धान की खेती में रोपाई के दौरान लगने वाली मेहनत और मजदूरी से बचने के लिए किसान अब सीधी बिजाई यानी Direct Seeded Rice (DSR) की ओर बढ़ रहे हैं। हालांकि DSR में खरपतवार सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है, इसलिए शुरुआत से ही सही खरपतवार प्रबंधन जरूरी माना जाता है।
ऐसे में एक किसान की DSR अपनाने की कहानी यह समझने में मदद करती है कि सही समय पर उपयुक्त खरपतवारनाशी का इस्तेमाल करने से खेत में खरपतवार का दबाव काफी कम किया जा सकता है। लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि हर खेत में केवल एक ही स्प्रे से सभी प्रकार के खरपतवार खत्म होने की गारंटी नहीं होती।
रोपाई की जगह DSR क्यों अपनाया जा रहा है
पारंपरिक धान की खेती में पहले नर्सरी तैयार की जाती है और फिर तैयार पौधों की खेत में रोपाई की जाती है। इसमें मजदूरों की जरूरत, खेत तैयार करने की प्रक्रिया और समय काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। DSR में धान की पौध को अलग से तैयार करके रोपने के बजाय बीज की सीधे खेत में बुवाई की जाती है।
सीधी बिजाई का एक बड़ा फायदा यह है कि रोपाई की प्रक्रिया हट जाती है। इससे खेती की पूरी व्यवस्था बदल जाती है और किसान को शुरुआती काम कम समय में पूरा करने का अवसर मिलता है। लेकिन DSR के साथ खरपतवार प्रबंधन की चुनौती बढ़ सकती है, क्योंकि धान और खरपतवार एक ही समय के आसपास खेत में उगते हैं।
इसी वजह से DSR को सिर्फ बीज सीधे बोने की तकनीक मानना सही नहीं है। इसमें खेत की तैयारी, बुवाई का समय, नमी और खरपतवार नियंत्रण सभी का तालमेल जरूरी होता है।
DSR में खरपतवार सबसे बड़ी चुनौती क्यों बनते हैं
रोपाई वाले धान में शुरुआती अवस्था में खेत की परिस्थितियां खरपतवार के लिए अपेक्षाकृत अलग होती हैं। इसके विपरीत DSR में धान और खरपतवार दोनों सीधे खेत में उगते हैं। यदि खरपतवार समय रहते नियंत्रित नहीं किए जाएं तो वे धान के पौधों के साथ पानी, पोषक तत्व, जगह और रोशनी के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
DSR में घास कुल के खरपतवार, मोथा वर्ग और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार समस्या पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा खरपतवार धान जैसे दिखाई देने लगें तो उन्हें पहचानना और नियंत्रित करना और भी कठिन हो जाता है। ICAR की हालिया जानकारी में भी DSR में खरपतवार प्रबंधन को महत्वपूर्ण चुनौती बताया गया है और weedy rice को गंभीर समस्या माना गया है।
इसलिए किसान को यह नहीं मानना चाहिए कि DSR अपनाने के बाद केवल एक बार दवा डाल देने से खेत हमेशा खरपतवार मुक्त रहेगा। खेत में उगने वाले खरपतवारों के प्रकार और उनकी अवस्था के अनुसार प्रबंधन की जरूरत बदल सकती है।
किसान ने एक स्प्रे को क्यों माना अहम
जिस स्थिति की बात की जा रही है, उसमें किसान ने रोपाई छोड़कर DSR अपनाया और खरपतवार नियंत्रण के लिए स्प्रे का सहारा लिया। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि शुरुआती अवस्था में खरपतवार धान की फसल पर हावी न हों।
खरपतवारनाशी का असर केवल दवा के नाम पर निर्भर नहीं करता। उसका सही चयन, मात्रा, छिड़काव का समय, खरपतवार की अवस्था और खेत की परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण होती हैं। इसी कारण कृषि विशेषज्ञ किसी भी दवा को देखकर केवल नाम के आधार पर इस्तेमाल करने की सलाह नहीं देते।
ICAR की विभिन्न कृषि सिफारिशों में DSR के लिए अलग-अलग खरपतवारनाशी और अलग-अलग समय पर प्रयोग की रणनीतियां बताई गई हैं। कुछ परिस्थितियों में पूर्व-उद्भव और बाद-उद्भव खरपतवारनाशी का क्रमिक इस्तेमाल भी बेहतर नियंत्रण के लिए अपनाया जाता है।
एक स्प्रे से खरपतवार खत्म होने की बात को कैसे समझें
