मक्के की खेती में चाहिए बेहतर उत्पादन? Expert से जानिए Best Variety से सिंचाई तक की पूरी जानकारी

मक्के की खेती में अच्छा उत्पादन पाने के लिए केवल अच्छी किस्म का बीज चुनना ही पर्याप्त नहीं है। सही समय पर बुवाई, उचित पौध संख्या, संतुलित पोषण, खरपतवार नियंत्रण और फसल की महत्वपूर्ण अवस्थाओं पर पर्याप्त नमी बनाए रखना भी जरूरी है। ICAR की कृषि सलाह में भी स्थानीय जलवायु के अनुसार उपयुक्त हाइब्रिड या किस्म चुनने और फसल की जरूरत के मुताबिक प्रबंधन करने पर जोर दिया गया है।

Best Variety का चुनाव सबसे पहले

मक्के की एक ही किस्म पूरे देश के सभी क्षेत्रों के लिए सबसे अच्छी नहीं मानी जा सकती। किसानों को अपने क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी, सिंचाई सुविधा और फसल के उद्देश्य के अनुसार अनुशंसित किस्म या हाइब्रिड का चयन करना चाहिए।

ICAR की जानकारी में Pusa Vivek QPM 9 Improved और DMRH 1308 जैसी मक्का किस्मों और हाइब्रिड का उल्लेख मिलता है। Pusa Vivek QPM 9 Improved को उच्च विटामिन-A वाला मक्का हाइब्रिड बताया गया है, जबकि DMRH 1308 को व्यापक अनुकूलता वाला हाई-यील्डिंग हाइब्रिड बताया गया है। हालांकि किसान को अपने क्षेत्र के लिए मान्य सिफारिश को प्राथमिकता देनी चाहिए।

बुवाई का सही समय और पौध दूरी

मक्के की फसल में सही समय पर बुवाई होने से पौधों को शुरुआती अवस्था में अनुकूल परिस्थितियां मिल सकती हैं। ICAR की खरीफ सलाह में कई क्षेत्रों के लिए मानसून शुरू होने से पहले या पर्याप्त मिट्टी की नमी उपलब्ध होने पर बुवाई करने की सलाह दी गई है। वर्षा आधारित खेती में पर्याप्त नमी मिलने के बाद बुवाई करना महत्वपूर्ण है।

कई सामान्य परिस्थितियों में करीब 60 सेंटीमीटर कतार दूरी और 20 सेंटीमीटर पौध दूरी का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन स्थानीय सिफारिश के अनुसार इसमें बदलाव हो सकता है। ICAR की सलाह में लगभग 20-25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर बीज दर का उल्लेख भी मिलता है।

खेत में जल निकासी का रखें ध्यान

मक्के को पानी की जरूरत होती है, लेकिन खेत में लंबे समय तक पानी खड़ा रहना फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है। खासकर अंकुरण और शुरुआती बढ़वार के दौरान खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए।

इसलिए बुवाई से पहले खेत में जल निकासी की व्यवस्था देख लेना जरूरी है। भारी बारिश वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त पानी को खेत से बाहर निकालने की व्यवस्था फसल को बचाने में मदद कर सकती है।

खाद और उर्वरक का संतुलित इस्तेमाल

मक्के की अच्छी फसल के लिए नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों की जरूरत होती है। लेकिन उर्वरक की मात्रा सभी खेतों के लिए एक जैसी नहीं रखी जा सकती। मिट्टी की जांच, क्षेत्र, किस्म और सिंचाई व्यवस्था के आधार पर पोषक तत्व प्रबंधन करना बेहतर तरीका है।

ICAR की सामान्य खरीफ सलाह में मक्के के लिए जैविक खाद के साथ नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश देने तथा नाइट्रोजन को अलग-अलग चरणों में देने की बात कही गई है। जिंक की कमी होने की स्थिति में जिंक सल्फेट के इस्तेमाल का भी उल्लेख है।

सिंचाई कब सबसे जरूरी है?

