खेती में हर सीजन किसान के सामने खाद और उर्वरक के कई विकल्प रखे जाते हैं। कोई उत्पाद फसल की तेज बढ़वार का दावा करता है तो कोई जड़ों की मजबूती, फूल-फल बढ़ाने या मिट्टी की ताकत वापस लाने की बात करता है। ऐसे में सवाल यह है कि किसान कैसे समझे कि कौन-सा प्रोडक्ट वास्तव में उसकी फसल के लिए जरूरी है और किस पर पैसा खर्च करने से पहले रुककर सोचना चाहिए?
“80% प्रोडक्ट किसी काम के नहीं” जैसी बात को बिना जांच के सच मानना भी सही नहीं है। असली समस्या अक्सर उत्पाद के बेकार होने से ज्यादा गलत जरूरत, गलत मात्रा, गलत समय और बिना मिट्टी की स्थिति जाने इस्तेमाल करने की होती है।
हर खाद या उर्वरक फसल के लिए जरूरी नहीं होता
बाजार में मिलने वाला हर कृषि उत्पाद एक ही काम के लिए नहीं बना होता। कुछ उत्पाद विशेष पोषक तत्वों की कमी पूरी करने के लिए होते हैं, कुछ जैविक या जैव उर्वरक श्रेणी में आते हैं और कुछ फसल की विशेष परिस्थितियों में उपयोग किए जाते हैं। इसलिए किसी दूसरे किसान के खेत में फायदा देने वाला उत्पाद आपके खेत में भी उतना ही फायदा देगा, यह जरूरी नहीं है।
मिट्टी में पहले से किसी पोषक तत्व की पर्याप्त मात्रा मौजूद है तो उसी पोषक तत्व को बार-बार डालने से जरूरी नहीं कि फसल का उत्पादन उसी अनुपात में बढ़े। दूसरी तरफ, जिस पोषक तत्व की वास्तविक कमी है, उसकी सही मात्रा और सही समय पर पूर्ति ज्यादा उपयोगी हो सकती है।
यही वजह है कि उर्वरक खरीदने से पहले सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह होना चाहिए कि आपकी फसल और आपकी मिट्टी को वास्तव में किस पोषक तत्व की जरूरत है।
80 प्रतिशत वाला दावा क्यों सावधानी से समझना चाहिए
किसानों के बीच यह बात तेजी से कही जाती है कि बाजार के 80 प्रतिशत प्रोडक्ट काम के नहीं होते। लेकिन किसी भी सामान्य श्रेणी के सभी कृषि उत्पादों के बारे में ऐसा निश्चित प्रतिशत बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं माना जा सकता, जब तक उसके पीछे किसी विश्वसनीय परीक्षण या अध्ययन का स्पष्ट आधार न हो।
इसका मतलब यह भी नहीं है कि बाजार में मौजूद हर प्रोडक्ट आंख बंद करके खरीद लेना चाहिए। खाद और कृषि इनपुट के मामले में किसान को दावे के बजाय उत्पाद की वास्तविक संरचना, उपयोगिता और अपनी फसल की जरूरत पर ध्यान देना चाहिए।
भारत में उर्वरकों की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों से संबंधित व्यवस्था Fertiliser Control Order के तहत नियंत्रित होती है। इसलिए किसान के लिए केवल आकर्षक नाम या बड़े दावे देखने के बजाय यह देखना महत्वपूर्ण है कि उत्पाद किस श्रेणी में आता है, उसमें कौन-से पोषक तत्व हैं और उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए बताया गया है।
मिट्टी की जांच से शुरू करें खाद की खरीद
उर्वरक पर पैसा बचाने का सबसे मजबूत तरीका केवल सस्ता उत्पाद खरीदना नहीं, बल्कि जरूरत के अनुसार खाद खरीदना है। मिट्टी की जांच से यह समझने में मदद मिलती है कि खेत में प्रमुख पोषक तत्वों की स्थिति कैसी है और किन पोषक तत्वों पर ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है।
वैज्ञानिक सलाह में भी मिट्टी जांच आधारित पोषक तत्व प्रबंधन पर लगातार जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य यही है कि किसान अनुमान के आधार पर खाद डालने के बजाय मिट्टी की वास्तविक स्थिति और फसल की जरूरत के हिसाब से पोषण प्रबंधन करे।
मिट्टी की जांच के बाद भी केवल एक ही खाद पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। फसल, मिट्टी और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार रासायनिक उर्वरकों के साथ जैविक खाद, हरी खाद, कंपोस्ट और उपयुक्त जैव उर्वरकों को समन्वित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
किसान इन बातों को देखकर ही कोई प्रोडक्ट खरीदें
किसी भी नए उर्वरक या पोषक तत्व वाले उत्पाद को खरीदने से पहले उसका लेबल ध्यान से पढ़ना चाहिए। केवल यह सुनकर खरीदारी करना कि किसी उत्पाद से फसल बहुत तेजी से बढ़ती है या उत्पादन अचानक बढ़ जाएगा, जोखिम भरा हो सकता है।
खरीदारी के समय किसान इन बातों पर विशेष ध्यान दे सकते हैं:
- उत्पाद में कौन-से पोषक तत्व मौजूद हैं और उनकी मात्रा क्या है।
- उत्पाद किस फसल और किस समस्या के लिए उपयोगी बताया गया है।
