फसल में रस चूसने वाले या पत्तियों को नुकसान पहुंचाने वाले कीट दिखाई देने पर किसान ऐसी दवा चाहते हैं जिसका असर जल्दी शुरू हो जाए। कुछ आधुनिक कीटनाशक ऐसे होते हैं जिनमें छिड़काव के बाद बहुत कम समय में कीटों की गतिविधि और भोजन करने की प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।
हालांकि, 15 मिनट में असर दिखने का मतलब यह नहीं है कि सभी कीट 15 मिनट में मर जाएंगे। असर शुरू होने और कीट के पूरी तरह मरने के बीच अंतर होता है, इसलिए दवा का चुनाव और उपयोग हमेशा फसल, कीट तथा उत्पाद के निर्धारित लेबल के अनुसार करना जरूरी है।
15 मिनट में असर दिखने का क्या मतलब है
तेज असर वाले कीटनाशक की खासियत यह होती है कि सक्रिय तत्व कीट के शरीर या उसकी तंत्रिका संबंधी प्रक्रिया पर जल्दी प्रभाव डालना शुरू कर सकता है। इसका शुरुआती परिणाम कीट की सामान्य गतिविधि में कमी, पत्तियों से रस चूसने की प्रक्रिया रुकना या कीट के सुस्त पड़ने के रूप में दिखाई दे सकता है।
कुछ कीटनाशकों के मामले में कीट का भोजन करना बहुत जल्दी बंद हो जाता है। इससे फसल को होने वाला तत्काल नुकसान कम होने लगता है, भले ही कीट को पूरी तरह मरने में इससे अधिक समय लगे। इसलिए किसान को केवल खेत में गिरे हुए या मरे हुए कीट देखकर ही दवा की सफलता तय नहीं करनी चाहिए।
तेज असर वाले कीटनाशक किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं
जब खेत में कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा हो, तब शुरुआती नियंत्रण काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। कीट लगातार पत्तियों, तनों या अन्य कोमल हिस्सों से भोजन करते रहें तो पौधों की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। ऐसे समय पर जल्दी गतिविधि रोकने वाली दवा नुकसान को आगे बढ़ने से रोकने में मदद कर सकती है।
लेकिन तेज असर का मतलब अधिक मात्रा में दवा डालना नहीं है। किसी भी कीटनाशक की प्रभावशीलता उसकी निर्धारित मात्रा, सही पानी की मात्रा, छिड़काव की गुणवत्ता और लक्षित कीट पर निर्भर करती है। जरूरत से ज्यादा दवा डालने से बेहतर परिणाम की गारंटी नहीं मिलती और इससे फसल, पर्यावरण तथा उपयोग करने वाले व्यक्ति के लिए जोखिम बढ़ सकता है।
15 मिनट में दिखने वाला असर किन बातों पर निर्भर करता है
एक ही कीटनाशक का परिणाम हर खेत में बिल्कुल एक जैसा दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। मौसम, कीट की अवस्था, कीटों की संख्या और पौधे पर दवा का सही तरीके से पहुंचना असर की गति को प्रभावित कर सकते हैं।
खास तौर पर पत्तियों के नीचे छिपने वाले कीटों के मामले में अच्छी कवरेज बहुत जरूरी होती है। यदि स्प्रे का घोल कीट या उसके रहने वाले पौधे के हिस्से तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंचा, तो तेज असर वाली दवा भी अपेक्षित परिणाम नहीं दे सकती।
किसान को यह भी समझना चाहिए कि कीट की प्रजाति और उसकी अवस्था के अनुसार दवा की संवेदनशीलता अलग हो सकती है। इसलिए केवल इस आधार पर किसी कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए कि वह दूसरे कीट पर जल्दी असर करता है।
कीटनाशक का छिड़काव करते समय इन बातों का रखें ध्यान
