत में ही गलाकर उपयोग करें
- कम जुताई करें ताकि मिट्टी की संरचना और कार्बन सुरक्षित रहें
लंबे समय तक सुधार के उपाय
एक बार सुधार शुरू करने के बाद उसे लगातार बनाए रखना जरूरी है। फसल चक्र बदलते रहें और दलहनी फसलों को शामिल करें। पेड़-पौधे लगाकर कृषि वानिकी अपनाएं। घास वाली फसलें या बागवानी के साथ चारे की फसलें लगाने से मिट्टी की जैविक गतिविधि बढ़ती है। पानी बचाने वाले तरीकों जैसे समोच्च मेड़ या मल्चिंग का इस्तेमाल करें। इससे मिट्टी का कटाव रुकता है और नमी बनी रहती है।
सही देखभाल से मिलेगा स्थायी फायदा
मिट्टी सुधार कोई एक दिन का काम नहीं है। नियमित रूप से जैविक खाद डालते रहने, रसायनों का संतुलित इस्तेमाल करने और खेत को कभी पूरी तरह खाली न छोड़ने से नतीजे दिखने लगते हैं। कुछ सालों में बंजर दिखने वाली जमीन भी अच्छी पैदावार देने लगती है। पानी की जरूरत कम होती है और फसलें रोगों के प्रति ज्यादा मजबूत हो जाती हैं।
बंजर जमीन को फिर से उपजाऊ बनाने का वैज्ञानिक तरीका सीधा और व्यावहारिक है। मिट्टी की जांच, जैविक पदार्थों का इस्तेमाल, हरी खाद और सही प्रबंधन अपनाकर कोई भी किसान अपनी जमीन को सोने के बराबर बना सकता है। नियमित मेहनत और धैर्य से खेत फिर से हरे-भरे हो सकते हैं और पैदावार भी बढ़ सकती है।