सीतामढ़ी के किसानों के लिए कृषि क्षेत्र से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। जिले के किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को अब स्थानीय बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। इसी उद्देश्य से कृषि विभाग और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण यानी APEDA के संयुक्त तत्वावधान में किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
सितंबर 2026 में आयोजित इस एक दिवसीय प्रशिक्षण का उद्देश्य किसानों को कृषि उत्पादों के निर्यात की प्रक्रिया, अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों, उत्पाद की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों के बारे में जानकारी देना था। कार्यक्रम में किसानों और FPO से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया।
सीतामढ़ी में किसानों को क्या ट्रेनिंग दी गई?
प्रशिक्षण कार्यक्रम में किसानों को केवल विदेश में कृषि उत्पाद बेचने की सामान्य जानकारी नहीं दी गई, बल्कि निर्यात से जुड़ी व्यावहारिक प्रक्रियाओं को समझाने पर भी जोर दिया गया। इसमें अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए उत्पाद तैयार करने, गुणवत्ता बनाए रखने और खाद्य सुरक्षा से जुड़े मानकों की जानकारी दी गई।
इस तरह की ट्रेनिंग का उद्देश्य किसानों और किसान उत्पादक संगठनों को स्थानीय बाजार से आगे बढ़कर बड़े बाजारों से जोड़ने की क्षमता विकसित करना है। APEDA बिहार में किसानों, FPO और अन्य संबंधित लोगों के लिए कृषि निर्यात से जुड़े क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित करता रहा है।
किन कृषि उत्पादों को विदेश भेजने की संभावना?
सीतामढ़ी में आयोजित प्रशिक्षण में बासमती चावल, मखाना और अन्य कृषि उत्पादों के निर्यात की संभावनाओं पर जानकारी दी गई। खास तौर पर ऐसे उत्पादों पर ध्यान दिया गया जिनकी घरेलू बाजार के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मांग हो सकती है।
हालांकि किसी उत्पाद को विदेश भेजने के लिए केवल उत्पादन पर्याप्त नहीं होता। उसके लिए गुणवत्ता, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा, दस्तावेज और निर्यात नियमों का पालन भी जरूरी होता है।
किसानों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का फायदा
यदि किसान या FPO सीधे या निर्यातकों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार की सप्लाई चेन से जुड़ते हैं, तो उन्हें अपनी उपज के लिए नए बाजार तलाशने का अवसर मिल सकता है। इससे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ने और किसानों की आय के नए अवसर बनने की संभावना रहती है।
APEDA के Farmer Connect प्लेटफॉर्म का उद्देश्य भी FPO, FPC और सहकारी संस्थाओं को निर्यातकों से जोड़ना है। इसमें किसान संगठनों को अपनी प्रोफाइल बनाने और उत्पादों की बिक्री की पेशकश रखने की सुविधा दी जाती है, जबकि निर्यातक उपलब्ध उत्पादों को देख सकते हैं।
निर्यात के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है?
किसी कृषि उत्पाद को विदेश भेजने से पहले उसकी गुणवत्ता और बाजार की जरूरत को समझना जरूरी है। अलग-अलग देशों में खाद्य उत्पादों के लिए अलग गुणवत्ता और सुरक्षा मानक हो सकते हैं।
- उत्पाद की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप रखना जरूरी होता है।
- पैकेजिंग और लेबलिंग को संबंधित बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार करना पड़ सकता है।
- निर्यात के लिए जरूरी दस्तावेज और प्रक्रियाओं की जानकारी होना आवश्यक है।
- किसान अकेले निर्यात करने के बजाय FPO या संबंधित निर्यातक के माध्यम से भी बाजार से जुड़ सकते हैं।
बिहार के कृषि उत्पादों की विदेशों में बढ़ रही पहुंच
बिहार के कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने के प्रयास पहले भी किए गए हैं। अगस्त 2026 में APEDA ने बिहार से GI-tagged Mithila Makhana की 18 मीट्रिक टन की पहली वाणिज्यिक समुद्री खेप ऑस्ट्रेलिया भेजने में मदद की थी। इस खेप के लिए दरभंगा जिले के मखाना उत्पादकों से उत्पाद लिया गया था।
इसके अलावा APEDA ने बिहार के किसानों, FPO और निर्यात से जुड़े अन्य लोगों के लिए गुणवत्ता मानकों, पैकेजिंग, लॉजिस्टिक्स और निर्यात दस्तावेजों से संबंधित क्षमता निर्माण कार्यक्रम भी किए हैं।
किसानों के लिए आगे क्या अवसर हैं?
सीतामढ़ी में आयोजित प्रशिक्षण को किसानों को कृषि निर्यात की पूरी व्यवस्था समझाने की दिशा में एक कदम माना जा सकता है। यदि किसान संगठित होकर FPO के माध्यम से काम करते हैं, तो उत्पादन को एकत्र करना, गुणवत्ता बनाए रखना और बड़े खरीदारों तक पहुंच बनाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
सीतामढ़ी में किसानों को प्रशिक्षण देने के लिए ATMA भी विभिन्न कृषि प्रशिक्षण और exposure visit कार्यक्रम संचालित करता है। इसकी आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिले के किसानों को राज्य के अंदर और बाहर विभिन्न संस्थानों में प्रशिक्षण तथा exposure visit के लिए भेजा जा सकता है।
किसान कैसे जुड़ सकते हैं?
किसानों को कृषि निर्यात से संबंधित किसी भी अवसर के लिए अपने जिले के कृषि विभाग, ATMA या संबंधित किसान उत्पादक संगठन से जानकारी लेनी चाहिए। निर्यात के लिए सीधे किसी अनजान व्यक्ति को पैसे या निजी दस्तावेज देने के बजाय संबंधित सरकारी विभाग या अधिकृत संस्था से प्रक्रिया की पुष्टि करना जरूरी है।
सीतामढ़ी के किसानों के लिए कृषि उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में आयोजित यह प्रशिक्षण एक महत्वपूर्ण पहल है। किसानों को निर्यात प्रक्रिया, गुणवत्ता, खाद्य सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय बाजार की जरूरतों के बारे में जानकारी दी गई है।
बिहार के मखाना और अन्य कृषि उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहुंच के उदाहरण पहले से सामने आ रहे हैं। ऐसे में सीतामढ़ी के किसानों और FPO के लिए भी निर्यात बाजार की जानकारी भविष्य में नए व्यावसायिक अवसर खोल सकती है। हालांकि विदेश में बिक्री के लिए प्रत्येक उत्पाद और बाजार के निर्धारित नियमों का पालन करना जरूरी होगा।