खेती में पानी में घुलनशील उर्वरकों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है, लेकिन इनका सही ग्रेड सही समय पर देना उतना ही जरूरी है। 19:19:19, 12:61:00, 0:52:34, 13:0:45 और 0:0:50 सभी का काम एक जैसा नहीं होता।
इन उर्वरकों में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा अलग-अलग होती है। इसलिए फसल की अवस्था के अनुसार ग्रेड चुनने पर ही पोषक तत्वों का सही उपयोग हो पाता है।
NPK के तीन अंक आखिर बताते क्या हैं
किसी भी NPK ग्रेड में दिए गए तीन अंक क्रमशः नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की मात्रा को दर्शाते हैं। तकनीकी रूप से इन्हें N, P2O5 और K2O के प्रतिशत के रूप में लिखा जाता है। उदाहरण के लिए 19:19:19 में तीनों पोषक तत्व संतुलित अनुपात में होते हैं, जबकि 12:61:00 में फास्फोरस की मात्रा बहुत अधिक और पोटाश शून्य होता है।
इसी तरह 13:0:45 मुख्य रूप से नाइट्रोजन और पोटाश देता है। 0:52:34 में नाइट्रोजन नहीं होता, लेकिन फास्फोरस और पोटाश की मात्रा अधिक होती है। 0:0:50 मुख्य रूप से पोटाश और सल्फर उपलब्ध कराने वाला पानी में घुलनशील उर्वरक है।
इसलिए केवल यह देखकर कि उर्वरक पानी में पूरी तरह घुल जाता है, उसे किसी भी अवस्था में देना सही तरीका नहीं है। फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और पहले से दिए गए पोषक तत्वों को ध्यान में रखना जरूरी है।
19:19:19 कब देना ज्यादा उपयोगी होता है
19:19:19 को संतुलित NPK ग्रेड माना जाता है क्योंकि इसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तीनों समान अनुपात में होते हैं। इसका इस्तेमाल फसल की ऐसी अवस्थाओं में किया जाता है जब पौधे को तीनों प्रमुख पोषक तत्वों की जरूरत होती है।
वानस्पतिक बढ़वार के दौरान पौधे को पर्याप्त नाइट्रोजन की जरूरत होती है, वहीं जड़ों के विकास और पौधे की सामान्य पोषण स्थिति में फास्फोरस तथा पोटाश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी वजह से कई फसलों में शुरुआती बढ़वार या सक्रिय विकास के समय 19:19:19 का इस्तेमाल किया जाता है।
हालांकि इसकी मात्रा हर फसल के लिए एक जैसी नहीं हो सकती। उदाहरण के लिए कुछ फसलों की वैज्ञानिक सिफारिशों में 19:19:19 को फर्टिगेशन या पत्तियों पर छिड़काव के लिए अलग-अलग दरों पर इस्तेमाल किया गया है। इसलिए पैकेट पर दिए निर्देश और फसल-विशिष्ट सिफारिश को प्राथमिकता देना चाहिए।
12:61:00 का काम क्या है और इसे कब दें
12:61:00 को मोनो अमोनियम फॉस्फेट यानी MAP के रूप में जाना जाता है। इसमें नाइट्रोजन की तुलना में फास्फोरस की मात्रा काफी अधिक होती है। इसका उपयोग खास तौर पर तब किया जाता है जब फसल को फास्फोरस की अधिक जरूरत हो।
फास्फोरस जड़ विकास, शुरुआती पौध वृद्धि और प्रजनन संबंधी अवस्थाओं में महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। ड्रिप फर्टिगेशन की वैज्ञानिक सिफारिशों में MAP का इस्तेमाल फसल की शुरुआती अवस्था तथा बाद की कुछ अवस्थाओं में किया जाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर फसल में इसे एक ही दिन या एक ही मात्रा में देना चाहिए।
