बरसात ओर उमस गन्ने में आने वाला है भयंकर रोग। Ganne me milibug ki davai। Milibug ki dvai

बरसात का मौसम शुरू होते ही खेतों में नमी और उमस बढ़ जाती है। इसी दौरान गन्ने की फसल पर एक खतरनाक कीट तेजी से हमला कर सकता है। मिलीबग या गुलाबी चिकटा नाम का यह कीट पौधों का रस चूसकर फसल को कमजोर कर देता है।

मिलीबग क्या है और यह कैसे नुकसान पहुंचाता है

मिलीबग एक नरम शरीर वाला कीट है जो गन्ने के तने पर, खासकर पत्तियों की म्यान के अंदर छिपकर रहता है। यह सफेद रुई जैसे पदार्थ से ढका होता है। कीट पौधों का रस चूसता है जिससे पत्तियां पीली पड़ने लगती हैं, पौधे की बढ़वार रुक जाती है और गन्ने में चीनी की मात्रा कम हो जाती है। ज्यादा प्रकोप होने पर पत्तियों पर काला फफूंद भी लग जाता है क्योंकि कीट चिपचिपा पदार्थ छोड़ता है।

बरसात और उमस में क्यों बढ़ता है खतरा

मानसून के दिनों में खेत में नमी ज्यादा रहती है। साथ ही तापमान और उमस का मिश्रण कीट के लिए अनुकूल हो जाता है। सूखी पत्तियां खेत में पड़ी रहें या नाइट्रोजन खाद ज्यादा डाली जाए तो प्रकोप और तेजी से फैलता है। पानी का जमाव भी इस कीट को बढ़ावा देता है। समय पर ध्यान न दिया जाए तो पूरा खेत प्रभावित हो सकता है।

शुरुआती पहचान कैसे करें

खेत में घूमते समय गन्ने के निचले हिस्से और पत्तियों की म्यान खोलकर देखें। सफेद या गुलाबी रंग के छोटे-छोटे कीड़े दिखें तो समझ लें कि मिलीबग आ चुका है। पत्तियों का पीला पड़ना, तने पर कालापन और पौधों का कमजोर दिखना भी संकेत है। शुरुआत में ही पकड़ लिया जाए तो नियंत्रण आसान रहता है।

खेत में अपनाएं ये सावधानियां

खेत की साफ-सफाई सबसे जरूरी है। सूखी पत्तियों को समय-समय पर हटा दें। बुवाई के करीब पांच और सात महीने बाद निचली सूखी पत्तियां काट दें। खेत में पानी न जमा होने दें। नाइट्रोजन वाली खाद संतुलित मात्रा में ही डालें। स्वस्थ बीज का इस्तेमाल करें और प्रभावित पौधों को अलग कर नष्ट कर दें।

मिलीबग की प्रभावी दवा और छिड़काव का तरीका

कीट का प्रकोप दिखते ही दवा का छिड़काव करना चाहिए। छिड़काव से पहले सूखी पत्तियां हटा लें ताकि दवा तने तक पहुंच सके।

  • इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल का 0.3 से 0.5 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें
  • क्लोरोपायरीफॉस 20 ईसी का दो मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से इस्तेमाल करें
  • प्रोफेनोफॉस और साइपरमेथ्रिन वाली मिश्रित दवा का भी छिड़काव फायदेमंद रहता है
  • जरूरत पड़ने पर मोनोक्रोटोफॉस या डाइमेथोएट का भी प्रयोग किया जा सकता है

दवा के साथ स्टीकर जरूर मिलाएं ताकि घोल कीट के शरीर पर अच्छी तरह चिपक जाए। छिड़काव सुबह या शाम को करें और तने व पत्तियों की म्यान पर खास ध्यान दें।

जैविक तरीके भी अपना सकते हैं

रासायनिक दवा के अलावा नीम तेल का छिड़काव भी मददगार साबित होता है। आधा से एक प्रतिशत नीम तेल का घोल बनाकर इस्तेमाल करें। खेत में लेडीबर्ड बीटल जैसे प्राकृतिक दुश्मनों को बढ़ावा दें। वर्टिसिलियम जैसे जैविक फफूंद आधारित घोल का भी छिड़काव किया जा सकता है। ये तरीके पर्यावरण के अनुकूल होते हैं और लंबे समय तक फायदा देते हैं।

बरसात के मौसम में नियमित निगरानी रखना बहुत जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही से फसल को भारी नुकसान हो सकता है। सही समय पर पहचान और उचित दवा का इस्तेमाल करके किसान अपनी गन्ने की फसल को सुरक्षित रख सकते हैं। खेत की देखभाल और संतुलित प्रबंधन से पैदावार भी अच्छी मिलती है।

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