सोयाबीन की फसल में फूल और फलियां बनने के बाद दाना भरने का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस चरण में पौधे को पर्याप्त पोषण और रोग-कीट से सुरक्षा मिलना जरूरी है, क्योंकि इसी समय बनने वाले दानों का आकार और गुणवत्ता प्रभावित होती है।
लेकिन आखिरी स्प्रे को लेकर यह समझना भी जरूरी है कि कोई एक घोल हर खेत में दाने मोटे करने या उपज बढ़ाने की गारंटी नहीं देता। फसल की अवस्था, मिट्टी की स्थिति, नमी और रोग-कीट की मौजूदगी देखकर ही स्प्रे का चुनाव करना चाहिए।
दाना भरने के समय फसल को किस चीज की जरूरत होती है
सोयाबीन में फली बनने और दाना भरने की अवस्था को उपज के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। इस समय पानी की कमी होने पर दाना भरने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसलिए केवल पत्तियों पर स्प्रे करने के बजाय खेत में नमी की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कृषि सलाह में सोयाबीन के लिए पानी में घुलनशील एनपीके उर्वरकों के पत्तियों पर छिड़काव की सिफारिश की गई है। ICAR की खरीफ कृषि सलाह में 19:19:19 या 17:44:00 जैसे पानी में घुलनशील एनपीके को 0.5 प्रतिशत की सांद्रता पर 45 और 60 दिन बाद छिड़काव करने की सलाह दी गई है। हालांकि फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि सलाह के अनुसार ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए।
इसका मतलब यह नहीं है कि देर से किया गया कोई भी स्प्रे अपने आप दानों का आकार बढ़ा देगा। सही समय पर संतुलित पोषण मिलने से पौधे की पोषण स्थिति बेहतर रखने में मदद मिल सकती है।
आखिरी स्प्रे में पोषण का विकल्प कब उपयोगी हो सकता है
यदि फसल दाना भरने की अवस्था में है और पौधों में पोषण की कमी दिखाई दे रही है, तो पत्तियों के माध्यम से पोषक तत्व देने का विकल्प उपयोगी हो सकता है। पानी में घुलनशील एनपीके का प्रयोग इसी उद्देश्य से किया जाता है।
स्प्रे करते समय मात्रा बढ़ा देना फायदे के बजाय नुकसान कर सकता है। अधिक सांद्रता से पत्तियों पर झुलसा या अन्य नुकसान हो सकता है, इसलिए लेबल पर दी गई मात्रा और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सोयाबीन में किसी खास सूक्ष्म पोषक तत्व की कमी हो तो उसका सुधार अलग तरीके से करना पड़ सकता है। इसलिए केवल इस उम्मीद में कई पोषक तत्वों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करना उचित नहीं है कि इससे दाने निश्चित रूप से मोटे हो जाएंगे।
रोग और कीट दिख रहे हों तो सिर्फ पोषण वाला स्प्रे पर्याप्त नहीं
दाना भरने के समय खेत में रोग या कीट का प्रकोप हो तो प्राथमिकता उसके नियंत्रण की होनी चाहिए। ICAR की सोयाबीन सलाह में फली और दाना भरने की अवस्था के दौरान कुछ क्षेत्रों में फली छेदक जैसे कीटों की निगरानी और आवश्यकता के अनुसार अनुशंसित कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी गई है।
इसी तरह फली भरने की अवस्था में कुछ रोगों की स्थिति में फफूंदनाशी का उपयोग भी फसल सुरक्षा में मदद कर सकता है। ICAR की सलाह में फली भरने के दौरान फफूंदनाशी के छिड़काव को बीज की गुणवत्ता में सुधार से भी जोड़ा गया है। लेकिन कौन-सा उत्पाद और कितनी मात्रा में इस्तेमाल करनी है, यह रोग की पहचान और संबंधित उत्पाद के अनुमोदित उपयोग पर निर्भर करता है।
इसलिए खेत में समस्या नहीं है तो केवल “आखिरी स्प्रे” के नाम पर कीटनाशक या फफूंदनाशी डालना जरूरी नहीं है।
आखिरी स्प्रे करते समय इन बातों का रखें ध्यान
अच्छा परिणाम केवल दवा या खाद के नाम से तय नहीं होता। छिड़काव का समय, मौसम, पानी की मात्रा और फसल की वास्तविक अवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
- फसल की अवस्था देखकर ही पोषक तत्व या पौध संरक्षण उत्पाद का चुनाव करें।
- अलग-अलग दवाओं और उर्वरकों को बिना उनकी संगतता जाने टैंक में न मिलाएं।
- तेज धूप, तेज हवा या बारिश की संभावना के समय छिड़काव करने से बचें।
- उत्पाद के लेबल पर दी गई मात्रा, फसल और प्रतीक्षा अवधि से संबंधित निर्देशों का पालन करें।
विशेष रूप से बारिश वाले मौसम में स्प्रे का समय बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। छिड़काव के तुरंत बाद बारिश होने पर उत्पाद का प्रभाव कम हो सकता है। इसी तरह बहुत गर्म परिस्थितियों में पत्तियों पर पोषक घोल का छिड़काव नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या आखिरी स्प्रे से दाने चमकदार और उपज पक्की बढ़ेगी
दाने मोटे, भरे हुए और अच्छी गुणवत्ता वाले बनने में कई कारकों की भूमिका होती है। पौधे की किस्म, पौधों की संख्या, मिट्टी में उपलब्ध पोषक तत्व, पर्याप्त नमी, रोग-कीट की स्थिति और मौसम सभी उपज को प्रभावित करते हैं।
इसलिए किसी एक स्प्रे को “पक्का उपज बढ़ाने वाला” बताना वैज्ञानिक रूप से सही नहीं होगा। पोषक तत्वों का सही उपयोग फसल की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकता है, जबकि रोग और कीट का समय पर नियंत्रण नुकसान को कम कर सकता है।
अगर खेत में फसल स्वस्थ है और दाना भर रहा है, तो अनावश्यक रूप से कई तरह के उत्पादों का छिड़काव करने के बजाय फसल की निगरानी करना ज्यादा समझदारी है।
किसानों के लिए सबसे जरूरी बात
सोयाबीन में आखिरी स्प्रे का फैसला केवल सोशल मीडिया पर बताए गए किसी एक फार्मूले के आधार पर नहीं करना चाहिए। दाना भरने की अवस्था में खेत का निरीक्षण करें और देखें कि समस्या पोषण की है, नमी की है, रोग की है या कीट की।
जहां पोषण की जरूरत हो वहां अनुशंसित पानी में घुलनशील पोषक तत्वों का उपयोग किया जा सकता है और जहां रोग या कीट का प्रकोप हो वहां पहचान के आधार पर अनुमोदित पौध संरक्षण उपाय अपनाना बेहतर रहता है। ICAR की सलाह भी सोयाबीन में पोषण, नमी और पौध संरक्षण को फसल की अवस्था के अनुसार प्रबंधित करने पर जोर देती है।
अंत में यही बात सबसे महत्वपूर्ण है कि सस्ता स्प्रे तभी दमदार साबित होता है जब वह फसल की वास्तविक जरूरत के हिसाब से सही समय और सही मात्रा में किया जाए। केवल ज्यादा दवा डालने से दाने मोटे नहीं होते। संतुलित पोषण, पर्याप्त नमी और समय पर रोग-कीट नियंत्रण ही अच्छी और गुणवत्तापूर्ण सोयाबीन उपज की मजबूत आधारशिला है।