सब्जियों जैसी कुछ फसलों में फूल आने से पहले या फूल बनने की अवस्था के आसपास MAP को फर्टिगेशन कार्यक्रम में शामिल किया जाता है। लेकिन इसकी वास्तविक मात्रा फसल और कुल पोषक तत्व आवश्यकता के आधार पर तय होती है।
0:52:34 कब दें, इसे समझना क्यों जरूरी है
0:52:34 को मोनो पोटैशियम फॉस्फेट यानी MKP कहा जाता है। इसमें नाइट्रोजन नहीं होता और फास्फोरस तथा पोटाश दोनों उपलब्ध होते हैं। इस वजह से यह उन परिस्थितियों में उपयोगी हो सकता है जहां फसल को इन दोनों पोषक तत्वों की जरूरत हो लेकिन अतिरिक्त नाइट्रोजन नहीं देना हो।
फूल बनने से पहले, फूल आने और फल बनने जैसी अवस्थाओं में फास्फोरस और पोटाश की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए MKP को इन अवस्थाओं से जुड़ी पोषण जरूरतों के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है। कुछ फसलों में इसका उपयोग फल बनने और गुणवत्ता से जुड़े पोषण प्रबंधन में भी किया जाता है।
0:52:34 को 19:19:19 का सीधा विकल्प समझना सही नहीं है। दोनों के पोषक तत्वों का अनुपात अलग है और दोनों का इस्तेमाल फसल की जरूरत के अनुसार अलग उद्देश्य से किया जाता है।
13:0:45 कब देना चाहिए
13:0:45 को पोटैशियम नाइट्रेट के रूप में जाना जाता है। इसमें नाइट्रोजन और पोटाश होते हैं, जबकि फास्फोरस नहीं होता। इसलिए यह उन अवस्थाओं में उपयोगी हो सकता है जब फसल को नाइट्रोजन के साथ पोटाश की जरूरत हो।
पोटाश पौधे में पानी के संतुलन, तनाव सहने की क्षमता, उपज और कई फसलों में गुणवत्ता से जुड़े कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी कारण फल बनने, फल के विकास या ऐसी अवस्थाओं में जब पोटाश की मांग बढ़ती है, 13:0:45 को पोषण कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।
कुछ फसलों की वैज्ञानिक फर्टिगेशन सिफारिशों में 13:0:45 को फूल आने और फल बनने जैसी अवस्थाओं में इस्तेमाल किया गया है। इससे यह समझना आसान है कि उर्वरक का चयन केवल फसल के नाम से नहीं, बल्कि उस समय पौधे की पोषक जरूरत के आधार पर होना चाहिए।
0:0:50 कब दें और इसकी खासियत क्या है
0:0:50 को सल्फेट ऑफ पोटाश यानी SOP कहा जाता है। इसमें नाइट्रोजन और फास्फोरस नहीं होते, जबकि पोटाश की मात्रा 50 प्रतिशत होती है। इसके साथ सल्फर भी मिलता है, इसलिए यह केवल पोटाश का स्रोत नहीं है।
SOP को खास तौर पर उन अवस्थाओं में उपयोग किया जाता है जब फसल को पोटाश की जरूरत हो लेकिन नाइट्रोजन और फास्फोरस नहीं देना हो। फूल आने से पहले और फूल आने के बाद की अवस्थाओं में इसका इस्तेमाल कई फसलों के पोषण कार्यक्रम में किया जाता है।
पोटाश फल और फूल के विकास तथा फसल की गुणवत्ता से जुड़ा महत्वपूर्ण पोषक तत्व है। हालांकि 0:0:50 की सही मात्रा फसल, मिट्टी, सिंचाई व्यवस्था और पोषक तत्वों की वास्तविक जरूरत के अनुसार तय की जानी चाहिए।
पांचों ग्रेड को आसान तरीके से ऐसे समझें
किसान अगर इन पांचों ग्रेड को उनके मुख्य पोषक तत्व के आधार पर समझ लें तो सही समय पर सही उर्वरक चुनना काफी आसान हो जाता है।
- 19:19:19 में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तीनों संतुलित मात्रा में मिलते हैं और इसे सामान्य सक्रिय बढ़वार वाली अवस्थाओं में उपयोग किया जाता है।
