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टॉप बोरर से भी खतरनाक है 0238 में ये बीमारी। Ganne me poka boing ki dvai kon si hai

टॉप बोरर से भी खतरनाक है 0238 में ये बीमारी। Ganne me poka boing ki dvai kon si hai

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गन्ने की लोकप्रिय किस्म Co 0238 में इन दिनों पोका बोइंग बीमारी किसानों के लिए चिंता का कारण बन रही है। इसकी शुरुआती पत्तियां मुड़ने, सिकुड़ने और पीली पड़ने लगती हैं, जिससे कई बार किसान इसे टॉप बोरर का प्रकोप समझ लेते हैं।

खास बात यह है कि पोका बोइंग की वजह कीट नहीं बल्कि फफूंद संक्रमण है। इसलिए टॉप बोरर में इस्तेमाल होने वाली कीटनाशक दवा इस बीमारी को सीधे नियंत्रित नहीं करती। समय रहते लक्षण पहचानकर सही फफूंदनाशी का इस्तेमाल करना जरूरी है।

Co 0238 में पोका बोइंग बीमारी क्यों गंभीर है

Co 0238 गन्ने की ऐसी किस्म है जिसे उत्तर भारत में लंबे समय तक बड़े क्षेत्र में उगाया गया है। इस किस्म पर पोका बोइंग का प्रकोप अलग-अलग क्षेत्रों में दर्ज किया गया है। उत्तर प्रदेश में भी Co 0238 समेत कई गन्ना किस्मों में इस बीमारी की मौजूदगी दर्ज की गई है।

पोका बोइंग को Fusarium प्रजातियों से जुड़ी फफूंद बीमारी माना जाता है। गर्म और नमी वाली परिस्थितियां इसके विकास के लिए अनुकूल रहती हैं। बारिश, अधिक आर्द्रता और खेत में लगातार अनुकूल मौसम रहने पर बीमारी तेजी से दिखाई दे सकती है।

इसी वजह से मानसून के आसपास किसान खेत की ऊपरी पत्तियों पर खास नजर रखें। बीमारी का शुरुआती चरण में पता लगने पर नियंत्रण अपेक्षाकृत आसान रहता है, जबकि गंभीर अवस्था में पौधे का बढ़वार वाला हिस्सा भी प्रभावित हो सकता है।

पोका बोइंग के लक्षण टॉप बोरर से कैसे अलग हैं

पोका बोइंग में सबसे पहले गन्ने की नई और ऊपरी पत्तियों पर असर दिखाई देता है। पत्तियां सामान्य आकार में विकसित नहीं हो पातीं और उनमें सिकुड़न तथा मरोड़ दिखाई दे सकती है। कुछ मामलों में नई पत्तियां छोटी और विकृत होकर निकलती हैं।

टॉप बोरर में मुख्य समस्या कीट की इल्ली से जुड़ी होती है, जबकि पोका बोइंग में फफूंद संक्रमण मुख्य कारण है। इसलिए केवल पत्तियों के मुड़ने या सूखने को देखकर तुरंत कीटनाशक का छिड़काव करना सही तरीका नहीं है।

पोका बोइंग बढ़ने पर ऊपरी हिस्से में सड़न जैसी स्थिति और तने पर चाकू से काटे गए निशान जैसी आकृति भी दिखाई दे सकती है। इसे बीमारी की गंभीर अवस्था का संकेत माना जाता है।

किसान खेत में इन लक्षणों को देखें:

  • नई पत्तियां पीली, सिकुड़ी और मुड़ी हुई दिखाई देना
  • पत्तियों का सामान्य आकार छोटा रह जाना और उनका विकृत होना
  • गन्ने के ऊपरी हिस्से में सड़न या बढ़वार वाले भाग का प्रभावित होना
  • तने पर चाकू से काटे गए निशान जैसी आकृति दिखाई देना

गन्ने में पोका बोइंग की दवा कौन सी है

पोका बोइंग फफूंद से जुड़ी बीमारी होने के कारण इसके नियंत्रण में फफूंदनाशी का उपयोग किया जाता है। उपलब्ध कृषि अनुसंधान और फसल सलाह में कार्बेन्डाजिम, कॉपर ऑक्सीक्लोराइड और प्रोपिकोनाजोल जैसे फफूंदनाशियों की प्रभावशीलता बताई गई है।

