फसल में बांस या लकड़ी के खूंटे गाड़ने की जरूरत अक्सर तब पड़ती है, जब बेल वाली सब्जियों को सहारा देना हो, मचान तैयार करना हो या खेत में किसी अस्थायी ढांचे को मजबूती देनी हो। लेकिन सख्त जमीन में हर खूंटा आसानी से नहीं गड़ता और बार-बार गड्ढा खोदने में काफी मेहनत लग सकती है।
ऐसे में खूंटा गाड़ने का आसान तरीका काम आ सकता है, जिसमें पहले जमीन को थोड़ी जगह से ढीला करके खूंटे को सही स्थिति में मजबूती से बैठाया जाता है। इससे बांस को अनावश्यक रूप से ज्यादा चोट पहुंचाने से भी बचाया जा सकता है।
बांस या खूंटा गाड़ने में सबसे बड़ी परेशानी क्या आती है
खेत की मिट्टी हर जगह एक जैसी नहीं होती। कहीं मिट्टी भुरभुरी होती है तो कहीं ऊपर से सूखी और नीचे से काफी सख्त। बरसात के बाद कई जगह जमीन नरम हो जाती है, जबकि लंबे समय तक बारिश न होने पर ऊपर की परत कड़ी हो सकती है। ऐसी स्थिति में सीधे बांस को हथौड़े या किसी भारी वस्तु से ठोकने पर बांस फटने या टूटने का खतरा रहता है।
मचान वाली खेती में खूंटे का मजबूत होना खास तौर पर जरूरी है, क्योंकि बाद में इन्हीं खूंटों पर तार या रस्सी का भार आता है और बेलों का वजन भी बढ़ता जाता है। इसलिए केवल खूंटा गाड़ना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे जमीन में इस तरह बैठाना जरूरी है कि वह दबाव पड़ने पर आसानी से हिले नहीं।
खूंटा गाड़ने का आसान तरीका कैसे अपनाएं
सबसे पहले जिस जगह बांस का खूंटा लगाना है, वहां की मिट्टी को देखकर सही स्थान तय करें। अगर जमीन बहुत सख्त है तो सीधे बांस ठोकने के बजाय पहले किसी मजबूत लोहे की छड़ या सब्बल जैसी वस्तु से जमीन में शुरुआती छेद बनाया जा सकता है। छेद इतना ही रखा जाए कि बांस को जमीन में बैठाने में आसानी हो और आसपास की मिट्टी उसे पकड़ सके।
इसके बाद बांस का निचला सिरा जमीन में बने स्थान पर रखें और धीरे-धीरे दबाकर या नियंत्रित तरीके से बैठाएं। बहुत जोर से एक ही बार में चोट करने के बजाय जरूरत के अनुसार धीरे-धीरे खूंटे को नीचे ले जाना बेहतर रहता है। इससे बांस के टूटने और जमीन के ऊपर वाले हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की संभावना कम होती है।
अगर जमीन बहुत ढीली है तो केवल ऊपर से बांस डालने से वह हिल सकता है। ऐसी स्थिति में खूंटे के आसपास की मिट्टी को अच्छी तरह दबाना जरूरी है। जरूरत पड़ने पर आसपास की मिट्टी को वापस भरकर पैर या उपयुक्त औजार से दबाया जा सकता है, ताकि खूंटे को पकड़ मिल सके।
मचान के लिए खूंटा लगाते समय इन बातों का रखें ध्यान
बेल वाली सब्जियों की खेती में बांस के खूंटों का इस्तेमाल सहारा देने वाले ढांचे के रूप में किया जाता है। बांस के खंभों के ऊपर तार बांधकर बेलों को ऊपर चढ़ाया जा सकता है। इस तरह की व्यवस्था में खूंटों की दूरी और ऊंचाई फसल तथा बनाए जाने वाले मचान के डिजाइन के अनुसार रखी जाती है।
खूंटे लगाते समय इन बातों पर विशेष ध्यान देना उपयोगी रहेगा:
- बांस सीधा, मजबूत और बिना बड़े टूटे हिस्सों वाला होना चाहिए।
- खूंटे का निचला हिस्सा जमीन में पर्याप्त मजबूती से बैठना चाहिए।
