धान की फसल में भूरा माहू यानी ब्राउन प्लांट हॉपर ऐसा कीट है, जिसे शुरुआती अवस्था में नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। यह पौधे के निचले हिस्से में रहकर रस चूसता है और प्रकोप बढ़ने पर धान के पौधों को तेजी से कमजोर कर सकता है।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि किसान कई बार खेत में कीट दिखाई देने के बाद भी उसकी सही पहचान नहीं कर पाते या बिना जरूरत लगातार नाइट्रोजन और कीटनाशकों का इस्तेमाल शुरू कर देते हैं। यही गलतियां स्थिति को और बिगाड़ सकती हैं।
भूरा माहू धान की फसल को कैसे नुकसान पहुंचाता है
भूरा माहू धान के पौधे के निचले हिस्से में रहकर तने से रस चूसता है। इसकी संख्या बढ़ने पर पौधों में कमजोरी आने लगती है और प्रभावित हिस्से में पत्तियां पीली पड़ सकती हैं। गंभीर प्रकोप में पौधे सूखने लगते हैं और खेत में सूखे हुए हिस्से दिखाई दे सकते हैं। इस स्थिति को अक्सर हॉपर बर्न के रूप में जाना जाता है।
इस कीट की खास बात यह है कि यह खेत में नीचे की ओर छिपा रहता है। इसलिए केवल ऊपर की पत्तियों को देखकर फसल की स्थिति का अंदाजा लगाना सही नहीं है। पौधों के निचले हिस्से और तनों के आसपास नियमित निरीक्षण करना जरूरी है।
भूरे माहू की समस्या खास तौर पर उस समय गंभीर हो सकती है जब खेत का वातावरण कीट के लिए अनुकूल हो और पौधों में अत्यधिक नाइट्रोजन की स्थिति बन जाए। इसलिए केवल कीटनाशक पर निर्भर रहने के बजाय खेत की निगरानी और संतुलित फसल प्रबंधन पर ध्यान देना जरूरी है।
खेत में भूरा माहू आने के प्रमुख संकेत
किसान को खेत में चलते समय पौधों के निचले हिस्से को ध्यान से देखना चाहिए। पौधों को हल्का हिलाने पर छोटे भूरे रंग के कीट नीचे की ओर दिखाई दे सकते हैं। शुरुआती प्रकोप में पूरे खेत पर एक जैसा असर नहीं होता, बल्कि कुछ स्थानों पर कीटों का जमाव ज्यादा दिखाई दे सकता है।
अगर खेत में कुछ जगहों पर पौधों का रंग बदल रहा है, पत्तियां पीली या सूखी दिखाई दे रही हैं और पौधों के निचले हिस्से में माहू की संख्या बढ़ी हुई है, तो जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
भूरे माहू की संख्या बढ़ने पर खेत में प्रभावित हिस्से तेजी से फैल सकते हैं। इसलिए किसान को केवल सूखे पौधों को देखकर कार्रवाई करने के बजाय उससे पहले ही खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
सबसे बड़ी गलती: प्रकोप के समय ज्यादा नाइट्रोजन देना
भूरे माहू के प्रकोप के दौरान सबसे महत्वपूर्ण सावधानी नाइट्रोजन के अनावश्यक इस्तेमाल से जुड़ी है। कृषि वैज्ञानिकों की सलाह में भी BPH के प्रकोप के समय नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों से बचने की बात कही गई है।
कई किसान पौधों की पत्तियां पीली देखकर तुरंत यूरिया डाल देते हैं। लेकिन अगर पीलेपन का कारण भूरा माहू है, तो बिना कारण अतिरिक्त नाइट्रोजन देना सही कदम नहीं माना जाता। इससे फसल का प्रबंधन और कठिन हो सकता है।
इसलिए पहले यह पता करना जरूरी है कि पौधे वास्तव में पोषक तत्वों की कमी से कमजोर हैं या कीट का प्रकोप है। खेत की स्थिति देखकर ही खाद का निर्णय लेना चाहिए।
पानी और खेत के वातावरण पर भी रखें नजर
भूरे माहू के प्रबंधन में खेत के सूक्ष्म वातावरण को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। ICAR-National Rice Research Institute की कृषि सलाह में आर्थिक क्षति स्तर के आसपास या उससे ऊपर BPH मिलने पर उपलब्ध सिंचाई सुविधा के अनुसार alternate wetting and drying यानी बारी-बारी से सिंचाई और खेत को सूखने देने की तकनीक अपनाने की सलाह दी गई है।
इसका मतलब यह नहीं है कि फसल को पानी की कमी में छोड़ दिया जाए। उद्देश्य खेत में लगातार एक जैसा जलभराव बनाए रखने के बजाय जरूरत के अनुसार पानी का प्रबंधन करना है। खेत की मिट्टी, फसल की अवस्था और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए सिंचाई का निर्णय किया जाना चाहिए।
किसान को खास तौर पर उन हिस्सों की निगरानी करनी चाहिए जहां पौधों का घनत्व ज्यादा है और हवा का आवागमन कम है। नियमित निरीक्षण से शुरुआती प्रकोप को पहचानने में मदद मिलती है।
कीटनाशक डालने में जल्दबाजी न करें
