सोयाबीन की फसल में पत्ती खाने वाली इल्लियों का प्रकोप बढ़ने पर पौधों की हरी पत्तियां तेजी से कम होने लगती हैं और फसल की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। खास बात यह है कि हर इल्ली पर एक ही कीटनाशक समान असर नहीं करता और इल्ली की उम्र तथा कीट की पहचान के अनुसार नियंत्रण रणनीति बदलती है।
किसान अक्सर छोटी और बड़ी इल्ली के लिए एक ही दवा का इस्तेमाल करते हैं, जिससे खर्च बढ़ने के साथ नियंत्रण भी कमजोर हो सकता है। इसलिए पहले यह समझना जरूरी है कि खेत में कौन-सी इल्ली है, उसका आकार क्या है और प्रकोप आर्थिक नुकसान की सीमा तक पहुंचा है या नहीं।
सोयाबीन में कौन-कौन सी इल्लियां नुकसान करती हैं
सोयाबीन में अलग-अलग समय पर कई प्रकार की पत्ती खाने वाली इल्लियां दिखाई दे सकती हैं। इनमें सेमीलूपर, तंबाकू की इल्ली और चने की इल्ली प्रमुख हैं। इनकी पहचान केवल आकार देखकर नहीं, बल्कि उनके खाने के तरीके, शरीर की बनावट और पौधे पर दिखाई देने वाले नुकसान के आधार पर करना ज्यादा सही रहता है।
सेमीलूपर मुख्य रूप से पत्तियों को खाती है और ज्यादा प्रकोप में पत्तियों का बड़ा हिस्सा नष्ट कर सकती है। तंबाकू की इल्ली भी पत्तियों को नुकसान पहुंचाती है, जबकि चने की इल्ली पत्तियों के साथ फलियों के विकास की अवस्था में फलियों को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
इसलिए खेत में इल्ली दिखाई देते ही केवल दवा का नाम तय करने के बजाय कीट की पहचान और उसकी संख्या का निरीक्षण करना जरूरी है। वैज्ञानिक सलाह के अनुसार रासायनिक नियंत्रण का इस्तेमाल तब करना बेहतर माना जाता है, जब कीट की संख्या आर्थिक हानि स्तर के आसपास या उससे ऊपर पहुंच रही हो।
छोटी इल्ली दिखाई दे तो नियंत्रण जल्दी करना क्यों जरूरी है
छोटी अवस्था की इल्ली सामान्यतः कम मात्रा में पौधे को नुकसान पहुंचाती है, लेकिन यही अवस्था नियंत्रण के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। शुरुआती अवस्था में इल्ली को नियंत्रित करने से उसके बड़ी होकर अधिक पत्तियां खाने और प्रकोप बढ़ाने की संभावना कम की जा सकती है।
छोटी इल्लियों की स्थिति में जैविक और सूक्ष्मजीव आधारित विकल्प भी उपयोगी हो सकते हैं। सोयाबीन में पत्ती खाने वाली इल्लियों के प्रबंधन के लिए बैसिलस थुरिन्जिएन्सिस, ब्यूवेरिया बेसियाना और नोमूरिया राइली जैसे जैव-आधारित विकल्पों का उल्लेख किया गया है। इनका इस्तेमाल उत्पाद के लेबल और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार किया जाना चाहिए।
रासायनिक विकल्प की जरूरत होने पर छोटी इल्ली के समय सही सक्रिय तत्व का चुनाव महत्वपूर्ण है। तंबाकू की इल्ली और चने की इल्ली के नियंत्रण के लिए एमामेक्टिन बेंजोएट को प्रभावी विकल्पों में बताया गया है। हालांकि दवा का चयन कीट की सही पहचान और उस फसल के लिए स्वीकृत लेबल उपयोग के आधार पर ही होना चाहिए।
मध्यम आकार की इल्ली में कौन सा कीटनाशक बेहतर रहता है