- पैकेट पर निर्धारित उपयोग विधि, मात्रा और सावधानियां स्पष्ट रूप से दी गई हैं या नहीं।
- उत्पाद की गुणवत्ता, पैकिंग, बैच संबंधी जानकारी और वैधता जैसी जरूरी जानकारियां ठीक से दर्ज हैं या नहीं।
किसी भी उत्पाद को केवल दुकानदार के मौखिक दावे के आधार पर बड़ी मात्रा में खरीदने के बजाय पहले यह समझना बेहतर है कि उसकी जरूरत आपके खेत में वास्तव में है या नहीं।
ज्यादा खाद डालना भी नुकसान का कारण बन सकता है
कई किसान यह मान लेते हैं कि खाद की मात्रा बढ़ाने से फसल की बढ़वार भी बढ़ जाएगी। लेकिन पोषक तत्वों की जरूरत से ज्यादा या असंतुलित मात्रा खेत के लिए लाभदायक नहीं होती। लगातार असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की पोषक स्थिति बिगड़ सकती है और खेती की लागत भी बढ़ सकती है।
खास तौर पर नाइट्रोजन वाली खाद का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल केवल इसलिए नहीं किया जाना चाहिए कि फसल कुछ समय के लिए ज्यादा हरी दिखाई दे। फसल की वास्तविक जरूरत, विकास अवस्था और मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।
इसी तरह डीएपी, पोटाश, जिंक, सल्फर या किसी अन्य पोषक तत्व को भी केवल चलन या दूसरे किसान की सलाह के आधार पर नहीं डालना चाहिए। एक खेत में मौजूद कमी दूसरे खेत में मौजूद हो, यह जरूरी नहीं है।
सही उर्वरक की पहचान में चार बातों का रखें ध्यान
उर्वरक का अच्छा इस्तेमाल केवल सही उत्पाद चुनने तक सीमित नहीं है। सही स्रोत, सही मात्रा, सही समय और सही जगह पर पोषक तत्व देना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसे पोषक तत्व प्रबंधन के चार मूल सिद्धांतों के रूप में समझा जा सकता है।
किसान के लिए इसका सीधा मतलब है:
- जरूरत के अनुसार सही पोषक तत्व का स्रोत चुनें।
- मिट्टी और फसल की जरूरत के अनुसार मात्रा तय करें।
- फसल की अवस्था के अनुसार खाद डालने का समय रखें।
- जहां और जिस तरीके से पोषक तत्व का उपयोग अधिक प्रभावी हो, उसी विधि को अपनाएं।
इससे बिना जरूरत की खाद खरीदने और एक ही पोषक तत्व को बार-बार खेत में डालने की संभावना कम हो सकती है।
सस्ता या महंगा नहीं, जरूरत के हिसाब से सही है असली खाद
उर्वरक खरीदते समय केवल कीमत को आधार बनाना भी सही तरीका नहीं है। कोई उत्पाद सस्ता है तो जरूरी नहीं कि वह आपके खेत के लिए उपयोगी हो, और महंगा उत्पाद भी जरूरी नहीं कि हर फसल में अतिरिक्त फायदा दे।
किसान को उत्पाद की कीमत के साथ उसकी वास्तविक आवश्यकता और उपयोगिता को देखना चाहिए। यदि मिट्टी में किसी पोषक तत्व की कमी ही नहीं है, तो उस पोषक तत्व पर खर्च किया गया पैसा अतिरिक्त लागत बन सकता है। वहीं वास्तविक कमी होने पर सही पोषक तत्व का उचित उपयोग फसल प्रबंधन में अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसलिए “एक प्रोडक्ट सबके लिए” वाली सोच से बचना जरूरी है। खेती में खेत की मिट्टी, फसल की किस्म, फसल की अवस्था, सिंचाई और पहले से डाले गए पोषक तत्व सभी निर्णय को प्रभावित करते हैं।
किसानों का पैसा बचाने का सबसे आसान तरीका
उर्वरक पर अनावश्यक खर्च रोकने के लिए किसान को हर सीजन एक ही तरह की खाद खरीदने की आदत से बाहर निकलना होगा। पहले खेत की जरूरत समझना, फिर सही उत्पाद चुनना और उसके बाद अनुशंसित मात्रा में इस्तेमाल करना ज्यादा समझदारी वाला तरीका है।
किसी नए प्रोडक्ट के बारे में केवल विज्ञापन, सोशल मीडिया वीडियो या दूसरे किसान के अनुभव को अंतिम प्रमाण नहीं मानना चाहिए। यदि उत्पाद से जुड़ा दावा आपकी फसल की वास्तविक समस्या से मेल नहीं खाता, तो खरीदने से पहले कृषि विशेषज्ञ या कृषि विभाग से सलाह लेना बेहतर है।
निष्कर्ष
“80% प्रोडक्ट किसी काम के नहीं” इस दावे को एक निश्चित वैज्ञानिक तथ्य की तरह नहीं देखा जाना चाहिए। असली Fertilizer Reality यह है कि कोई भी उर्वरक तभी उपयोगी है जब वह फसल और मिट्टी की वास्तविक जरूरत के अनुरूप हो और उसे सही मात्रा, सही समय तथा सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए।
किसान अगर बिना जरूरत के उत्पाद खरीदने के बजाय मिट्टी की जांच, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और विश्वसनीय जानकारी को आधार बनाए, तो अनावश्यक खर्च काफी हद तक कम किया जा सकता है। खेती में बचत का मतलब केवल सस्ती खाद खरीदना नहीं है, बल्कि हर रुपये को वहीं लगाना है जहां खेत को उसकी वास्तविक जरूरत हो।