- 12:61:00 में फास्फोरस अधिक होता है, इसलिए यह फास्फोरस की जरूरत वाली शुरुआती या प्रजनन संबंधी अवस्थाओं में उपयोगी हो सकता है।
- 0:52:34 में नाइट्रोजन नहीं होता और फास्फोरस तथा पोटाश मिलते हैं, इसलिए फूल और फल बनने से जुड़ी अवस्थाओं में इसका उपयोग किया जा सकता है।
- 13:0:45 में नाइट्रोजन और पोटाश होते हैं, इसलिए पोटाश की मांग वाली बढ़वार, फूल या फल विकास की अवस्था में इसे पोषण कार्यक्रम में शामिल किया जा सकता है।
फर्टिगेशन और पत्तियों पर छिड़काव में अंतर समझें
पानी में घुलनशील उर्वरकों का उपयोग मुख्य रूप से ड्रिप फर्टिगेशन या पत्तियों पर छिड़काव के माध्यम से किया जाता है। दोनों तरीकों में उर्वरक की मात्रा और इस्तेमाल का तरीका एक जैसा मान लेना सही नहीं है।
फर्टिगेशन में उर्वरक सिंचाई के पानी के साथ जड़ों के क्षेत्र तक पहुंचता है। वहीं पत्तियों पर छिड़काव में पोषक तत्व पौधे की पत्तियों के माध्यम से दिए जाते हैं। इसलिए किसी फसल के लिए बताई गई फर्टिगेशन मात्रा को सीधे स्प्रे की मात्रा मानकर इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
किसान को पानी की गुणवत्ता, फसल की अवस्था, मौसम और उर्वरक की लेबल सिफारिश को भी ध्यान में रखना चाहिए। तेज धूप, बहुत अधिक तापमान या तनावग्रस्त पौधों पर बिना उचित सलाह के पोषक तत्वों का घोल छिड़कना नुकसानदायक हो सकता है।
उर्वरक देने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
पानी में घुलनशील उर्वरक जल्दी उपलब्ध होने के कारण इनका इस्तेमाल सोच-समझकर करना जरूरी है। ज्यादा मात्रा देने से पौधे को अतिरिक्त फायदा मिलने की गारंटी नहीं होती। उल्टा पोषक तत्वों का असंतुलन और जड़ों या पत्तियों पर नुकसान का खतरा बढ़ सकता है।
खास तौर पर अलग-अलग उर्वरकों को एक ही टैंक में मिलाने से पहले उनकी संगतता देखना जरूरी है। फास्फोरस वाले उर्वरकों को कैल्शियम वाले उर्वरकों के साथ बिना संगतता जांचे मिलाने से अवक्षेप बनने की समस्या हो सकती है और ड्रिप सिस्टम भी प्रभावित हो सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि NPK ग्रेड को कैलेंडर देखकर नहीं, बल्कि फसल की अवस्था और पोषक तत्वों की जरूरत देखकर चुनना चाहिए। मिट्टी परीक्षण उपलब्ध हो तो उसके परिणाम के आधार पर पोषण प्रबंधन करना अधिक उचित रहता है।
निष्कर्ष
19:19:19, 12:61:00, 0:52:34, 13:0:45 और 0:0:50 पांचों पानी में घुलनशील उर्वरक हैं, लेकिन इनके पोषक तत्वों का अनुपात अलग होने के कारण इनका काम भी अलग है। 19:19:19 संतुलित पोषण के लिए, 12:61:00 फास्फोरस प्रधान पोषण के लिए, 0:52:34 फास्फोरस और पोटाश के लिए, 13:0:45 नाइट्रोजन के साथ पोटाश देने के लिए और 0:0:50 मुख्य रूप से पोटाश तथा सल्फर उपलब्ध कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
सही तरीका यही है कि किसान फसल की अवस्था, मिट्टी की जरूरत, सिंचाई की विधि और अनुशंसित मात्रा को ध्यान में रखकर ग्रेड का चुनाव करें। केवल ज्यादा उर्वरक देने के बजाय सही पोषक तत्व को सही समय पर देना ही बेहतर पोषण प्रबंधन की पहचान है।