भूरा माहू दिखाई देते ही कोई भी कीटनाशक उठाकर छिड़क देना सही तरीका नहीं है। सरकारी एकीकृत कीट प्रबंधन दिशा-निर्देशों में रासायनिक नियंत्रण को अंतिम विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने और BPH के लिए अनुशंसित उत्पादों का ही निर्धारित मात्रा में प्रयोग करने पर जोर दिया गया है।
एक और महत्वपूर्ण गलती कई कीटनाशकों को मिलाकर टैंक मिक्स बनाना है। BPH के प्रबंधन संबंधी सरकारी दिशा-निर्देश एक से अधिक कीटनाशकों का मनमाना मिश्रण करने से बचने की सलाह देते हैं। एक ही कीटनाशक को बार-बार इस्तेमाल करने के बजाय जरूरत और अनुशंसा के अनुसार वैकल्पिक रसायनों का उपयोग किया जाना चाहिए।
अगर रासायनिक नियंत्रण की आवश्यकता बनती है, तो किसान को अपने क्षेत्र में धान और भूरा माहू के लिए वर्तमान में अनुशंसित तथा लेबल पर स्वीकृत उत्पाद और मात्रा की पुष्टि करके ही छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव की तकनीक भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि कीट पौधे के निचले हिस्से में रहता है।
भूरा माहू दिखे तो किसान इन बातों का रखें ध्यान
- खेत में नियमित रूप से पौधों के निचले हिस्से और तनों की जांच करें।
- प्रकोप के दौरान बिना जरूरत नाइट्रोजन या यूरिया का अतिरिक्त प्रयोग न करें।
- लगातार जलभराव की स्थिति से बचते हुए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सिंचाई और जल प्रबंधन करें।
- कीटनाशक का इस्तेमाल तभी करें जब आवश्यकता हो और धान में भूरा माहू के लिए अनुशंसित उत्पाद तथा निर्धारित मात्रा का ही पालन करें।
छिड़काव करते समय एक जरूरी सावधानी
भूरे माहू के लिए छिड़काव करना पड़े तो केवल पत्तियों के ऊपरी हिस्से को गीला करना पर्याप्त नहीं हो सकता, क्योंकि कीट अक्सर पौधे के आधार और निचले हिस्से में रहता है। सरकारी प्रबंधन दिशा-निर्देशों में भी स्प्रे को फसल के आधार की ओर निर्देशित करने पर जोर दिया गया है।
कीटनाशक का चयन केवल दुकान पर उपलब्धता के आधार पर नहीं होना चाहिए। उत्पाद का लेबल, फसल, लक्षित कीट, निर्धारित मात्रा और सुरक्षा संबंधी निर्देश देखना जरूरी है। छिड़काव के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल और खाली कीटनाशक डिब्बों का सुरक्षित निपटान भी महत्वपूर्ण है।
प्रकोप बढ़ने का इंतजार करना भारी पड़ सकता है
भूरे माहू के मामले में केवल तब कार्रवाई करना जब खेत में बड़े-बड़े सूखे पैच दिखाई देने लगें, देर हो सकती है। बेहतर तरीका यह है कि किसान शुरुआत से ही फसल की निगरानी करता रहे और किसी संदिग्ध हिस्से में कीट की संख्या बढ़ती दिखे तो तुरंत उसकी पहचान कराए।
ICAR-NRRI की सलाह में 5 से 10 माहू प्रति हिल के आर्थिक क्षति स्तर का उल्लेख किया गया है। हालांकि खेत की स्थिति, किस्म, फसल की अवस्था और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार निर्णय अलग हो सकता है, इसलिए केवल संख्या देखकर बिना पुष्टि के दवा डालना उचित नहीं है।
भूरे माहू का प्रभाव दिखाई देने पर प्रभावित पौधों को ध्यान से जांचना चाहिए और आसपास के हिस्से की भी निगरानी बढ़ा देनी चाहिए। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि समस्या सीमित क्षेत्र में है या पूरे खेत में फैल रही है।
निष्कर्ष
धान में भूरा माहू छोटा कीट जरूर है, लेकिन इसका बढ़ता प्रकोप फसल के लिए गंभीर समस्या बन सकता है। इसकी पहचान का सबसे जरूरी हिस्सा पौधे के निचले हिस्से की नियमित जांच है। ऊपर से सामान्य दिख रहे पौधों के बीच भी नीचे माहू की मौजूदगी हो सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कीट दिखने पर घबराकर यूरिया की अतिरिक्त मात्रा देना या मनमाने तरीके से कई कीटनाशकों का मिश्रण बनाकर छिड़काव करना समस्या का सही समाधान नहीं है। संतुलित पोषण, उचित जल प्रबंधन, नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशक का सही तरीके से इस्तेमाल ही बेहतर प्रबंधन का आधार है।
अगर किसान समय रहते खेत में भूरा माहू की पहचान कर ले और शुरुआती प्रकोप को नजरअंदाज न करे, तो गंभीर नुकसान की स्थिति तक पहुंचने से पहले फसल प्रबंधन के जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं।