हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए मामले में वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और संबंधित विभाग के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
डीएम के सामने शिकायत में क्या उठाया गया मामला?
AIMIM जिलाध्यक्ष की ओर से जिलाधिकारी को दिए गए शिकायत पत्र में उप कृषि निदेशक कार्यालय के कामकाज को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने विभिन्न प्रशासनिक मामलों में नियमों और उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया है।
शिकायत में कार्यालय की कार्यप्रणाली से जुड़े कर्मचारियों की तैनाती और स्थानांतरण के बाद कार्यमुक्त करने जैसे मामलों को भी शामिल किया गया है।
प्रधान सहायक के स्थानांतरण का मुद्दा
शिकायत में प्रधान सहायक संजीव पटेल के स्थानांतरण का भी उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उनका स्थानांतरण 15 मई 2025 को उप कृषि निदेशक कार्यालय बस्ती के लिए हुआ था, लेकिन इसके बावजूद उन्हें महराजगंज कार्यालय से कार्यमुक्त नहीं किया गया।
शिकायतकर्ता ने इस मामले में नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। रिपोर्ट के अनुसार, 14 सितंबर 2026 को हुई मुलाकात का भी शिकायत में जिक्र किया गया है। इसमें दो दिन के भीतर कार्यमुक्त करने का आश्वासन दिए जाने का दावा किया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के अनुसार निर्धारित समय के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई।
एक पद पर तीन एसएमएस की तैनाती का आरोप
शिकायत में कार्यालय में एसएमएस की तैनाती को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। AIMIM जिलाध्यक्ष का दावा है कि जहां एक पद स्वीकृत है, वहां तीन एसएमएस तैनात हैं।
इसके अलावा फील्ड में काम करने वाले कर्मचारियों को कार्यालय में बैठाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि इससे मैदानी कार्य और किसानों से संबंधित गतिविधियों पर असर पड़ सकता है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
मिठौरा में एडीओ कृषि का पद खाली होने का मामला
शिकायत में मिठौरा विकासखंड में एडीओ कृषि का पद रिक्त होने का मुद्दा भी उठाया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, पद खाली होने के बावजूद एक अधिकारी को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने इस व्यवस्था की भी जांच कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अतिरिक्त प्रभार देने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार है या नहीं।
कार्यालय में पान-गुटखा खाने का भी आरोप
शिकायत पत्र में उप कृषि निदेशक के कार्यालय में पान, गुटखा और मसाला खाने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने इसे कार्यालय की कार्य संस्कृति और पद की गरिमा से जोड़ते हुए जांच की मांग की है।
यह आरोप भी शिकायतकर्ता के दावे के रूप में सामने आया है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं हुई है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
इस पूरे मामले में फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उप कृषि निदेशक के खिलाफ लगाए गए आरोप शिकायत के आधार पर हैं। अभी तक उपलब्ध जानकारी में किसी प्रशासनिक जांच के अंतिम निष्कर्ष या आरोपों की पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है।
शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी से सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। यदि जांच में किसी आरोप की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों या कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
किसानों से जुड़े कामकाज पर भी पड़ सकता है असर
कृषि विभाग का काम किसानों को योजनाओं, कृषि तकनीक, अनुदान और विभागीय सेवाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में जिला स्तर के कृषि कार्यालय की प्रशासनिक व्यवस्था और कर्मचारियों की उपलब्धता सीधे विभागीय कामकाज को प्रभावित कर सकती है।
इसी वजह से शिकायत में उठाए गए प्रशासनिक बिंदुओं की जांच होने पर यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि कार्यालय की मौजूदा व्यवस्था नियमों के अनुरूप है या उसमें किसी तरह की सुधार की जरूरत है।
महराजगंज में AIMIM जिलाध्यक्ष सरवर खान ने उप कृषि निदेशक के खिलाफ विभिन्न अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से जांच की मांग की है। शिकायत में कर्मचारी स्थानांतरण, एसएमएस की तैनाती, रिक्त पद, कार्यालय की कार्यप्रणाली और अन्य प्रशासनिक मुद्दे उठाए गए हैं।
फिलहाल इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अब मामले में प्रशासनिक स्तर पर जांच होती है या नहीं और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं, इसी से पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।