मिट्टी की सेहत और फसल की अच्छी बढ़वार के लिए किसानों के बीच ह्यूमिक अर्क की चर्चा आम हो गई है। इसे मिट्टी का काला सोना कहा जाता है क्योंकि यह मिट्टी में छिपे पोषक तत्वों को पौधों तक पहुंचाने में मदद करता है। घर पर ही 15 दिन में इसे तैयार करके खेत की उर्वरता बढ़ाई जा सकती है।
ह्यूमिक अर्क आखिर है क्या
ह्यूमिक अर्क कार्बनिक पदार्थों के पूर्ण विघटन से बनने वाला गहरा रंग का तरल पदार्थ है। यह पौधों के अवशेष, गोबर और अन्य जैविक सामग्री से धीरे-धीरे तैयार होता है। मिट्टी में यह प्राकृतिक रूप से मौजूद रहता है लेकिन आधुनिक खेती में इसकी मात्रा कम हो जाती है। जब इसे बाहरी रूप से दिया जाता है तो मिट्टी की संरचना सुधरती है और जड़ें बेहतर तरीके से पोषक तत्व सोख पाती हैं।
यह अर्क मिट्टी के कणों को जोड़कर पानी धारण करने की क्षमता बढ़ाता है। साथ ही सूक्ष्मजीवों की गतिविधि तेज करता है जिससे मिट्टी जीवंत बनी रहती है।
घर पर बनाने के फायदे
बाजार में उपलब्ध ह्यूमिक उत्पाद महंगे पड़ते हैं और उनकी गुणवत्ता हर बार एक जैसी नहीं होती। घर पर बनाने से लागत लगभग शून्य रहती है और सामग्री आसानी से उपलब्ध हो जाती है। पुराने उपले या गोबर के कंडे, गुड़ और वेस्ट डीकंपोजर जैसी चीजें गांव-घर में आसानी से मिल जाती हैं।
इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है और मिट्टी लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है। नियमित इस्तेमाल से फसल की जड़ें सफेद और मजबूत होती हैं तथा पौधों की बढ़वार संतुलित रहती है।
15 दिन में घर का ह्यूमिक अर्क तैयार करने की विधि
सबसे सरल और प्रचलित तरीका पुराने उपलों से है। एक साफ प्लास्टिक ड्रम या मिट्टी का बड़ा बर्तन लें। लगभग 15 से 20 पुराने उपले या कंडे तोड़कर डाल दें। इसमें 10 से 15 लीटर साफ पानी मिलाएं। फिर 100 से 200 ग्राम गुड़ घोलकर डाल दें और थोड़ा वेस्ट डीकंपोजर मिलाएं। गुड़ सूक्ष्मजीवों को सक्रिय करने का काम करता है।
मिश्रण को अच्छी तरह हिलाएं और बर्तन को छायादार जगह पर ढककर रख दें। रोज या एक-दो दिन के अंतराल पर लकड़ी की छड़ी से हिलाते रहें। 12 से 15 दिन बाद पानी गहरा भूरा या काला रंग ले लेता है। अब सूती कपड़े से छान लें। बचे हुए ठोस अवशेष को खाद में मिलाया जा सकता है।
दूसरा आसान तरीका बासी चावल से भी है। एक किलो बासी चावल में गुड़ और पानी मिलाकर 10 से 15 दिन किण्वन करने पर भी इसी तरह का अर्क मिलता है। दोनों तरीकों में तापमान गर्म रखने से प्रक्रिया तेज होती है।
इस्तेमाल का सही तरीका
तैयार अर्क को पतला करके इस्तेमाल करें। सिंचाई के पानी के साथ मिलाकर खेत में दें या पौधों की जड़ों के पास डालें। पत्तों पर छिड़काव भी किया जा सकता है लेकिन घोल बहुत पतला रखना चाहिए।
एक एकड़ खेत के लिए मात्रा फसल और मिट्टी की स्थिति के अनुसार तय करें। आमतौर पर सिंचाई के समय मिलाकर देना ज्यादा प्रभावी रहता है। रासायनिक दवाओं के साथ मिलाकर इस्तेमाल न करें क्योंकि इससे अर्क की प्रभावशीलता कम हो सकती है।
मिट्टी और फसल पर दिखने वाले बदलाव
ह्यूमिक अर्क मिट्टी में पोषक तत्वों को पौधों के लिए उपलब्ध रूप में लाता है। जड़ों का विकास तेज होता है जिससे पौधा ज्यादा पानी और खनिज सोख पाता है। मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ने से सूखे की स्थिति में भी फसल बेहतर टिकती है।
सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ने से जैविक प्रक्रियाएं सक्रिय रहती हैं। कई किसानों के अनुभव में नियमित इस्तेमाल से फसल की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार देखा गया है। मिट्टी की कठोरता कम होती है और लंबे समय तक उर्वरता बनी रहती है।
ध्यान रखने वाली बातें
- अर्क को ठंडी और छायादार जगह पर बंद बर्तन में रखें ताकि उसकी गुणवत्ता बनी रहे
- बहुत ज्यादा मात्रा न डालें क्योंकि जरूरत से ज्यादा भी नुकसान पहुंचा सकता है
- ताजा तैयार अर्क ही इस्तेमाल करें और अगर बदबू आने लगे तो दोबारा न बनाएं
- अलग-अलग फसलों में परिणाम मिट्टी के प्रकार और मौसम के अनुसार बदल सकते हैं
घर पर तैयार ह्यूमिक अर्क मिट्टी को फिर से जीवंत बनाने का सरल और सस्ता तरीका है। नियमित रूप से अपनाने से खेत की सेहत सुधरती है और पैदावार में स्थायी सुधार संभव होता है। सही विधि और सही मात्रा अपनाकर किसान इस काले सोने का पूरा फायदा उठा सकते हैं।