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कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री ने शुरू की ‘प्रगति’ पहल, 20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

कृषि उद्यमियों को सशक्त बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री ने शुरू की ‘प्रगति’ पहल, 20 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

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‘प्रगति’ के तहत 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी के रूप में विकसित करने और करीब 20 लाख छोटे एवं सीमांत किसानों तक कृषि संबंधी सेवाएं और जानकारी पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। पहल का जोर खेती में तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य, वित्तीय पहुंच, बाजार और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने पर है।

प्रगति पहल का एक प्रमुख उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कृषि क्षेत्र में रोजगार और उद्यमिता के अवसरों से जोड़ना है। इसके तहत 20 हजार नए कृषि-उद्यमियों का एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क तैयार करने की योजना है। यह नेटवर्क पहले से मौजूद कृषि-उद्यमिता से जुड़े नेटवर्क के विस्तार के रूप में काम करेगा।

इन कृषि-उद्यमियों को किसानों तक स्थानीय स्तर पर कृषि सलाह और विभिन्न सेवाएं पहुंचाने में सहयोग दिया जाएगा। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पहल में प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और संसाधनों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर कृषि सेवाओं को मजबूत करने पर जोर है।

‘प्रगति’ का लक्ष्य देश के करीब 20 लाख छोटे और सीमांत किसानों की उत्पादकता, आजीविका और आय में सुधार लाना है। इसके लिए किसानों को कृषि सलाह, मृदा स्वास्थ्य सेवाओं, मशीनीकरण, ऋण से जुड़ाव और बाजार तक पहुंच जैसी सेवाओं से जोड़ने पर ध्यान दिया जाएगा।

इस पहल के माध्यम से किसानों को खेती से जुड़ी जानकारी गांव के स्तर पर उपलब्ध कराने की कोशिश की जाएगी। इसका उद्देश्य किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों और बेहतर संसाधनों तक पहुंच दिलाने के साथ कृषि को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में काम करना है।

प्रगति पहल में कृषि तकनीक को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। किसानों को मृदा स्वास्थ्य, आधुनिक कृषि पद्धतियों, कृषि मशीनरी और डिजिटल सलाह जैसी सेवाओं से जोड़ने पर जोर रहेगा।

कृषि मंत्री ने पहल के शुभारंभ के दौरान खेती की लागत कम करने, उत्पादकता बढ़ाने, फसल विविधीकरण और Value Addition पर जोर दिया था। कृषि के साथ बागवानी, पशुपालन, मत्स्य पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को भी किसानों की आय के वैकल्पिक स्रोतों के रूप में बढ़ावा देने की बात कही गई।

प्रगति पहल की शुरुआत कृषि की दृष्टि से महत्वपूर्ण आठ राज्यों में करने की योजना है। इनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, महाराष्ट्र और राजस्थान शामिल हैं। इन राज्यों में ग्रामीण युवाओं और किसानों को पहल से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।

स्थानीय स्तर पर कृषि-उद्यमियों के माध्यम से किसानों तक सेवाएं पहुंचाने की व्यवस्था विकसित की जाएगी। इससे किसानों को खेती से संबंधित सलाह और कुछ जरूरी सेवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर सहायता मिलने की संभावना है।

प्रगति के तहत किसानों की आय और कृषि उत्पादकता में सुधार को लेकर कुछ लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पहल में किसानों की आय में न्यूनतम 30 प्रतिशत वृद्धि तथा धान, मक्का और आलू जैसी प्रमुख फसलों की उपज में 15 से 20 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। ये कार्यक्रम के लक्ष्य हैं, हर किसान के लिए गारंटीकृत परिणाम नहीं।

इसके अलावा कम से कम 20 प्रतिशत भाग लेने वाले किसानों में Regenerative Agriculture यानी पुनर्योजी कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने का लक्ष्य भी रखा गया है। इससे कृषि उत्पादकता के साथ मिट्टी और पर्यावरण से जुड़े पहलुओं पर भी ध्यान देने की कोशिश की जाएगी।

प्रगति पहल में कृषि-उद्यमियों को किसानों और आधुनिक कृषि सेवाओं के बीच कड़ी के रूप में विकसित करने की योजना है। उन्हें कृषि सलाह, मृदा स्वास्थ्य, मशीनरी से जुड़ी सेवाओं, क्रेडिट लिंकज, बाजार और आजीविका के अवसरों से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया जाएगा।

आधिकारिक पहल के विवरण में 20 हजार कृषि-उद्यमी आधारित Kiosks विकसित करने की भी बात कही गई है। इन माध्यमों से किसानों तक डिजिटल और वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।

प्रगति पहल का असर जमीन पर इसके क्रियान्वयन और किसानों तक सेवाओं की वास्तविक पहुंच पर निर्भर करेगा। यदि कृषि-उद्यमियों का नेटवर्क प्रभावी तरीके से काम करता है, तो किसानों को गांव के स्तर पर कृषि तकनीक, सलाह और बाजार से संबंधित जानकारी प्राप्त करने में सुविधा मिल सकती है।

  • किसानों को स्थानीय स्तर पर कृषि सलाह और तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने पर जोर।
  • मृदा स्वास्थ्य, कृषि मशीनरी और आधुनिक खेती की सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने का प्रयास।
  • किसानों को औपचारिक वित्तीय सेवाओं, ऋण, बीमा और बचत से जोड़ने की दिशा में काम।
  • बाजार तक पहुंच और खेती के साथ अतिरिक्त आय के अवसरों को बढ़ावा देने पर ध्यान।

प्रगति पहल में किसानों को केवल कृषि तकनीक से जोड़ने के बजाय वित्तीय और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसके तहत किसानों को क्रेडिट, बीमा, बचत और सरकारी लाभों तक पहुंच बनाने में सहायता देने का लक्ष्य है।

आधिकारिक विवरण के अनुसार, पहल से जुड़े किसानों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाने और औपचारिक वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। इससे छोटे किसानों को कृषि निवेश और जोखिम प्रबंधन से जुड़े निर्णय लेने में सहायता मिल सकती है।

केंद्र सरकार की ‘प्रगति’ पहल ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमिता से जोड़ने और छोटे एवं सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि सेवाएं पहुंचाने की दिशा में शुरू की गई राष्ट्रीय पहल है। इसके तहत 20 हजार ग्रामीण युवाओं को कृषि-उद्यमी बनाने और करीब 20 लाख किसानों तक पहुंच बनाने का लक्ष्य रखा गया है।

तकनीक, मशीनीकरण, मृदा स्वास्थ्य, वित्तीय सेवाओं, बाजार संपर्क और टिकाऊ कृषि पर जोर इस पहल की प्रमुख विशेषताएं हैं। अब इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि कृषि-उद्यमियों का नेटवर्क राज्यों और गांवों में कितनी प्रभावी तरीके से काम करता है और किसानों तक सेवाओं का लाभ किस स्तर तक पहुंचता है।

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