सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माहू की सबसे अच्छी दवा | SWAL Tolpy Insecticide | Krushimitra Vishal

फसलों में सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माहू जैसे रस चूसने वाले कीट दिखाई देने पर किसान अक्सर ऐसी दवा की तलाश करते हैं जो एक साथ कई कीटों पर असर कर सके। Tolfenpyrad 15% EC इसी तरह के व्यापक प्रभाव वाले कीटनाशी सक्रिय घटकों में शामिल है, जिसका उपयोग कुछ पंजीकृत फसलों में इन कीटों के नियंत्रण के लिए किया जाता है।

लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना भी जरूरी है। उपलब्ध उत्पाद जानकारी के अनुसार TOLPY नाम Tolfenpyrad 15% EC से जुड़ा है, जबकि इसे SWAL का उत्पाद बताने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए किसान को केवल नाम देखकर दवा खरीदने के बजाय बोतल पर लिखे ब्रांड, निर्माता, सक्रिय तत्व और फसल के लिए पंजीकृत उपयोग को जरूर देखना चाहिए।

TOLPY में कौन सा सक्रिय तत्व होता है

TOLPY नाम से उपलब्ध उत्पाद की जानकारी में इसका तकनीकी घटक Tolfenpyrad 15% EC बताया गया है। यह संपर्क कीटनाशी के रूप में काम करता है और पत्तियों पर मौजूद कीटों के नियंत्रण के लिए फोलियर स्प्रे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उपलब्ध कृषि जानकारी में इसे रस चूसने वाले तथा कुछ चबाने वाले कीटों के विरुद्ध प्रभावी बताया गया है।

Tolfenpyrad 15% EC के उपयोग के लिए भारत में उपलब्ध पंजीकृत उपयोग संबंधी जानकारी में भिंडी और कपास जैसी फसलों में माहू, जेसिड, थ्रिप्स और सफेद मक्खी का उल्लेख मिलता है। जीरे में माहू और थ्रिप्स तथा मिर्च में माहू और थ्रिप्स के लिए भी इसका उपयोग दर्ज है।

इसका मतलब यह नहीं है कि एक ही दवा हर फसल और हर कीट की स्थिति में समान तरीके से इस्तेमाल की जा सकती है। दवा का चुनाव हमेशा संबंधित फसल, कीट और उत्पाद के लेबल पर दिए गए पंजीकृत उपयोग के आधार पर होना चाहिए।

सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माहू पर इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है

सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माहू तीनों ही फसल के लिए नुकसानदायक रस चूसने वाले कीट हैं, लेकिन इनके व्यवहार और पौधे को नुकसान पहुंचाने के तरीके में अंतर होता है। सफेद मक्खी और माहू पौधे से रस चूसते हैं, जबकि थ्रिप्स नई पत्तियों, फूलों और कोमल हिस्सों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अधिक प्रकोप होने पर पौधे की बढ़वार और उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है।

Tolfenpyrad को इन कीटों के विरुद्ध उपयोग किए जाने वाले सक्रिय घटकों में शामिल किया गया है। उपलब्ध पंजीकृत उपयोग में कपास और भिंडी में aphids, jassids, thrips और whitefly का उल्लेख है। एक कृषि शोध अध्ययन में भी Tolfenpyrad 15 EC ने बैंगन में सफेद मक्खी, जेसिड, थ्रिप्स और माहू के विरुद्ध प्रभाव दिखाया था।

इसलिए इसे केवल किसी एक कीट की दवा मानना सही नहीं होगा। इसकी उपयोगिता मुख्य रूप से उन परिस्थितियों में समझी जाती है जहां लेबल के अनुसार संबंधित फसल में कई लक्षित कीटों का प्रकोप मौजूद हो।

किन फसलों में उपयोग दर्ज है

Tolfenpyrad 15% EC के लिए उपलब्ध भारतीय पंजीकृत उपयोग संबंधी जानकारी में कई फसलों और उनके लक्षित कीटों का उल्लेख मिलता है। इनमें कपास और भिंडी में सफेद मक्खी, जेसिड, थ्रिप्स और माहू प्रमुख हैं। मिर्च और जीरे में माहू तथा थ्रिप्स, प्याज में थ्रिप्स और आम में हॉपर्स तथा थ्रिप्स के लिए भी उपयोग दर्ज है।

मुख्य उपयोगों को आसान भाषा में इस तरह समझा जा सकता है:

  • कपास में माहू, जेसिड, थ्रिप्स और सफेद मक्खी
  • भिंडी में माहू, जेसिड, थ्रिप्स और सफेद मक्खी
  • मिर्च और जीरे में माहू तथा थ्रिप्स
  • प्याज में थ्रिप्स तथा आम में हॉपर्स और थ्रिप्स

यह सूची यह समझने में मदद करती है कि किसी उत्पाद को खरीदने से पहले फसल और लक्षित कीट का मिलान करना कितना जरूरी है। केवल यह देखकर कि दवा किसी कीट पर असर करती है, उसे किसी भी फसल में इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