तेज असर वाली दवा का उपयोग करते समय सुरक्षा और सही तकनीक उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना उसका असर। खेत में छिड़काव करने से पहले उत्पाद के लेबल पर दी गई फसल, लक्षित कीट, मात्रा और सावधानियों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।
- निर्धारित फसल और लक्षित कीट के लिए ही पंजीकृत तथा अनुशंसित कीटनाशक का उपयोग करें।
- लेबल पर दी गई मात्रा से अधिक दवा डालकर असर तेज करने की कोशिश न करें।
- छिड़काव के दौरान दस्ताने, मास्क और शरीर को ढकने वाले उपयुक्त सुरक्षात्मक कपड़ों का इस्तेमाल करें।
- तेज हवा, बारिश या ऐसी परिस्थितियों में छिड़काव से बचें जिनमें दवा का घोल पौधे पर ठीक से टिक न सके।
15 मिनट बाद खेत में क्या देखना चाहिए
छिड़काव के तुरंत बाद खेत में कीटों की स्थिति देखते समय केवल उनकी मृत्यु को ही परिणाम का पैमाना नहीं बनाना चाहिए। यदि कीटों की गतिविधि कम हो गई है या वे पौधे से भोजन करना बंद कर रहे हैं, तो यह शुरुआती प्रभाव का संकेत हो सकता है।
कुछ मामलों में कीटों के शरीर में असर आने के बाद उनकी गति धीमी पड़ती है और वे सामान्य तरीके से पौधे को नुकसान नहीं पहुंचा पाते। इसके बाद मृत्यु की प्रक्रिया पूरी होने में अतिरिक्त समय लग सकता है। इसलिए उत्पाद के लेबल में बताए गए प्रभाव और नियंत्रण की अवधि को ध्यान में रखना अधिक उचित है।
यदि छिड़काव के बाद अपेक्षित नियंत्रण नहीं मिलता, तो तुरंत दोबारा उसी दवा का छिड़काव कर देना सही तरीका नहीं है। पहले यह देखना जरूरी है कि समस्या सही कीट की पहचान, छिड़काव की कवरेज, मौसम या कीट में दवा के प्रति कम संवेदनशीलता से जुड़ी तो नहीं है।
एक ही दवा का बार-बार इस्तेमाल करने से बचें
कीट नियंत्रण में एक ही प्रकार के सक्रिय तत्व या एक ही कार्यप्रणाली वाली दवा का बार-बार इस्तेमाल करने से कीटों में प्रतिरोध विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में आगे चलकर वही दवा कम प्रभावी हो सकती है।
इसलिए किसान को कीट की पहचान के आधार पर उचित कीटनाशक का चयन करना चाहिए और जरूरत पड़ने पर अलग कार्यप्रणाली वाले अनुशंसित कीटनाशकों के इस्तेमाल की रणनीति अपनानी चाहिए। दवा बदलने का निर्णय केवल बाजार में उपलब्ध किसी नए उत्पाद के नाम के आधार पर नहीं, बल्कि उसके सक्रिय तत्व और कार्यप्रणाली को समझकर किया जाना चाहिए।
निष्कर्ष
मात्र 15 मिनट में असर दिखाने वाला कीटनाशक किसानों के लिए इसलिए उपयोगी हो सकता है क्योंकि कुछ तेज असर वाले उत्पाद छिड़काव के थोड़े समय बाद ही कीटों की गतिविधि या भोजन करने की प्रक्रिया को प्रभावित करना शुरू कर देते हैं। लेकिन 15 मिनट का शुरुआती असर और कीट का पूरी तरह मर जाना एक ही बात नहीं है।
किसान को दवा चुनते समय केवल तेजी से असर करने के दावे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। सही कीट की पहचान, फसल के लिए उपयुक्त पंजीकृत कीटनाशक, निर्धारित मात्रा, अच्छी छिड़काव तकनीक और सुरक्षा सावधानियां प्रभावी कीट नियंत्रण के लिए जरूरी हैं। सही तरीके से इस्तेमाल किया गया कीटनाशक ही फसल को नुकसान से बचाने में वास्तविक मदद कर सकता है।