भाकृअनुप आरसी एनईएच उमियम में Workshop, पूर्वोत्तर पहाड़ी कृषि के लिए Biotechnology पर चर्चा
मेघालय के उमियम स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के उत्तर-पूर्वी पर्वतीय क्षेत्र अनुसंधान परिसर में पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र की कृषि के लिए Biotechnology की संभावनाओं पर एक दिवसीय Workshop आयोजित की गई। 18 सितंबर 2026 को आयोजित इस कार्यक्रम में वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों और युवा शोधार्थियों ने हिस्सा लिया। कार्यशाला का उद्देश्य आधुनिक जैव प्रौद्योगिकी को पूर्वोत्तर क्षेत्र की वास्तविक कृषि समस्याओं के समाधान से जोड़ने पर चर्चा करना था।
Plant Biotechnology पर हुआ मंथन
कार्यशाला का आयोजन Society for Plant Biochemistry and Biotechnology (SPBB) और ICAR Research Complex for NEH Region, Umiam ने संयुक्त रूप से किया। कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि Biotechnology के आधुनिक उपकरणों को पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र की अलग-अलग कृषि परिस्थितियों के अनुरूप किस तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।
ICAR Research Complex for NEH Region के निदेशक डॉ. जी. कादिरवेल ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। उन्होंने पूर्वोत्तर राज्यों की बदलती जलवायु परिस्थितियों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के लिए फसल सुधार और Biotechnology के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थानीय और स्वदेशी फसलों के सुधार में जैव प्रौद्योगिकी की संभावनाओं को तलाशने की जरूरत बताई।
Tissue Culture और Speed Breeding पर जोर
कार्यशाला में पूर्व निदेशक डॉ. अरुणावा पटनायक ने Tissue Culture और Apical Rooted Cuttings (ARC) के उपयोग पर जोर दिया। इन तकनीकों के जरिए बड़े स्तर पर रोगमुक्त पौध रोपण सामग्री तैयार करने और उसे बढ़ावा देने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
उन्होंने Speed Breeding जैसी आधुनिक तकनीकों का भी उल्लेख किया। इसका उद्देश्य फसल सुधार की प्रक्रिया को तेज करने और बेहतर कृषि सामग्री विकसित करने की दिशा में काम करना है।
Climate-Resilient फसलों की जरूरत
कार्यशाला में वैज्ञानिकों ने पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र की विविध कृषि-जलवायु परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए Biofortified और Climate-Resilient फसल किस्मों के विकास पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों के अनुसार क्षेत्र की अलग-अलग परिस्थितियों के लिए फसल सुधार में पारंपरिक Breeding और Biotechnology को एक साथ आगे बढ़ाने की जरूरत है।
इसका उद्देश्य ऐसी कृषि तकनीक और फसल सामग्री विकसित करना है जो क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों तथा जलवायु से जुड़ी चुनौतियों के अनुरूप बेहतर तरीके से काम कर सके।
पूर्वोत्तर पहाड़ी कृषि की प्रमुख चुनौतियां
कार्यशाला में केवल Biotechnology की संभावनाओं पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की कृषि में मौजूद प्रमुख चुनौतियों को भी सामने रखा गया। इनमें मिट्टी, मौसम, पानी और गुणवत्तापूर्ण बीज व पौध सामग्री से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
- क्षेत्र के कई हिस्सों में अम्लीय और पोषक तत्वों की कमी वाली मिट्टी कृषि के लिए चुनौती है।
- फसलों को जैविक और अजैविक तनाव का सामना करना पड़ता है।
- जलवायु और पानी से जुड़ी परिस्थितियां कृषि उत्पादन को प्रभावित कर सकती हैं।
- गुणवत्तापूर्ण बीज और पौध रोपण सामग्री की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
Research से Field तक तकनीक पहुंचाने पर जोर
विशेषज्ञों ने इस बात पर भी ध्यान दिया कि प्रयोगशाला या शोध संस्थानों में विकसित तकनीकों का प्रभाव तभी अधिक होगा जब उन्हें किसानों के खेतों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाया जा सके। इसलिए कार्यशाला में शोध परिणामों के Validation, संस्थागत क्षमता, सहयोग और Field-Level Deployment जैसे विषयों पर भी विचार किया गया।
कार्यशाला का उद्देश्य केवल सामान्य चर्चा तक सीमित रहने के बजाय ऐसी Biotechnology प्राथमिकताओं की पहचान करना था, जिन्हें वैज्ञानिक प्रमाण और क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के आधार पर आगे बढ़ाया जा सके।
वैज्ञानिकों और युवा शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण मंच
कार्यक्रम में डॉ. टी. आर. शर्मा और डॉ. अरुणावा पटनायक समेत कृषि एवं Biotechnology क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए। डॉ. शर्मा ने युवा पेशेवरों और शोधार्थियों के लिए ऐसे कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया और कृषि तथा संबद्ध क्षेत्रों में Biotechnology के उपयोग से जुड़े ज्ञान को आगे बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
ऐसे Workshops से शोधकर्ताओं को क्षेत्र-विशिष्ट कृषि समस्याओं को समझने, नए विचारों पर चर्चा करने और अलग-अलग संस्थानों के बीच सहयोग की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिलता है।
उमियम में आयोजित इस Workshop में पूर्वोत्तर पहाड़ी क्षेत्र की कृषि समस्याओं के लिए Biotechnology को उपयोगी तकनीकी विकल्प के रूप में विकसित करने पर चर्चा हुई। Tissue Culture, रोगमुक्त पौध सामग्री, Speed Breeding और Climate-Resilient फसल विकास जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही वैज्ञानिक शोध को वास्तविक खेतों और किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर जोर रहा।
पूर्वोत्तर क्षेत्र की विविध कृषि परिस्थितियों को देखते हुए स्थानीय फसलों और संसाधनों के अनुरूप तकनीक विकसित करना इस दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। कार्यशाला में हुई चर्चाओं का लक्ष्य ऐसी वैज्ञानिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाना है जिनका भविष्य में खेत स्तर पर व्यावहारिक उपयोग किया जा सके।