मानसून का मौसम शुरू होते ही गन्ने की फसल में कई रोग सक्रिय हो जाते हैं। इनमें बैक्टिरियल टॉप रोट एक ऐसा जीवाणु जनित रोग है जो पत्तियों से शुरू होकर ऊपरी अगोले को पूरी तरह सड़ा सकता है। समय पर पहचान और सही उपाय से इस नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता है।
रोग क्या है और कब फैलता है
बैक्टिरियल टॉप रोट गन्ने का जीवाणु जनित रोग है। यह खासतौर पर जून से वर्षा ऋतु के अंत तक ज्यादा सक्रिय रहता है। अधिक नमी और गर्म मौसम में जीवाणु तेजी से फैलता है। बारिश के पानी और हवा के साथ यह एक पौधे से दूसरे पौधे तक पहुंच जाता है। खेत में जलभराव होने पर रोग और भी तेजी से बढ़ता है।
मुख्य लक्षण और पहचान कैसे करें
शुरुआती लक्षण पत्तियों पर साफ दिखते हैं। मध्य शिरा के समानांतर गहरे लाल रंग की लंबी धारियां बन जाती हैं। ये धारियां पहले हल्की जलभरी दिखती हैं फिर लाल से गहरे मैरून रंग की हो जाती हैं।
जब रोग बढ़ता है तो गन्ने का ऊपरी अगोला प्रभावित होने लगता है। बीच की नई पत्तियां सूखने लगती हैं और पूरा अगोला सड़ जाता है। सड़े हुए हिस्से से तेज दुर्गंध आती है। ऊपरी तने को खींचने पर वह आसानी से बाहर निकल आता है क्योंकि अंदर का गूदा सड़ चुका होता है। तने के अंदर लाल-भूरे रंग का सड़न और कभी-कभी खोखले स्थान भी दिख सकते हैं।
रोग फैलने के कारण
जीवाणु मुख्य रूप से घावों और रंध्रों के रास्ते पौधे में प्रवेश करता है। संक्रमित पौधों से निकलने वाला चिपचिपा पदार्थ बारिश की बूंदों और हवा के साथ फैलता है। जलभराव वाले खेतों में रोग तेजी से फैलता है। कमजोर या संवेदनशील किस्मों में यह ज्यादा नुकसान पहुंचाता है।
नियंत्रण के प्रभावी उपाय
रोग को पूरी तरह रोकने के लिए मिश्रित तरीके अपनाने चाहिए। सबसे पहले संक्रमित पौधों को जड़ सहित उखाड़कर खेत से बाहर निकाल दें और नष्ट कर दें। खेत में पानी न रुकने दें और अच्छी जल निकासी का प्रबंध रखें।
रासायनिक नियंत्रण के लिए शुरुआती लक्षण दिखते ही छिड़काव करें।
- स्ट्रेप्टोसाइक्लिन 0.01 प्रतिशत घोल यानी 40 ग्राम दवा को 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें
- कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 डब्ल्यूपी 0.2 प्रतिशत यानी 800 ग्राम दवा को स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के साथ मिलाकर इस्तेमाल करें
- 15 दिन के अंतराल पर दो बार छिड़काव करें ताकि रोग पूरी तरह नियंत्रित हो जाए
- छिड़काव सुबह या शाम के समय करें जब हवा शांत हो
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
रोग प्रतिरोधी या सहनशील किस्मों का चुनाव करें। स्वस्थ बीज गन्ना ही लगाएं। खेत की नियमित निगरानी रखें खासकर मानसून के दौरान। जलभराव वाले क्षेत्रों में सिंचाई का सही प्रबंधन करें। फसल अवशेषों को खेत में न छोड़ें।
समय रहते पहचान और सही दवा का छिड़काव करने से बैक्टिरियल टॉप रोट को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है। यह लाल सड़न की तरह लाइलाज नहीं है। नियमित निरीक्षण और तुरंत कार्रवाई से फसल को बचाया जा सकता है और पैदावार सुरक्षित रखी जा सकती है। किसान भाई इन उपायों को अपनाकर गन्ने की फसल को इस रोग से सुरक्षित रख सकते हैं।