सफेद लट का खात्मा! जड़ों में छिपे White Grub को ऐसे करें कंट्रोल | | white grub control

सफेद लट यानी White Grub ऐसी मिट्टी में रहने वाली कीट अवस्था है जो पौधे की जड़ों को अंदर से नुकसान पहुंचाती है। ऊपर से फसल कुछ समय तक सामान्य दिखाई दे सकती है, लेकिन जड़ों के कमजोर होने पर पौधों में पीलापन, मुरझाने और सूखने जैसी समस्या तेजी से बढ़ सकती है।

इस कीट का प्रभाव खासकर गन्ने समेत कई फसलों में देखा जाता है। इसलिए केवल पत्तियों पर दवा का छिड़काव करने के बजाय मिट्टी और जड़ों के आसपास मौजूद लट को ध्यान में रखकर नियंत्रण करना अधिक जरूरी होता है।

White Grub यानी सफेद लट फसल को कैसे नुकसान पहुंचाती है

White Grub वास्तव में कुछ भृंगों की लार्वा अवस्था होती है। यह मिट्टी के अंदर रहकर पौधों की जड़ों को खाती है। जड़ों को लगातार नुकसान पहुंचने से पौधा मिट्टी से पानी और पोषक तत्व ठीक तरह से नहीं ले पाता।

गन्ने में इसके प्रकोप के दौरान पत्तियां पीली पड़ सकती हैं, पूरा पौधा धीरे-धीरे सूख सकता है और प्रभावित गन्ने को जमीन से आसानी से खींचकर निकाला जा सकता है। कई बार खेत में इसका नुकसान एक समान दिखाई देने के बजाय अलग-अलग पैच में नजर आता है।

यही कारण है कि केवल ऊपर दिखाई देने वाले लक्षणों को देखकर तुरंत किसी एक दवा का प्रयोग करना सही तरीका नहीं है। पहले यह देखना जरूरी है कि पौधे की जड़ों के आसपास वास्तव में सफेद लट मौजूद है या नहीं।

खेत में सफेद लट की पहचान कैसे करें

White Grub मिट्टी के अंदर छिपी रहती है, इसलिए इसकी मौजूदगी का पता अक्सर पौधों में दिखाई देने वाले लक्षणों और जड़ों की जांच से चलता है। प्रभावित पौधे को सावधानी से निकालकर जड़ों और आसपास की मिट्टी को देखने पर लट मिल सकती है।

गन्ने में जड़ों को नुकसान होने पर पत्तियों में पीलापन और पौधे के सूखने की स्थिति दिखाई दे सकती है। अधिक प्रकोप वाले पौधे कमजोर होकर गिर भी सकते हैं। ICAR के कृषि कीट संसाधन संबंधी विवरण में भी सफेद लट के कारण जड़ों और तने के आधार को होने वाले नुकसान तथा पत्तियों के पीले पड़ने और पौधों के सूखने जैसे लक्षण बताए गए हैं।

इसलिए खेत में कुछ पौधों के कमजोर दिखाई देने पर पूरे खेत में एक साथ उपचार करने के बजाय प्रभावित हिस्से की मिट्टी की जांच करना उपयोगी रहता है।

सफेद लट को नियंत्रित करने का सबसे जरूरी समय

White Grub के नियंत्रण में समय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका जीवन चक्र मिट्टी और वयस्क भृंग दोनों अवस्थाओं से जुड़ा होता है। कई क्षेत्रों में गर्मी की बारिश के बाद वयस्क भृंग बाहर आते हैं और इसके बाद अंडे देने की प्रक्रिया शुरू होती है। आगे चलकर इन्हीं अंडों से निकलने वाली लट जड़ों को नुकसान पहुंचाती है।

इसलिए केवल उस समय कार्रवाई करना जब पौधे सूखने लगे हों, हमेशा प्रभावी रणनीति नहीं होती। खेत की स्थिति और स्थानीय कीट प्रकोप को देखते हुए वयस्क भृंगों की निगरानी तथा मिट्टी में लट की मौजूदगी पर ध्यान देना जरूरी है।

बारिश के बाद खेत के आसपास वयस्क भृंगों की संख्या बढ़ना भी आने वाले प्रकोप का संकेत हो सकता है। इस समय निगरानी बढ़ाने से शुरुआती अवस्था में नियंत्रण की योजना बनाई जा सकती है।

खेत में White Grub कंट्रोल करने के व्यावहारिक तरीके

सफेद लट मिट्टी के अंदर रहती है, इसलिए इसके प्रबंधन में मिट्टी से जुड़े उपायों को प्राथमिकता देना जरूरी है। गहरी जुताई से मिट्टी में मौजूद लट और प्यूपा ऊपर आ सकते हैं, जहां उन्हें तेज धूप और प्राकृतिक शत्रुओं का सामना करना पड़ता है। ICAR की सलाह में भी गहरी जुताई को सफेद लट के प्रबंधन के उपयोगी उपायों में शामिल किया गया है।

खेत की मेड़ों और आसपास की अनावश्यक खरपतवार को नियंत्रित करना भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वयस्क भृंगों के लिए ऐसे पौधे आश्रय और भोजन का माध्यम बन सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में प्रकाश प्रपंच का इस्तेमाल वयस्क भृंगों की निगरानी और पकड़ने के लिए भी किया जाता है।

जैविक नियंत्रण के लिए Entomopathogenic Nematodes यानी कीट-परजीवी सूत्रकृमि तथा Metarhizium और Beauveria जैसी कीट रोगजनक फफूंद पर आधारित उत्पादों का उपयोग भी किया जाता है। ICAR संस्थानों ने सफेद लट के विरुद्ध ऐसे जैव-नियंत्रण विकल्पों पर तकनीकें विकसित और परीक्षण की हैं।