जब इल्ली मध्यम आकार की हो चुकी हो और पत्तियों पर लगातार नुकसान दिखाई दे रहा हो, तब केवल शुरुआती नियंत्रण पर निर्भर रहना उचित नहीं है। इस अवस्था में कीट की प्रजाति के अनुसार प्रभावी कीटनाशक का चुनाव करना पड़ता है।
चने की इल्ली जैसे कीटों के लिए अलग-अलग सक्रिय तत्वों वाले कीटनाशकों की सिफारिशें उपलब्ध हैं। इनमें इंडोक्साकार्ब, फ्लूबेंडियामाइड, स्पिनेटोराम और क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल जैसे सक्रिय तत्व शामिल हैं। इनका उपयोग केवल उसी स्थिति में किया जाना चाहिए, जब संबंधित कीट और सोयाबीन के लिए उत्पाद का उपयोग स्वीकृत हो तथा लेबल पर दी गई मात्रा और सावधानियों का पालन किया जाए।
किसान को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बाजार में अलग-अलग ब्रांड नामों के तहत एक ही सक्रिय तत्व या अलग-अलग मिश्रण मिल सकते हैं। इसलिए केवल ब्रांड नाम देखकर दवा खरीदने के बजाय पैक पर लिखे सक्रिय तत्व, सांद्रता, फसल और लक्षित कीट की जानकारी देखना ज्यादा जरूरी है।
बड़ी इल्ली पर दवा का चुनाव कैसे करें
बड़ी इल्ली को खेत में लंबे समय तक छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है, क्योंकि वह कम समय में काफी पत्तियां खा सकती है। खासकर फलियों के विकास की अवस्था में चने की इल्ली जैसे कीटों का प्रकोप फसल के लिए अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
ऐसी स्थिति में कीट की पहचान के आधार पर लेबल-अनुमोदित प्रभावी कीटनाशक का चयन किया जाता है। चने की इल्ली के लिए इंडोक्साकार्ब, फ्लूबेंडियामाइड, स्पिनेटोराम और क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल जैसे सक्रिय तत्वों की सिफारिशें उपलब्ध रही हैं, लेकिन इनमें से किसी एक को हर प्रकार की इल्ली के लिए सार्वभौमिक रूप से सबसे असरदार बताना सही नहीं होगा।
तंबाकू की इल्ली और चने की इल्ली के मामले में फेरोमोन ट्रैप तथा एनपीवी जैसे उपाय भी एकीकृत प्रबंधन का हिस्सा हो सकते हैं। इससे केवल रासायनिक कीटनाशक पर निर्भरता कम करने में मदद मिलती है।
किस साइज की इल्ली में क्या रणनीति रखें
इल्ली के आकार के साथ-साथ उसकी प्रजाति, संख्या और फसल की अवस्था को ध्यान में रखना जरूरी है। केवल छोटी, मध्यम या बड़ी इल्ली देखकर दवा तय करना वैज्ञानिक तरीका नहीं है।
- छोटी इल्ली में शुरुआती नियंत्रण और जैविक विकल्पों पर ध्यान देना उपयोगी हो सकता है।
- तंबाकू की इल्ली या चने की इल्ली की पुष्टि होने पर एमामेक्टिन बेंजोएट जैसे स्वीकृत विकल्पों पर विचार किया जा सकता है।
- चने की इल्ली के बढ़े हुए प्रकोप में इंडोक्साकार्ब, फ्लूबेंडियामाइड, स्पिनेटोराम या क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल जैसे स्वीकृत सक्रिय तत्व विकल्प हो सकते हैं।
- बड़ी इल्ली के साथ बार-बार एक ही सक्रिय तत्व का इस्तेमाल करने के बजाय कीट की पहचान और उपलब्ध लेबल सिफारिश के अनुसार नियंत्रण रणनीति बदलना बेहतर है।
100 प्रतिशत खात्मे के दावे से किसानों को क्यों सावधान रहना चाहिए