भारतीय गन्ना अनुसंधान से जुड़े हालिया कार्य में पोका बोइंग प्रभावित गन्ने में प्रोपिकोनाजोल के छिड़काव के बाद नई पत्तियों में सुधार देखा गया है। वहीं कृषि विश्वविद्यालयों की सलाह में शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर प्रोपिकोनाजोल आधारित उपचार की सिफारिश भी मिलती है।

कुछ कृषि सलाह में कार्बेन्डाजिम 0.1 प्रतिशत घोल यानी लगभग 1 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से पत्तियों पर छिड़काव की सलाह दी गई है। कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का उपयोग भी कुछ सिफारिशों में किया गया है। दवा की सही मात्रा उत्पाद के फॉर्मुलेशन और स्थानीय अनुशंसा के अनुसार ही रखनी चाहिए।

इसलिए किसान बिना बीमारी की पहचान किए कई अलग-अलग दवाओं को मिलाकर छिड़काव न करें। जिस फफूंदनाशी का इस्तेमाल किया जा रहा है, उसके लेबल पर दी गई फसल, मात्रा और सुरक्षा संबंधी जानकारी का पालन करना जरूरी है।

बीमारी दिखाई दे तो खेत में क्या करें

पोका बोइंग का नियंत्रण केवल दवा के छिड़काव तक सीमित नहीं होना चाहिए। संक्रमित पौधों की पहचान, खेत की निगरानी और प्रभावित हिस्सों को हटाने जैसे उपाय भी महत्वपूर्ण हैं।

खासकर जिन पौधों में ऊपरी हिस्सा गंभीर रूप से प्रभावित हो गया है, उन्हें खेत में छोड़ने के बजाय सावधानी से निकालकर नष्ट करने की सलाह दी जाती है। इससे खेत में संक्रमण के स्रोत को कम करने में मदद मिल सकती है।

छिड़काव करते समय भी यह ध्यान रखना चाहिए कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने के बाद सही समय पर उपचार किया जाए। बहुत ज्यादा प्रभावित पौधे को केवल दवा के भरोसे छोड़ देना हमेशा प्रभावी नहीं होता।

पोका बोइंग फैलने से बचाने के लिए सावधानी

इस बीमारी का प्रसार हवा के साथ-साथ संक्रमित रोपण सामग्री, पानी के छींटों और अन्य माध्यमों से भी हो सकता है। इसलिए अगले सीजन के लिए स्वस्थ और रोगमुक्त गन्ने की बुवाई सामग्री चुनना महत्वपूर्ण है।

खेत में जलभराव जैसी स्थिति से बचाव और उचित खेत प्रबंधन भी जरूरी है। गर्म और नम मौसम में खेत की नियमित निगरानी करने से शुरुआती लक्षण पकड़ने में मदद मिलती है।

बीमारी वाले खेत से स्वस्थ खेत में औजार, रोपण सामग्री या संक्रमित पौधों के अवशेष ले जाने से भी बचना चाहिए। एक ही दवा का बार-बार अनावश्यक इस्तेमाल करने के बजाय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार प्रभावी फफूंदनाशी का चयन करना बेहतर रहता है।

किसानों के लिए सबसे जरूरी बात

Co 0238 में पोका बोइंग को केवल टॉप बोरर समझकर कीटनाशक का छिड़काव करना सही तरीका नहीं है। दोनों की समस्या और नियंत्रण का तरीका अलग है। यदि ऊपरी पत्तियां सिकुड़ रही हैं, मुड़ रही हैं, पीली पड़ रही हैं और बाद में तने के ऊपरी हिस्से में चाकू के कट जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो पोका बोइंग की संभावना पर ध्यान देना चाहिए।

शुरुआती अवस्था में बीमारी की सही पहचान कर फफूंदनाशी का उपचार करने से नुकसान को कम किया जा सकता है। कार्बेन्डाजिम और प्रोपिकोनाजोल जैसे फफूंदनाशियों का उपयोग गन्ने में पोका बोइंग के प्रबंधन के लिए कृषि अनुसंधान एवं विस्तार सिफारिशों में किया गया है, लेकिन इस्तेमाल की मात्रा संबंधित उत्पाद के फॉर्मुलेशन और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार ही तय करनी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बीमारी के लक्षणों को देखकर दवा का चुनाव करें, केवल इस आधार पर नहीं कि खेत में पहले टॉप बोरर की समस्या रही है। समय पर पहचान, प्रभावित पौधों को हटाना और सही फफूंदनाशी का इस्तेमाल Co 0238 में पोका बोइंग से होने वाले नुकसान को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

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