खेत की स्थिति के अनुसार इन उपायों को इस तरह अपनाया जा सकता है:

  • फसल की जड़ों और आसपास की मिट्टी की नियमित जांच करें तथा सफेद लट की मौजूदगी की पुष्टि करें।
  • फसल के अनुसार गहरी जुताई और खेत की सफाई जैसे कृषि उपाय अपनाएं, ताकि मिट्टी में छिपे कीटों पर दबाव बढ़े।
  • वयस्क भृंग दिखाई देने के समय उनकी निगरानी बढ़ाएं और जहां उपयुक्त हो वहां प्रकाश प्रपंच जैसे उपाय अपनाएं।
  • जैविक नियंत्रण के लिए केवल कृषि विभाग या फसल के लिए अनुशंसित पंजीकृत उत्पाद और उसकी निर्धारित विधि का ही इस्तेमाल करें।

जैविक नियंत्रण में Metarhizium और सूत्रकृमि की भूमिका

सफेद लट के खिलाफ जैविक नियंत्रण को एक उपयोगी विकल्प माना जाता है। Metarhizium anisopliae जैसी कीट रोगजनक फफूंद मिट्टी में मौजूद कीटों को संक्रमित कर सकती है। ICAR-NBAIR की एक विकसित तकनीक में Metarhizium anisopliae आधारित उत्पाद को गन्ने में White Grub के प्रबंधन के लिए मिट्टी में देने की व्यवस्था बताई गई है।

इसी तरह Entomopathogenic Nematodes यानी EPN भी मिट्टी में रहने वाले कीटों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाते हैं। ICAR-Sugarcane Breeding Institute के अनुसार गन्ने में सफेद लट नियंत्रण के लिए EPN आधारित तकनीक का खेत स्तर पर परीक्षण किया गया है और अलग-अलग परीक्षणों में लट की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई।

हालांकि जैविक उत्पाद का असर उसकी गुणवत्ता, सही समय, मिट्टी की नमी, तापमान और प्रयोग की सही विधि पर निर्भर कर सकता है। इसलिए किसी भी जैविक उत्पाद को केवल नाम देखकर इस्तेमाल करने के बजाय उसके लेबल और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रयोग करना बेहतर है।

रासायनिक दवा इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान

White Grub के लिए अलग-अलग फसलों और क्षेत्रों में अलग-अलग रासायनिक नियंत्रण विकल्पों की सिफारिश मिलती है। इसलिए किसी दूसरी फसल के लिए बताई गई दवा या मात्रा को अपनी फसल में सीधे इस्तेमाल करना सुरक्षित तरीका नहीं है।

कुछ कृषि सलाहों में मिट्टी में इस्तेमाल किए जाने वाले कीटनाशकों का उल्लेख मिलता है, लेकिन इनके प्रयोग की मात्रा, समय और तरीका फसल, कीट की प्रजाति तथा स्थानीय अनुशंसा के अनुसार बदल सकता है। इसलिए खेत में उपलब्ध किसी भी पुरानी दवा को अनुमान से डालना उचित नहीं है।

विशेष रूप से मिट्टी में डालने वाली दवा का उपयोग करते समय उत्पाद के लेबल पर दर्ज फसल, कीट, मात्रा और सुरक्षा निर्देशों का पालन करना चाहिए। जरूरत से ज्यादा दवा डालने से कीट नियंत्रण बेहतर होगा, यह मानना सही नहीं है।

सफेद लट से बचाव के लिए खेत प्रबंधन क्यों जरूरी है

White Grub का नियंत्रण केवल एक बार दवा डालने से पूरी तरह सुनिश्चित नहीं किया जा सकता। इसकी अलग-अलग अवस्थाएं मिट्टी और खेत के आसपास मौजूद रह सकती हैं। इसलिए जिस खेत में पहले प्रकोप रहा हो, वहां अगली फसल में भी शुरुआती निगरानी रखना समझदारी है।

फसल की जड़ों को स्वस्थ रखने, खेत में जल प्रबंधन सही रखने और खरपतवार नियंत्रण जैसे सामान्य कृषि उपाय भी पौधों को नुकसान सहने में मदद करते हैं। जहां लगातार प्रकोप दिखाई देता है, वहां फसल चक्र और जुताई जैसे उपायों को स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार अपनाया जा सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि पौधे के ऊपर दिखाई देने वाले लक्षणों को देखकर ही White Grub मान लेने के बजाय मिट्टी और जड़ों की जांच से इसकी पुष्टि की जाए। इससे गलत कीटनाशक के इस्तेमाल और अनावश्यक खर्च से बचा जा सकता है।

निष्कर्ष

सफेद लट यानी White Grub का असली नुकसान मिट्टी के अंदर होता है, इसलिए इसका प्रभाव दिखाई देने तक जड़ों को काफी नुकसान हो सकता है। पत्तियों का पीला पड़ना, पौधों का मुरझाना, जड़ों का कमजोर होना और प्रभावित पौधों का आसानी से निकलना इसके महत्वपूर्ण संकेत हो सकते हैं।

इसके नियंत्रण के लिए खेत की नियमित निगरानी, गहरी जुताई, खरपतवार और मेड़ प्रबंधन, वयस्क भृंगों की निगरानी तथा जरूरत के अनुसार जैविक या अनुशंसित रासायनिक नियंत्रण को एक साथ अपनाना अधिक प्रभावी रणनीति हो सकती है। खासकर बारिश के बाद वयस्क भृंगों की गतिविधि पर नजर रखना जरूरी है।

किसान अगर शुरुआत में ही मिट्टी और जड़ों की जांच करके सफेद लट की पहचान कर लें और अपनी फसल तथा क्षेत्र के अनुसार अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाएं, तो जड़ों को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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