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि “एक स्प्रे से खरपतवार खत्म” को हर DSR खेत के लिए सार्वभौमिक नियम नहीं माना जा सकता। किसी एक खेत में एक सही समय पर किया गया स्प्रे बहुत अच्छा परिणाम दे सकता है, जबकि दूसरे खेत में खरपतवारों की विविधता या उनकी अवस्था अलग होने के कारण अतिरिक्त नियंत्रण की जरूरत पड़ सकती है।
हाल के कृषि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भी वैज्ञानिकों ने खरपतवारनाशी की सही किस्म, मात्रा, समय और प्रयोग विधि का पालन करने पर जोर दिया है। गलत दवा, गलत मात्रा या गलत समय पर छिड़काव करने से खरपतवार नियंत्रण कमजोर हो सकता है और फसल को नुकसान पहुंचने का जोखिम भी रहता है।
किसान को स्प्रे से पहले खेत में मौजूद खरपतवारों की पहचान और इस्तेमाल होने वाली दवा के लेबल पर दिए गए फसल तथा खरपतवार संबंधी निर्देशों को देखना चाहिए। केवल दूसरे किसान के खेत में सफल रहे स्प्रे को बिना परिस्थितियां समझे अपने खेत में दोहराना उचित नहीं है।
DSR में खरपतवार नियंत्रण के लिए किन बातों का ध्यान रखें
सीधी बिजाई में खरपतवार नियंत्रण का सबसे अच्छा परिणाम तभी मिलता है जब किसान शुरुआत से योजना बनाकर चले। खास तौर पर इन बातों पर ध्यान देना जरूरी है:
- बुवाई के समय खेत में पर्याप्त और उचित नमी की स्थिति बनाए रखें।
- खरपतवार की किस्म और उसकी अवस्था देखकर ही खरपतवारनाशी का चयन करें।
- दवा की मात्रा और छिड़काव का समय उत्पाद के स्वीकृत निर्देशों के अनुसार रखें।
- जरूरत पड़ने पर खेत की स्थिति के अनुसार अन्य खरपतवार नियंत्रण उपाय भी अपनाएं।
DSR में वैज्ञानिक खरपतवार प्रबंधन पर इसलिए भी जोर दिया जा रहा है क्योंकि एक ही खरपतवारनाशी का बार-बार या अनुचित इस्तेमाल भविष्य में खरपतवारों में प्रतिरोध की समस्या पैदा कर सकता है। ICAR के खरपतवार प्रबंधन कार्यक्रमों में भी विवेकपूर्ण और एकीकृत खरपतवार प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर दिया गया है।
DSR अपनाने वाले किसान के लिए असली सीख
इस किसान के अनुभव से सबसे बड़ी सीख यह है कि धान की सीधी बिजाई केवल रोपाई का विकल्प नहीं है, बल्कि एक अलग खेती पद्धति है। इसमें शुरुआती खरपतवार नियंत्रण को नजरअंदाज करने पर पूरी फसल प्रभावित हो सकती है।
दूसरी ओर, सही तकनीक और समय पर खरपतवार प्रबंधन के साथ DSR खेती को अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकता है। ICAR की ओर से भी DSR के लिए weed-competitive और herbicide-tolerant rice तकनीकों पर काम किया जा रहा है, जिनका उद्देश्य खरपतवार प्रबंधन को आसान और अधिक प्रभावी बनाना है।
इसलिए किसान के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात किसी एक स्प्रे का नाम याद रखना नहीं, बल्कि यह समझना है कि उसके खेत में कौन-सा खरपतवार है, वह किस अवस्था में है और उसके लिए कौन-सा खरपतवार प्रबंधन उपाय उपयुक्त है।
निष्कर्ष
रोपाई की जगह DSR अपनाने से धान की खेती की प्रक्रिया जरूर बदलती है, लेकिन इसके साथ खरपतवार नियंत्रण की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। समय पर किया गया सही खरपतवार प्रबंधन शुरुआती प्रतिस्पर्धा को कम करने में मदद कर सकता है और फसल को बेहतर शुरुआत मिल सकती है।
किसान भाई के एक स्प्रे वाले अनुभव को प्रेरणा के तौर पर देखा जा सकता है, लेकिन इसे हर खेत में लागू होने वाला पक्का नियम नहीं मानना चाहिए। DSR में सफलता के लिए सही बुवाई, खेत में उचित नमी, खरपतवार की पहचान और स्वीकृत खरपतवारनाशी का सही समय व मात्रा में प्रयोग सबसे जरूरी है। यही तरीका सीधी बिजाई को सिर्फ मजदूरी बचाने वाली तकनीक के बजाय एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित धान उत्पादन पद्धति बना सकता है।