- बहुत सख्त जमीन में सीधे बांस पर जोरदार प्रहार करने के बजाय पहले जमीन को ढीला करना बेहतर है।
- तार या रस्सी बांधने से पहले सभी खूंटों को हिलाकर उनकी मजबूती जरूर जांच लें।
बांस को मजबूत बनाने के लिए ऊपर से सहारा भी जरूरी
केवल जमीन में खूंटा गाड़ देने से पूरा ढांचा मजबूत नहीं हो जाता। जब कई बांसों को एक साथ मचान के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो उन्हें आपस में जोड़ना जरूरी होता है। ऊपर की तरफ बांस या मजबूत तार को व्यवस्थित तरीके से बांधने से भार कई खूंटों में बंट सकता है।
अगर मचान खुले खेत में बना है तो हवा का दबाव भी ढांचे पर पड़ सकता है। इसलिए किनारे वाले खूंटों को विशेष मजबूती देना जरूरी है। जरूरत के अनुसार रस्सी या तार से बाहरी खूंटों को अतिरिक्त सहारा दिया जा सकता है, जिससे पूरा ढांचा एक तरफ झुकने से बचे।
बेल वाली फसल जैसे खीरा, करेला, लौकी और दूसरी चढ़ने वाली सब्जियों में पौधों का वजन बढ़ने के साथ मचान पर भार भी बढ़ता है। इसलिए शुरुआत में ही कमजोर खूंटे लगाने के बजाय पर्याप्त मजबूत बांस का चयन करना ज्यादा उपयोगी रहता है।
खूंटा गाड़ते समय किन गलतियों से बचें
सबसे आम गलती यह होती है कि किसान सख्त जमीन में बांस को सीधे बहुत जोर से ठोकना शुरू कर देते हैं। इससे बांस के ऊपरी हिस्से में दरार आ सकती है या वह बीच से कमजोर हो सकता है। दूसरी गलती बहुत पतले या पहले से सड़े हुए बांस का इस्तेमाल करना है।
खूंटों को बहुत कम गहराई तक लगाने पर भी समस्या हो सकती है। ऊपर से देखने पर खूंटा मजबूत दिखाई दे सकता है, लेकिन तार बांधने या बेल का वजन बढ़ने के बाद वह हिलना शुरू कर सकता है। इसी तरह बहुत ढीली मिट्टी में खूंटे के आसपास की मिट्टी को दबाए बिना मचान तैयार करना भी सही तरीका नहीं है।
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खेत में बार-बार बांस के खूंटे लगाने की जरूरत पड़ने पर जमीन को पहले थोड़ा ढीला करके खूंटा बैठाने का तरीका मेहनत कम करने में मदद कर सकता है। खासकर तब, जब जमीन ऊपर से कड़ी हो और सामान्य तरीके से बांस गाड़ने में परेशानी आ रही हो।
मचान तैयार करते समय पहले सभी खूंटों की जगह नापकर तय करना, फिर एक-एक करके जमीन तैयार करना और अंत में तार या रस्सी बांधना ज्यादा व्यवस्थित तरीका रहेगा। इससे पूरे ढांचे की मजबूती भी जांची जा सकती है और बाद में बार-बार खूंटे ठीक करने की जरूरत कम हो सकती है।
निष्कर्ष
फसल में बांस या खूंटा गाड़ना देखने में छोटा काम लगता है, लेकिन मचान और सहारे वाली खेती में इसी की मजबूती पूरे ढांचे को प्रभावित करती है। सख्त जमीन में सीधे बांस पर ज्यादा जोर लगाने के बजाय पहले जमीन को उचित औजार से ढीला करके खूंटे को बैठाना आसान और व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
खूंटा लगाने के बाद उसके आसपास की मिट्टी को अच्छी तरह दबाना, ऊपर के हिस्से को आपस में जोड़ना और तार या रस्सी का भार देने से पहले मजबूती जांचना जरूरी है। सही तरीके से लगाया गया मजबूत बांस फसल के बढ़ने के साथ बेहतर सहारा दे सकता है और मचान को ज्यादा स्थिर रखने में मदद करता है।