मक्के की फसल में पानी की कमी किसी भी अवस्था में नुकसान पहुंचा सकती है, लेकिन कुछ अवस्थाएं विशेष रूप से महत्वपूर्ण होती हैं। ICAR की सलाह के अनुसार टसलिंग, सिल्किंग और दाना भरने के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी बनाए रखना जरूरी है।

सिंचाई का अंतराल मिट्टी के प्रकार, मौसम और उपलब्ध नमी के अनुसार तय किया जाना चाहिए। वर्षा होने पर खेत में जरूरत से ज्यादा पानी देने से बचना चाहिए और जलभराव की स्थिति में निकासी का प्रबंध करना चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण से बढ़ सकता है फायदा

मक्के के शुरुआती विकास के दौरान खरपतवार फसल के साथ पानी और पोषक तत्वों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं। इसलिए समय पर खरपतवार नियंत्रण जरूरी है।

ICAR की सलाह में बुवाई के बाद शुरुआती दिनों में खरपतवार नियंत्रण और लगभग 20 तथा 40 दिन बाद अंतर-खुरपी या निदाई-गुड़ाई जैसे उपायों का उल्लेख है। किसी भी खरपतवारनाशी का इस्तेमाल स्थानीय अनुशंसा और लेबल निर्देश के अनुसार ही किया जाना चाहिए।

कीट और रोगों की लगातार निगरानी

मक्के में तना छेदक, शूट फ्लाई, फॉल आर्मीवर्म और एफिड जैसे कीट समस्या पैदा कर सकते हैं। इसलिए खेत का नियमित निरीक्षण करना जरूरी है। पत्तियों और पौधों में असामान्य लक्षण दिखाई देने पर समय रहते समस्या की पहचान करनी चाहिए।

बिना समस्या की सही पहचान किए किसी रासायनिक दवा का इस्तेमाल करना उचित नहीं है। कीट या रोग की पुष्टि होने पर स्थानीय कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग की अनुशंसा के अनुसार ही नियंत्रण उपाय अपनाना बेहतर रहता है।

बेहतर उत्पादन के लिए इन बातों का रखें ध्यान

मक्के की खेती में किसानों को इन जरूरी बातों पर विशेष ध्यान देना चाहिए:

  • अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित और प्रमाणित बीज या हाइब्रिड का चयन करें।
  • पर्याप्त मिट्टी की नमी होने पर समय पर बुवाई करें और उचित पौध दूरी बनाए रखें।
  • मिट्टी की जांच के आधार पर संतुलित खाद और उर्वरक प्रबंधन करें।
  • टसलिंग, सिल्किंग और दाना भरने जैसी महत्वपूर्ण अवस्थाओं में पानी की कमी न होने दें।

फसल की कटाई भी सही समय पर करें

मक्के की फसल को बहुत जल्दी काटने पर दानों में नमी अधिक हो सकती है, जबकि बहुत देर तक खेत में छोड़ने पर मौसम और कीटों से नुकसान का जोखिम बढ़ सकता है। ICAR की सलाह में जब भुट्टे का छिलका भूरा होने लगे और दाने कठोर तथा चमकदार हो जाएं, तब कटाई की ओर बढ़ने की बात कही गई है। कटाई के बाद भुट्टों को अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है। सुरक्षित भंडारण के लिए दानों की नमी को लगभग 13-14 प्रतिशत तक लाने की सलाह दी गई है।

मक्के में बेहतर उत्पादन के लिए Best Variety के साथ पूरी खेती का वैज्ञानिक प्रबंधन जरूरी है। किसान अपने क्षेत्र के अनुसार प्रमाणित बीज चुनें, समय पर बुवाई करें, उचित पौध दूरी रखें और मिट्टी की जांच के आधार पर पोषण प्रबंधन करें। सिंचाई में खास तौर पर टसलिंग, सिल्किंग और दाना भरने की अवस्था का ध्यान रखना चाहिए। साथ ही खरपतवार, कीट और रोगों की नियमित निगरानी से फसल को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिल सकती है। स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग की क्षेत्र-विशिष्ट सलाह को प्राथमिकता देना सबसे उचित रहेगा।

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