उत्तर प्रदेश के बागपत जिले में प्राकृतिक खेती योजना से जुड़ी लाभार्थी सूची को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सूची में ऐसे लोगों के नाम भी सामने आए हैं जिनके पास कृषि भूमि नहीं है, जो खेती नहीं करते या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। मामले के सामने आने के बाद कृषि विभाग की लाभार्थी सूची और सत्यापन प्रक्रिया चर्चा में आ गई है।
1250 किसानों को योजना से जोड़ने का लक्ष्य
बागपत जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए खेकड़ा, बागपत और छपरौली क्षेत्र में कुल 10 क्लस्टर बनाए गए हैं। प्रत्येक क्लस्टर में 125 किसानों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह कुल 1250 किसानों को योजना से जोड़ने की प्रक्रिया है।
राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन के तहत किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने, प्रशिक्षण लेने और प्राकृतिक कृषि सामग्री तैयार करने जैसी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहन दिया जाता है। केंद्र सरकार के मार्च 2026 के विवरण के अनुसार, पात्र किसानों को अधिकतम एक एकड़ तक की सीमा में दो वर्षों तक प्रति एकड़ प्रति वर्ष ₹4,000 का उत्पादन आधारित प्रोत्साहन दिया जाता है।
लाभार्थी सूची में 350 नामों पर सवाल
रिपोर्ट के अनुसार, बागपत में प्राकृतिक खेती योजना की लाभार्थी सूची में करीब 350 ऐसे नाम सामने आए हैं जिनमें भूमिहीन, खेती नहीं करने वाले और मृतक व्यक्ति शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट में कुछ ग्रामीणों के बयान भी दर्ज किए गए हैं, जिन्होंने कहा कि उन्होंने प्राकृतिक खेती नहीं की और उन्हें योजना में अपना नाम शामिल होने की जानकारी भी नहीं थी।
एक मामले में कुर्डी निवासी देवेंद्र के बारे में बताया गया कि उनके नाम कृषि भूमि नहीं है, फिर भी उनका नाम योजना की सूची में शामिल है। इसी तरह बदरखा और नांगल के कुछ लोगों ने भी योजना में नाम होने के बावजूद प्राकृतिक खेती नहीं करने की बात कही।
मृतक व्यक्ति का नाम भी सूची में
मामले में एक मृत किसान का नाम भी लाभार्थी सूची में होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, कुर्डी गांव के एक किसान की करीब दो वर्ष पहले मृत्यु हो चुकी थी, इसके बावजूद उनका नाम प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों की सूची में दर्ज मिला।
ऐसे मामलों से यह सवाल उठता है कि लाभार्थियों का चयन और अंतिम सत्यापन किस स्तर पर किया गया। हालांकि, किसी व्यक्ति का नाम सूची में होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि राशि का गलत भुगतान हुआ है। इसके लिए विभागीय जांच और भुगतान रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
किसानों को कैसे मिलता है प्राकृतिक खेती का प्रोत्साहन?
प्राकृतिक खेती में रासायनिक उर्वरकों और रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के बजाय खेत पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से कृषि सामग्री तैयार करने पर जोर दिया जाता है। केंद्र सरकार के अनुसार, प्राकृतिक खेती में बीजामृत और जीवामृत जैसे जैव-इनपुट के इस्तेमाल तथा किसानों को प्रशिक्षण देने की व्यवस्था भी मिशन का हिस्सा है।
बागपत की योजना में भी किसानों को क्लस्टर स्तर पर प्राकृतिक खेती से जोड़ने और प्रशिक्षण देने की प्रक्रिया निर्धारित है। ऐसे में किसी किसान को लाभार्थी सूची में शामिल करने से पहले उसकी पात्रता और खेती से जुड़ी जानकारी का सत्यापन महत्वपूर्ण हो जाता है।
कृषि विभाग ने जांच की बात कही
मामले पर कृषि विभाग की ओर से कहा गया है कि जिन लोगों के पास जमीन नहीं है या जिनकी मृत्यु हो चुकी है, उन्हें प्राकृतिक खेती योजना में शामिल नहीं किया जा सकता। कृषि उप निदेशक विभाति चतुर्वेदी के अनुसार, यदि सूची में अपात्र या मृतक लोगों के नाम शामिल मिले हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी और जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान के बाद अब मुख्य सवाल यह है कि सूची में इन नामों को किस प्रक्रिया के तहत शामिल किया गया और लाभार्थियों के सत्यापन के दौरान इन्हें क्यों नहीं हटाया गया। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामला केवल रिकॉर्ड संबंधी गलती है या इसमें किसी स्तर पर जानबूझकर अनियमितता हुई है।
आगे क्या हो सकता है?
प्राकृतिक खेती योजना का उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से जुड़े खर्च को कम करने और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में सहायता देना है। ऐसे में पात्र किसानों तक योजना का लाभ पहुंचना और लाभार्थी सूची का सही होना दोनों महत्वपूर्ण हैं।
बागपत में सामने आए मामले में अब विभागीय जांच के बाद वास्तविक स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। जांच में यदि अपात्र नामों के शामिल होने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदारी तय करने और रिकॉर्ड को सही करने की कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरी योजना में फर्जीवाड़ा हुआ है; अंतिम स्थिति जांच और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
बागपत में प्राकृतिक खेती योजना की लाभार्थी सूची में मृतकों, भूमिहीनों और खेती नहीं करने वाले लोगों के नाम सामने आने की रिपोर्ट के बाद मामला चर्चा में है। 1250 किसानों को योजना से जोड़ने के लक्ष्य के बीच करीब 350 नामों पर सवाल उठने की बात सामने आई है। कृषि विभाग ने ऐसे नामों की जांच कराने और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की बात कही है।
अब नजर विभागीय जांच पर रहेगी। जांच से यह स्पष्ट होगा कि लाभार्थी सूची में ये नाम किस स्तर पर शामिल हुए, क्या किसी को योजना की राशि मिली और यदि अनियमितता हुई है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है।