धान की तीसरी और अंतिम खाद का पूरा डोज | 15 KG पोटाश + 5 KG MgSO₄ + यूरिया

धान की फसल में तीसरी और अंतिम खाद का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवस्था में पौधे तेजी से बालियां बनाने और दाना भरने की दिशा में बढ़ते हैं, इसलिए पोषक तत्वों की जरूरत भी फसल की स्थिति के अनुसार बदल जाती है।

हालांकि 15 किलो पोटाश, 5 किलो MgSO₄ और यूरिया का एक ही डोज हर खेत और हर किस्म के लिए सार्वभौमिक सिफारिश नहीं माना जा सकता। खाद की मात्रा मिट्टी, किस्म, पहले दी गई खाद और फसल की अवस्था के आधार पर तय करनी चाहिए।

तीसरी खाद कब डालनी चाहिए

धान में नाइट्रोजन की मात्रा आमतौर पर कई हिस्सों में देने की सलाह दी जाती है। उपलब्ध कृषि सलाह के अनुसार नाइट्रोजन की अंतिम मात्रा फूल आने या बाली बनने से पहले दी जा सकती है, जबकि पोटाश की मात्रा भी फसल की जरूरत के अनुसार विभाजित करके दी जाती है।

इसलिए तीसरी खाद डालने से पहले खेत की वास्तविक स्थिति देखना जरूरी है। यदि फसल पहले से ही बहुत गहरे हरे रंग की है और नाइट्रोजन की पर्याप्त मात्रा मौजूद है, तो केवल मात्रा बढ़ाने के लिए अतिरिक्त यूरिया डालना उचित नहीं है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर कृषि विशेषज्ञ लगातार जोर देते हैं।

15 किलो पोटाश और 5 किलो MgSO₄ की भूमिका

पोटाश धान की फसल में पौधों की मजबूती, पानी के उपयोग और विभिन्न जैविक प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। धान में पोटाश की जरूरत फसल की किस्म और मिट्टी की पोषक स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है। कुछ कृषि परिस्थितियों में पोटाश की बची हुई मात्रा को बाद की अवस्था में देने की सलाह दी जाती है।

MgSO₄ यानी मैग्नीशियम सल्फेट से मैग्नीशियम और सल्फर मिलते हैं। लेकिन इसे हर धान के खेत में अनिवार्य खाद नहीं माना जा सकता। मैग्नीशियम या सल्फर की कमी होने पर इसका उपयोग अधिक तर्कसंगत होता है। इसलिए 5 किलो MgSO₄ डालने से पहले मिट्टी की स्थिति और फसल में दिखाई देने वाले पोषक तत्वों की कमी के लक्षणों को ध्यान में रखना चाहिए।

यूरिया की अंतिम मात्रा कैसे तय करें

यूरिया धान को नाइट्रोजन उपलब्ध कराती है और नाइट्रोजन की कमी होने पर पौधों की बढ़वार तथा उत्पादन प्रभावित हो सकता है। लेकिन जरूरत से अधिक यूरिया डालना भी सही तरीका नहीं है। हाल की कृषि सलाह में मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर संतुलित उर्वरक इस्तेमाल करने पर विशेष जोर दिया गया है।

धान में यूरिया की अंतिम मात्रा तय करते समय यह देखना चाहिए कि पहले कितनी नाइट्रोजन दी जा चुकी है। इसके साथ फसल की किस्म, पौधों का रंग, बढ़वार और बाली बनने की अवस्था को भी ध्यान में रखना चाहिए। केवल कैलेंडर के हिसाब से हर खेत में समान मात्रा डालना वैज्ञानिक तरीका नहीं है।

खाद डालते समय इन बातों का रखें ध्यान

तीसरी खाद का उद्देश्य फसल की वास्तविक पोषण आवश्यकता को पूरा करना होना चाहिए, न कि खेत में अधिक से अधिक खाद डालना। विशेष रूप से यूरिया के मामले में संतुलन रखना जरूरी है, क्योंकि अत्यधिक नाइट्रोजन से पोषक तत्वों का उपयोग कम प्रभावी हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में फसल की समस्याएं बढ़ सकती हैं।

खाद डालने से पहले किसान इन बातों पर ध्यान दे सकते हैं:

  • खेत में फसल की अवस्था और पौधों का रंग देखकर नाइट्रोजन की जरूरत का आकलन करें।
  • पोटाश की मात्रा को पहले दी गई खाद के हिसाब से समायोजित करें।
  • MgSO₄ को मिट्टी या फसल में मैग्नीशियम और सल्फर की जरूरत के आधार पर इस्तेमाल करें।
  • खाद की मात्रा तय करने में मिट्टी जांच और स्थानीय कृषि सलाह को प्राथमिकता दें।

खाद डालने के बाद खेत का प्रबंधन

तीसरी खाद डालने के बाद केवल खाद देना ही पर्याप्त नहीं है। खेत में पानी की स्थिति भी महत्वपूर्ण होती है। यूरिया की टॉप ड्रेसिंग के समय खेत में अनावश्यक रूप से अधिक पानी रहने से खाद के उपयोग की दक्षता प्रभावित हो सकती है। इसलिए खाद डालने की प्रक्रिया स्थानीय कृषि सलाह और खेत की परिस्थितियों के अनुसार करनी चाहिए।

इस अवस्था में फसल की नियमित निगरानी भी जरूरी है। पौधों की बढ़वार, पत्तियों का रंग, बाली निकलने की स्थिति और खेत में पानी की स्थिति देखते रहें। यदि फसल पहले से संतुलित और अच्छी अवस्था में है, तो केवल अधिक उत्पादन की उम्मीद में अतिरिक्त यूरिया या अन्य खाद डालना जरूरी नहीं है।

अंतिम खाद का सही मतलब क्या है

धान की तीसरी और अंतिम खाद को लेकर किसानों के बीच अलग-अलग डोज बताए जाते हैं। 15 किलो पोटाश और 5 किलो MgSO₄ के साथ यूरिया देने की बात कुछ खेती पद्धतियों में सुनने को मिल सकती है, लेकिन इसे सभी खेतों के लिए निश्चित और सार्वभौमिक डोज मानना सही नहीं होगा।

धान में उर्वरक की सही मात्रा मुख्य रूप से मिट्टी की उर्वरता, किस्म, पहले इस्तेमाल किए गए उर्वरक और फसल की वर्तमान अवस्था पर निर्भर करती है। वैज्ञानिक सलाह भी मिट्टी जांच आधारित संतुलित पोषण को प्राथमिकता देती है।

निष्कर्ष

धान की तीसरी और अंतिम खाद फसल के लिए महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर खेत में एक समान मात्रा में यूरिया, पोटाश और MgSO₄ डाल दिया जाए। 15 किलो पोटाश और 5 किलो MgSO₄ को भी खेत की वास्तविक जरूरत के अनुसार ही इस्तेमाल करना चाहिए।

सबसे बेहतर तरीका यही है कि पहले दी गई खाद का हिसाब रखें, फसल की अवस्था देखें और संभव हो तो मिट्टी जांच के आधार पर अंतिम डोज तय करें। संतुलित खाद प्रबंधन से अनावश्यक खर्च कम करने के साथ फसल को उसकी जरूरत के अनुसार पोषण देना संभव होता है।

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