किसी भी एक कीटनाशक को सोयाबीन की सभी इल्लियों को हर परिस्थिति में 100 प्रतिशत खत्म करने वाली दवा बताना सही नहीं है। कीट की प्रजाति, इल्ली की अवस्था, प्रकोप की तीव्रता, छिड़काव की गुणवत्ता और कीटनाशक के प्रति कीट की संवेदनशीलता जैसे कई कारक परिणाम को प्रभावित करते हैं।
इसके अलावा, खेत में मौजूद हर इल्ली एक ही प्रजाति की हो यह भी जरूरी नहीं है। एक ही खेत में अलग-अलग पत्ती खाने वाली इल्लियां मिल सकती हैं। इसलिए पहले सही पहचान करना और फिर लक्षित नियंत्रण अपनाना ज्यादा प्रभावी तरीका है।
सोयाबीन में रासायनिक कीटनाशक का इस्तेमाल भी तभी करना चाहिए जब कीट आर्थिक हानि स्तर तक पहुंच रहा हो। उपलब्ध कृषि सलाह में तंबाकू की इल्ली, चने की इल्ली और सेमीलूपर के लिए अलग-अलग आर्थिक हानि स्तर बताए गए हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि केवल एक-दो इल्लियां दिखाई देने पर तुरंत भारी मात्रा में दवा डालना उचित नहीं है।
छिड़काव करते समय इन बातों का रखें ध्यान
कीटनाशक का सही सक्रिय तत्व चुनने के बाद भी छिड़काव की तकनीक खराब होने पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल सकता। पत्तियों के जिस हिस्से पर इल्ली सक्रिय है, वहां पर्याप्त स्प्रे पहुंचना जरूरी है। साथ ही उत्पाद के लेबल पर दी गई फसल, लक्षित कीट, मात्रा, पानी की मात्रा और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करना चाहिए।
एक ही सक्रिय तत्व का बार-बार इस्तेमाल करने से कीट में प्रतिरोध विकसित होने का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए आवश्यकता पड़ने पर अलग क्रियाविधि वाले स्वीकृत कीटनाशकों का उपयोग करने की रणनीति अपनाई जाती है। अनावश्यक मात्रा बढ़ाना या दो-तीन कीटनाशकों को अपनी तरफ से मिलाकर छिड़कना उचित नहीं है।
सोयाबीन में इल्लियों की निगरानी केवल दवा छिड़कने के समय नहीं, बल्कि पूरे फसल मौसम में करनी चाहिए। खेत में फेरोमोन ट्रैप, प्रकाश जाल और पक्षियों के बैठने के लिए खपच्चियां जैसे उपाय भी एकीकृत कीट प्रबंधन में मदद कर सकते हैं।
निष्कर्ष
सोयाबीन में इल्लियों के नियंत्रण के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि हर इल्ली को एक जैसा न समझें। छोटी इल्ली मिलने पर जल्दी पहचान और शुरुआती नियंत्रण, जबकि मध्यम या बड़ी इल्ली में कीट की प्रजाति के अनुसार स्वीकृत प्रभावी सक्रिय तत्व का चुनाव ज्यादा महत्वपूर्ण है।
एमामेक्टिन बेंजोएट, इंडोक्साकार्ब, फ्लूबेंडियामाइड, स्पिनेटोराम और क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल जैसे सक्रिय तत्व कुछ प्रमुख इल्लियों के नियंत्रण में उपयोग किए जाते हैं, लेकिन इनमें से किसी एक को सभी प्रकार की इल्लियों के लिए 100 प्रतिशत असरदार बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। सही पहचान, आर्थिक हानि स्तर पर निर्णय, उचित सक्रिय तत्व और सही छिड़काव तकनीक को साथ लेकर चलने पर सोयाबीन में इल्ली प्रबंधन अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
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