धान की फसल में बालियां निकलना बहुत महत्वपूर्ण समय होता है। इसी समय फूल आने और बाद में दाने बनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इस दौरान खेत में पानी और पोषक तत्वों का सही प्रबंधन करने से दाने भरने और फसल की गुणवत्ता में मदद मिल सकती है।
हालांकि, केवल दो काम करने से पैदावार चार गुना बढ़ने की गारंटी नहीं होती। अच्छी पैदावार के लिए किस्म, मिट्टी, मौसम, खाद, पानी और कीट-रोग नियंत्रण सभी का सही होना जरूरी है।
पहली जरूरी बात: खेत में नमी बनाए रखें
बालियां निकलने और फूल आने के समय धान के पौधे को पानी की जरूरत रहती है। इस अवस्था में खेत को पूरी तरह सूखने देना ठीक नहीं है। ICAR की कृषि सलाह के अनुसार बालियां निकलने और फूल आने के समय लगभग 5 सेंटीमीटर पानी का स्तर बनाए रखने की सलाह दी जाती है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि खेत में लगातार बहुत ज्यादा पानी भरा रहे। बारिश ज्यादा होने पर अतिरिक्त पानी खेत से बाहर निकालना भी जरूरी है।
धान में पानी का सही प्रबंधन दाने बनने और भरने की प्रक्रिया के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए बारिश और मिट्टी की नमी को देखते हुए सिंचाई करें।
दूसरी जरूरी बात: इस समय बिना जरूरत यूरिया न डालें
बालियां निकलने के बाद किसान अक्सर फसल को और हरा करने के लिए यूरिया डाल देते हैं। ऐसा बिना जरूरत नहीं करना चाहिए।
ICAR की कृषि सलाह में फूल आने और दाना भरने की अवस्था में नाइट्रोजन की ऊपर से अतिरिक्त मात्रा देने से बचने की सलाह दी गई है। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से फसल में रोग का खतरा बढ़ सकता है और संतुलित पोषण बिगड़ सकता है।
इस समय खाद देने का फैसला खेत की स्थिति और पहले दी गई खाद को देखकर करें। अगर किसी पोषक तत्व की कमी है, तो मिट्टी की जांच और कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर ही सुधार करें।
बालियां निकलने के समय कौन सी बात सबसे ज्यादा जरूरी है?
इस अवस्था में किसान को रोज खेत पर नजर रखनी चाहिए। बालियां निकलने के साथ धान में फूल आते हैं और इसके बाद दाने बनना शुरू होते हैं। इस दौरान पानी की कमी, कीट या बीमारी का असर सीधे दाने बनने पर पड़ सकता है।
खासकर दाने चूसने वाले कीट और दूसरी समस्याओं की समय पर पहचान जरूरी है। हर खेत में कीटनाशक का छिड़काव जरूरी नहीं होता। पहले फसल को ध्यान से देखें और समस्या की पहचान होने पर ही उचित नियंत्रण उपाय अपनाएं।
क्या इस समय कोई खास खाद डालनी चाहिए?
इसका जवाब हर खेत के लिए एक जैसा नहीं है। धान में खाद की सही मात्रा मिट्टी, किस्म और पहले दिए गए पोषक तत्वों पर निर्भर करती है।
ICAR की सलाह के अनुसार धान में उर्वरकों का इस्तेमाल मिट्टी की जांच के आधार पर करना चाहिए। नाइट्रोजन की मुख्य मात्रा सामान्य तौर पर फसल की शुरुआती और कल्ले बनने की अवस्था में बांटकर दी जाती है, जबकि अंतिम नाइट्रोजन की मात्रा फूल आने से पहले देने की सलाह दी जाती है।
इसलिए बालियां निकलने के बाद अपनी तरफ से ज्यादा यूरिया डालना अच्छी खेती का तरीका नहीं है।
दाने भरने के समय खेत की निगरानी कैसे करें?
बालियां निकलने के बाद अगला लक्ष्य स्वस्थ दाने तैयार करना होना चाहिए। खेत में पानी की स्थिति देखें और अगर बारिश के बाद पानी बहुत ज्यादा जमा है तो निकासी की व्यवस्था करें।
साथ ही पत्तियों और बालियों को ध्यान से देखें। अगर कीट या बीमारी के लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से सही नियंत्रण की जानकारी लें।
इस समय इन चार बातों पर ध्यान देना सबसे उपयोगी रहेगा:
- खेत में जरूरत के अनुसार नमी बनाए रखें।
- बारिश के बाद अतिरिक्त पानी खेत में जमा न रहने दें।
- बिना जरूरत यूरिया या नाइट्रोजन की अतिरिक्त मात्रा न डालें।
- कीट और रोग के लक्षण दिखाई देने पर समय पर पहचान और नियंत्रण करें।
फसल कब कटाई के लिए तैयार होगी?
बालियां निकलने के तुरंत बाद धान की कटाई नहीं होती। इसके बाद दाने धीरे-धीरे भरते हैं और पकने की प्रक्रिया पूरी करते हैं।
ICAR की कृषि जानकारी के अनुसार धान में बालियां निकलने के करीब एक महीने बाद फसल पकने की अवस्था में पहुंच सकती है। कटाई का सही समय किस्म और मौसम पर भी निर्भर करता है। जब अधिकांश दाने पककर सुनहरे और कड़े हो जाएं, तब कटाई करना उचित रहता है। बहुत जल्दी कटाई करने से दाने पूरी तरह नहीं भर सकते, जबकि बहुत देर करने पर दाने झड़ने का नुकसान हो सकता है।