गन्ने की फसल में बंधाई यानी प्रॉपिंग का काम पौधों को सहारा देने और तेज हवा या बारिश में गिरने से बचाने के लिए किया जाता है। इसके बाद फसल की बढ़वार और पोषण पर भी ध्यान देना जरूरी होता है, लेकिन इस समय खाद का इस्तेमाल केवल जरूरत और पहले दिए गए उर्वरकों के हिसाब से करना चाहिए।
गन्ना बंधाई के बाद खाद देना क्यों जरूरी है
गन्ने की बढ़वार के दौरान पौधे मिट्टी से लगातार नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्व लेते हैं। फसल की अवस्था के अनुसार इन पोषक तत्वों की जरूरत अलग-अलग होती है। इसलिए बंधाई के बाद बिना जरूरत एक साथ कई तरह की खाद डालना सही तरीका नहीं माना जाता।
गन्ने में नाइट्रोजन मुख्य रूप से हरी बढ़वार और पौधे के विकास में मदद करता है, जबकि पोटाश पौधे की मजबूती और कई शारीरिक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फास्फोरस का संबंध जड़ों और शुरुआती विकास से अधिक होता है। इस वजह से फसल की वर्तमान अवस्था और पहले दिए गए उर्वरक को देखकर ही अगली खाद का फैसला करना चाहिए।
नाइट्रोजन की बची हुई मात्रा का रखें ध्यान
गन्ने में नाइट्रोजन की पूरी मात्रा एक साथ देने के बजाय अलग-अलग समय पर देने की सिफारिश की जाती है। कृषि सलाह के अनुसार फसल में नाइट्रोजन की बची हुई मात्रा को बाद की अवस्था में टॉप ड्रेसिंग के रूप में दिया जाता है। इसलिए बंधाई के समय या उसके बाद यह देखना जरूरी है कि खेत में पहले कितनी नत्रजन दी जा चुकी है।
यदि खेत में नाइट्रोजन की निर्धारित मात्रा पहले ही पूरी की जा चुकी है, तो केवल पौधे की हरियाली देखकर अतिरिक्त यूरिया डालना उचित नहीं है। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने से पोषक तत्वों का संतुलन बिगड़ सकता है और खेती की लागत भी बढ़ सकती है।
यूरिया के साथ पोटाश का भी रखें संतुलन
किसानों के बीच गन्ने में यूरिया को सबसे प्रमुख खाद मानकर इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति आम है, लेकिन गन्ने की फसल को केवल नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती। पोटाश भी संतुलित पोषण का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
गन्ने में पोटाश की जरूरत मिट्टी, फसल की अवस्था और पहले किए गए उर्वरक प्रयोग पर निर्भर करती है। इसलिए बंधाई के बाद खेत में पोटाश की कमी है या नहीं, इसका आकलन करने के बाद ही इसकी मात्रा तय करनी चाहिए। मिट्टी की जांच उपलब्ध हो तो उसके आधार पर खाद का चयन करना ज्यादा बेहतर रहता है।
फास्फोरस और अन्य पोषक तत्व कब दें
फास्फोरस को सामान्य तौर पर गन्ने की शुरुआती अवस्था में देना अधिक महत्वपूर्ण होता है। इसलिए बंधाई के बाद बिना जांच के बड़ी मात्रा में फास्फोरस डालना जरूरी नहीं है। यदि फसल में किसी पोषक तत्व की कमी दिखाई दे रही है, तो उसकी पहचान के बाद ही सुधारात्मक उपाय करना बेहतर है।
कुछ क्षेत्रों की मिट्टी में जिंक, सल्फर या बोरॉन जैसे पोषक तत्वों की कमी हो सकती है। लेकिन इन सूक्ष्म पोषक तत्वों का इस्तेमाल हर खेत में एक जैसा नहीं किया जाना चाहिए। मिट्टी की जांच के आधार पर जरूरत होने पर ही इनका प्रयोग करना संतुलित पोषण की दृष्टि से उचित रहता है।
खाद डालते समय इन बातों का रखें ध्यान
बंधाई के बाद खाद देने का निर्णय लेते समय किसान को पूरे सीजन में अब तक किए गए उर्वरक प्रयोग का हिसाब रखना चाहिए। केवल पौधे की ऊंचाई या पत्तियों का रंग देखकर बार-बार यूरिया डालना सही तरीका नहीं है।
- खेत में पहले दी गई यूरिया और अन्य उर्वरकों की मात्रा का हिसाब रखें।
- मिट्टी की जांच के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश का संतुलन तय करें।
- जिंक, सल्फर या बोरॉन जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व जरूरत होने पर ही दें।
- खाद की मात्रा फसल और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार तय करें।
गन्ने की फसल में खाद का सही समय अधिक महत्वपूर्ण
गन्ने में केवल खाद की मात्रा ही महत्वपूर्ण नहीं होती, बल्कि उसे सही अवस्था में देना भी जरूरी है। वैज्ञानिक सिफारिशों में नाइट्रोजन को फसल की अलग-अलग अवस्थाओं में बांटकर देने पर जोर दिया जाता है। वहीं फास्फोरस और पोटाश की मात्रा भी मिट्टी और फसल की स्थिति के अनुसार निर्धारित की जाती है।
बंधाई के बाद अगर किसान को लगता है कि फसल कमजोर है या पत्तियों का रंग सामान्य नहीं है, तो तुरंत कई उर्वरकों को मिलाकर डालने के बजाय पहले कारण समझना चाहिए। पोषक तत्वों की कमी, पानी की स्थिति, जड़ों की समस्या या अन्य कारणों से भी फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है।
ज्यादा खाद डालने से नहीं बढ़ता गन्ने का उत्पादन
गन्ने में अधिक खाद डालना हमेशा अधिक उत्पादन की गारंटी नहीं देता। जरूरत से ज्यादा उर्वरक देने से लागत बढ़ने के साथ पोषक तत्वों का असंतुलन भी पैदा हो सकता है। इसी कारण संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर जोर दिया जाता है।
विशेष रूप से यूरिया की मात्रा फसल की जरूरत के अनुसार ही रखनी चाहिए। यदि पहले ही पर्याप्त नाइट्रोजन दी जा चुकी है, तो बंधाई के बाद अतिरिक्त यूरिया डालने से पहले कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
गन्ना बंधाई के बाद खेत में खाद और उर्वरक का इस्तेमाल फसल की वास्तविक जरूरत देखकर करना चाहिए। इस अवस्था में सबसे जरूरी बात यह है कि किसान पहले दी गई खाद का हिसाब रखे और उसके बाद ही नाइट्रोजन, पोटाश या किसी सूक्ष्म पोषक तत्व की आवश्यकता तय करे। मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरक प्रबंधन करने से अनावश्यक खाद डालने से बचा जा सकता है और फसल को संतुलित पोषण मिल सकता है। गन्ने में अच्छी बढ़वार के लिए अधिक खाद नहीं, बल्कि सही पोषक तत्व, सही मात्रा और सही समय महत्वपूर्ण है।