दवा की मात्रा को लेकर सबसे जरूरी सावधानी

Tolfenpyrad 15% EC के उपलब्ध पंजीकृत उपयोग में कुछ फसलों के लिए 150 ग्राम सक्रिय तत्व प्रति हेक्टेयर, 1000 लीटर पानी और 500 ग्राम या मिलीलीटर के अनुरूप उत्पाद मात्रा का विवरण दिया गया है। अलग-अलग स्रोतों और उत्पाद लेबल में मात्रा बताने का तरीका अलग दिखाई दे सकता है, इसलिए किसान को बाजार में उपलब्ध किसी दूसरे Tolfenpyrad उत्पाद की मात्रा देखकर अपने उत्पाद में वही मात्रा नहीं अपनानी चाहिए।

सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि जिस ब्रांड की बोतल किसान के पास है, उसी के लेबल पर लिखी फसल, कीट, मात्रा और पानी की अनुशंसा को प्राथमिकता दी जाए। यदि लेबल पर किसी फसल या कीट का उल्लेख नहीं है तो केवल इंटरनेट या दूसरे उत्पाद की जानकारी के आधार पर उसका छिड़काव नहीं करना चाहिए।

छिड़काव करते समय किन बातों का ध्यान रखें

संपर्क कीटनाशी होने के कारण छिड़काव की गुणवत्ता बहुत मायने रखती है। पत्तियों पर दवा का पर्याप्त और समान कवरेज होना जरूरी है, खासकर तब जब कीट पत्तियों की निचली सतह या कोमल हिस्सों में मौजूद हों। बहुत तेज हवा, बारिश की संभावना या खराब स्प्रे कवरेज जैसी स्थितियां परिणाम को प्रभावित कर सकती हैं।

किसान को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि कीटनाशी का बार-बार और बिना जरूरत इस्तेमाल करने से कीटों में प्रतिरोध विकसित होने की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए एक ही रसायन को लगातार दोहराने के बजाय फसल की स्थिति और कीट के प्रकोप को देखकर समेकित कीट प्रबंधन अपनाना अधिक उचित रहता है।

केवल दवा नहीं, सही समय भी जरूरी

सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माहू का नियंत्रण तब ज्यादा आसान रहता है जब शुरुआती प्रकोप को समय पर पहचान लिया जाए। बहुत ज्यादा प्रकोप के बाद केवल एक छिड़काव से पूरी समस्या खत्म होने की उम्मीद करना सही नहीं है। खेत में नियमित निगरानी, प्रभावित पत्तियों और नई बढ़वार की जांच तथा कीटों की संख्या पर नजर रखना जरूरी है।

किसान को छिड़काव से पहले यह भी देखना चाहिए कि खेत में वास्तव में कौन सा कीट मौजूद है। कई बार पत्तियों का मुड़ना, चांदी जैसी धारियां या पीलापन देखकर बिना कीट की पहचान किए दवा डाल दी जाती है। ऐसी स्थिति में गलत कीटनाशी का इस्तेमाल खर्च बढ़ा सकता है और फसल की समस्या का समाधान नहीं कर पाता।

SWAL Tolpy नाम को लेकर जरूरी स्पष्टीकरण

इस नाम को लेकर विशेष सावधानी जरूरी है। उपलब्ध जानकारी में TOLPY को Tolfenpyrad 15% EC के रूप में Chalo Agro के उत्पाद पोर्टफोलियो में दिखाया गया है, जबकि उपलब्ध SWAL उत्पाद सूची में TOLPY नाम की पुष्टि नहीं मिलती। इसलिए “SWAL Tolpy” को SWAL का उत्पाद मानकर सीधे खरीदने या उसकी मात्रा तय करने से पहले पैक पर निर्माता और पंजीकरण संबंधी विवरण जांचना जरूरी है।

किसान के लिए ब्रांड नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण सक्रिय तत्व और लेबल पर दर्ज फसल तथा कीट का पंजीकृत उपयोग है। यदि पैक पर Tolfenpyrad 15% EC लिखा है, तब भी उसी पैक के लेबल की अनुशंसा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

निष्कर्ष

सफेद मक्खी, थ्रिप्स और माहू जैसे रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण में Tolfenpyrad 15% EC एक उपयोगी कीटनाशी सक्रिय तत्व है और भारत में इसके कुछ फसलों तथा लक्षित कीटों के लिए पंजीकृत उपयोग उपलब्ध हैं। खास तौर पर कपास और भिंडी में माहू, जेसिड, थ्रिप्स तथा सफेद मक्खी के लिए इसका उपयोग दर्ज है।

हालांकि किसी भी दवा को “सबसे अच्छी” बताने से पहले फसल, कीट की पहचान, प्रकोप की स्थिति और उत्पाद के वास्तविक लेबल को देखना जरूरी है। खासकर “SWAL Tolpy” नाम में उपलब्ध जानकारी और उत्पाद पहचान के बीच अंतर दिखाई देता है, इसलिए किसान को पैक की जांच किए बिना केवल नाम के आधार पर दवा नहीं खरीदनी चाहिए। सही उत्पाद, सही फसल, सही कीट और लेबल के अनुसार सही मात्रा ही सुरक्षित और प्रभावी कीट नियंत्रण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

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