उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए एक बहुत अच्छी खबर सामने आ रही है। राज्य में नए पेराई सत्र की शुरुआत के साथ ही चीनी मिलों ने पूरी तरह से काम करना शुरू कर दिया है। मिलों के चालू होने से अब किसानों को अपना गन्ना बेचने और उसकी कटाई करने में काफी आसानी होगी। मैं पिछले कुछ दिनों से गन्ना किसानों और मिल मालिकों की बातें सुन रहा हूँ। उत्तर प्रदेश के पश्चिमी जिलों से लेकर महाराष्ट्र तक एक बात साफ है—नया चीनी विपणन सीजन 2026-27 समय पर शुरू हो गया है। इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) के अनुसार, 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हुए सीजन में अब तक 107 चीनी मिलों ने गन्ने की पेराई शुरू कर दी है।
चीनी मिलों में पेराई का काम हुआ तेज
देशभर में चीनी विपणन वर्ष 2026-27 के लिए पेराई का काम समय पर शुरू कर दिया गया है। भारतीय चीनी एवं जैव-ऊर्जा निर्माता संघ (ISMA) की रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों में 107 चीनी मिलों ने पेराई का काम शुरू कर दिया है। इस बार समय से मिलें चालू होने से ग्रामीण इलाकों के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
किसानों को समय पर मिल रही है पर्चियां
इस बार किसानों की सहूलियत के लिए पर्ची वितरण व्यवस्था को पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी बनाया गया है। किसानों को उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एसएमएस (SMS) के जरिए गन्ने की तौल के लिए पर्चियां भेजी जा रही हैं। इससे किसानों को अब मिलों या सहकारी समितियों के चक्कर नहीं काटने पड़ रहे हैं।
- पर्ची की जानकारी सीधे किसानों के मोबाइल फोन पर आ रही है।
- तौल केंद्रों पर भीड़ को कम करने के लिए समय सारणी बनाई गई है।
- किसान घर बैठे ही ई-गन्ना ऐप के जरिए अपनी पर्ची का स्टेटस देख सकते हैं।
- गन्ने की तौल होने के तुरंत बाद रसीद डिजिटल माध्यम से मिल रही है।
गन्ना पेराई सत्र और मिलों का राज्यवार विवरण
इस साल देश के अलग-अलग राज्यों में मिलों को चरणबद्ध तरीके से चालू किया जा रहा है। सबसे ज्यादा मिलें महाराष्ट्र में चालू हुई हैं, जबकि उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में भी पेराई का काम रफ्तार पकड़ रहा है। वर्तमान में संचालित 107 चीनी मिलों का मुख्य विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| राज्य का नाम | पेराई शुरू करने वाली मिलों की संख्या | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| महाराष्ट्र | 87 मिलें | पेराई का काम तेजी से जारी है |
| उत्तर प्रदेश | 2 मिलें (शुरुआती चरण) | पश्चिमी और मध्य क्षेत्रों में तैयारी |
| गुजरात, कर्नाटक और तमिलनाडु | 18 मिलें | स्थानीय शेड्यूल के अनुसार चालू |
प्रमुख चीनी मिलों की क्षेत्रवार सूची
किसानों की जानकारी के लिए बता दें कि उत्तर प्रदेश और देश के अन्य हिस्सों में कई बड़ी मिलें इस व्यवस्था का हिस्सा हैं। उत्तर प्रदेश में 120 से ज्यादा मिलें संचालित होती हैं, जिनमें से शुरुआती मिलों में काम शुरू हो चुका है और बाकी भी अगले कुछ दिनों में चालू हो जाएंगी। देश और राज्य की कुछ प्रमुख चीनी मिलों के नाम इस प्रकार हैं:
- बजाज हिंदुस्तान शुगर्स: गोला गोकर्णनाथ, पलिया कलां, खंभेड़ा, बरखेड़ा और बिलाई यूनिट।
- त्रिवेणी इंजीनियरिंग शुगर्स: खतौली, देवबंद, रामकोला, चंदनपुर और रानीनांगल यूनिट।
- डीसीएम श्रीराम शुगर्स: अजबापुर, हरियावां, लोनी और रूपापुर यूनिट।
- अन्य राज्यों की मिलें: वारणा, राजारामबापू, विठ्ठल, रेणुका शुगर्स और बाराबती एग्रो।
समय पर भुगतान के लिए सख्त निर्देश
सरकार ने चीनी मिलों को गन्ना खरीदने के बाद किसानों का भुगतान समय पर करने के कड़े आदेश दिए हैं। नियमों के मुताबिक, गन्ना आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर किसानों के बैंक खाते में पैसे पहुंच जाने चाहिए। जो मिलें भुगतान में देरी करेंगी, उन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसान अपने गन्ने के सर्वे, कैलेंडर और सट्टा से जुड़ी किसी भी आधिकारिक जानकारी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के गन्ना विकास विभाग के आधिकारिक पोर्टल upcangov.in पर जाकर अपनी पूरी जानकारी देख सकते हैं।
देशभर में 107 चीनी मिलों में पेराई शुरू होने से गन्ना किसानों के चेहरे खिल गए हैं। डिजिटल व्यवस्था और सख्त सरकारी नियमों के कारण इस बार गन्ना बेचने की प्रक्रिया पहले से कहीं ज्यादा आसान और सुरक्षित लग रही है। अगर किसान समय पर अपनी पर्ची के अनुसार गन्ने की कटाई कर मिलों तक पहुंचाते हैं, तो उन्हें इस सत्र में बहुत अच्छा लाभ देखने को मिलेगा।
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