धान की फसल में सिर्फ यूरिया डालने से पौधा हरा-भरा और लंबा जरूर हो जाता है, लेकिन कल्लों की संख्या उतनी नहीं बढ़ पाती जितनी होनी चाहिए। सही पोषक तत्वों का संतुलन बनाकर एक पौधे से भरपूर कल्ले निकालना संभव है।
यूरिया अकेले क्यों पर्याप्त नहीं है
यूरिया नाइट्रोजन का अच्छा स्रोत है। यह पत्तियों को हरा रखता है और शुरुआती बढ़वार तेज करता है। लेकिन कल्ले फूटने के लिए सिर्फ नाइट्रोजन काफी नहीं। जिंक, सल्फर और पोटाश जैसे तत्व भी जरूरी होते हैं। जिंक की कमी होने पर पौधे में कल्ले कम निकलते हैं और खैरा रोग का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए यूरिया के साथ सही खाद मिलाकर डालना जरूरी है।
कल्ले बढ़ाने का सही समय
रोपाई के 15 से 25 दिन बाद कल्ले फूटने की सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इस समय पौधों को पर्याप्त पोषण मिले तो एक पौधे से कई मजबूत कल्ले निकल सकते हैं। पानी का स्तर सही रखें और खेत में हल्की नमी बनी रहे तो खाद का असर और अच्छा होता है।
यूरिया के साथ कौन सी खाद मिलाएं
रोपाई के 15-25 दिन बाद पहली टॉप ड्रेसिंग में यूरिया के साथ जिंक सल्फेट मिलाकर डालना सबसे प्रभावी तरीका माना जाता है। जिंक कल्ले बनाने वाले हार्मोन को सक्रिय करता है। सल्फर भी साथ में देने से पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।
एक एकड़ के लिए आम तौर पर यह मिश्रण काम आता है:
- यूरिया 30 से 40 किलोग्राम
- जिंक सल्फेट 21 प्रतिशत वाला 8 से 10 किलोग्राम या 33 प्रतिशत वाला 5 से 7 किलोग्राम
- सल्फर 3 से 5 किलोग्राम
इनको अच्छी तरह मिलाकर तुरंत खेत में समान रूप से छिड़क दें। मिलाकर ज्यादा देर न रखें।
पोटाश और अन्य तत्वों का ध्यान
पोटाश कल्लों को मोटा और तना मजबूत बनाता है। इससे फसल गिरने का खतरा कम होता है। पोटाश की आधी मात्रा अक्सर रोपाई के समय बेसल डोज में दी जाती है और बाकी गोभ अवस्था के आसपास। मैग्नीशियम सल्फेट भी कभी-कभी मिलाया जाता है ताकि पत्तियां हरी रहें और प्रकाश संश्लेषण बेहतर हो।
ध्यान रखें कि डीएपी और जिंक सल्फेट को कभी एक साथ न मिलाएं। दोनों का असर कम हो जाता है। अगर बेसल डोज में डीएपी दिया है तो जिंक को यूरिया वाली टॉप ड्रेसिंग के साथ ही दें।
सही तरीके से खाद डालने के फायदे
संतुलित खाद से पौधे की जड़ें मजबूत होती हैं। कल्ले ज्यादा और स्वस्थ निकलते हैं। बाद में बालियां भी अच्छी भरती हैं। ज्यादा यूरिया डालने से पौधा सिर्फ लंबा और कोमल हो जाता है। ऐसे में कीट-रोग आसानी से लगते हैं और हवा चलने पर फसल गिर सकती है। इसलिए मात्रा का ध्यान रखना जरूरी है।
कुछ सावधानियां जरूर बरतें
खाद डालते समय खेत में 2-3 सेंटीमीटर पानी होना चाहिए। सूखे खेत में यूरिया डालने से नुकसान ज्यादा होता है। मिट्टी की जांच करवा लें तो जिंक और पोटाश की सही जरूरत पता चल जाती है। हर बार एक जैसी मात्रा न डालें। फसल की हालत और किस्म के अनुसार थोड़ा समायोजन करें।
धान में यूरिया के साथ जिंक और जरूरत के अनुसार सल्फर-पोटाश का सही मिश्रण डालकर एक पौधे से भरपूर कल्ले निकालना आसान हो जाता है। समय पर और सही मात्रा में पोषण देने से पैदावार बेहतर होती है और फसल स्वस्थ रहती है।