फसल गिरदावरी को लेकर नया विवाद, पटवारियों के बाद कृषि अफसरों ने भी जताई असहमति

कृषि अधिकारियों का कहना है कि फसल गिरदावरी और राजस्व रिकॉर्ड से जुड़े काम राजस्व विभाग की जिम्मेदारी से संबंधित हैं। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारियों को इस कार्य में लगाने से उनकी नियमित कृषि गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

PV ऐप से गिरदावरी को लेकर क्यों है विवाद?

खरीफ फसल वर्ष 2026-27 के लिए फसल गिरदावरी की प्रक्रिया में डिजिटल माध्यम का इस्तेमाल किया जा रहा है। रायगढ़ में पहले पटवारी संघ ने PV ऐप के जरिए फसल का भौतिक सत्यापन करने का विरोध किया था।

रिपोर्ट के अनुसार पटवारियों की ओर से आपत्ति के बाद यह जिम्मेदारी राजस्व निरीक्षकों को देने की कोशिश की गई, लेकिन वहां भी सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारियों और कृषि विकास अधिकारियों को इस काम में लगाए जाने की बात सामने आई। कृषि अधिकारियों ने भी इस पर असहमति जताई।

कृषि अधिकारियों ने क्या आपत्ति जताई?

कृषि अधिकारियों की ओर से मुख्य आपत्ति काम की प्रकृति और जिम्मेदारी को लेकर है। उनका कहना है कि कृषि विभाग के अधिकारियों का मुख्य कार्य किसानों को कृषि संबंधी तकनीकी सलाह देना, योजनाओं का क्रियान्वयन और कृषि गतिविधियों की निगरानी करना है।

रिपोर्ट के अनुसार कृषि अधिकारी संघ ने अधिकारियों को राजस्व संबंधी कार्यों में नहीं लगाने की मांग करते हुए ज्ञापन भी दिया है। अधिकारियों का तर्क है कि राजस्व अभिलेख, खेतों की सटीक लोकेशन, सीमांकन और बटांकन जैसी जानकारी उनके नियमित कार्यक्षेत्र का हिस्सा नहीं है।

नक्शे और तकनीकी व्यवस्था को लेकर भी सवाल

विवाद का एक हिस्सा डिजिटल नक्शे और तकनीकी व्यवस्था से जुड़ा हुआ है। कृषि अधिकारियों की ओर से बताया गया है कि वर्तमान नक्शे में कई तरह की तकनीकी कमियां हैं। कुछ खेतों के विभाजन से संबंधित जानकारी भी डिजिटल रिकॉर्ड में सही तरीके से दर्ज नहीं होने की बात कही गई है।

PV ऐप के जरिए मौके पर फसल का सत्यापन करने के लिए खेत की वास्तविक लोकेशन पर जाकर फोटो और GPS आधारित जानकारी दर्ज करनी होती है। बारिश और खेतों में पानी की स्थिति जैसी परिस्थितियों में प्रत्येक खेत का मौके पर जाकर सत्यापन करना कर्मचारियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

फसल गिरदावरी किसानों के लिए क्यों जरूरी है?

फसल गिरदावरी में खेत में बोई गई फसल का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। यह जानकारी कृषि और राजस्व व्यवस्था में कई कार्यों के लिए उपयोगी होती है। डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज फसल और वास्तविक खेत की फसल के बीच अंतर होने पर किसानों को आगे की प्रक्रियाओं में परेशानी हो सकती है।

हरियाणा के फतेहाबाद में भी हाल में सैटेलाइट से तैयार फसल डेटा और किसानों द्वारा दर्ज विवरण के बीच बड़े स्तर पर मिसमैच सामने आने की रिपोर्ट आई है। वहां प्रशासन को मौके पर जाकर वास्तविक फसल का सत्यापन कराना पड़ रहा है।

विवाद का समाधान कैसे होगा?

फसल गिरदावरी को लेकर बनी स्थिति में तकनीकी व्यवस्था और विभागीय जिम्मेदारी दोनों को स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा। संबंधित विभागों के बीच समन्वय के साथ यह तय करना जरूरी होगा कि डिजिटल गिरदावरी की प्रक्रिया किस विभाग के कर्मचारियों द्वारा और किन तकनीकी मानकों के आधार पर पूरी की जाएगी।

  • डिजिटल नक्शों और खेतों की लोकेशन से जुड़ी तकनीकी कमियों को दूर करना जरूरी होगा।
  • गिरदावरी के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों को ऐप और प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी दी जानी चाहिए।
  • मौके पर फसल सत्यापन के दौरान GPS, फोटो और नेटवर्क संबंधी समस्याओं का समाधान जरूरी है।
  • किसानों की दर्ज फसल और डिजिटल रिकॉर्ड में अंतर होने पर सुधार की स्पष्ट प्रक्रिया उपलब्ध होनी चाहिए।

किसानों पर क्या पड़ सकता है असर?

फसल गिरदावरी का रिकॉर्ड सही तरीके से तैयार होना किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि खेत में बोई गई फसल और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज जानकारी अलग रहती है तो आगे फसल बिक्री या संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं में दिक्कत की स्थिति बन सकती है।

इसलिए गिरदावरी प्रक्रिया में तकनीकी सटीकता के साथ-साथ किसानों की वास्तविक फसल का सही रिकॉर्ड तैयार करना जरूरी है। डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाना है, लेकिन इसके लिए तकनीकी ढांचे और मैदानी सत्यापन के बीच बेहतर तालमेल आवश्यक होगा।

रायगढ़ में फसल गिरदावरी को लेकर विवाद अब पटवारियों और राजस्व निरीक्षकों से आगे बढ़कर कृषि विभाग के अधिकारियों तक पहुंच गया है। कृषि अधिकारियों ने PV ऐप के माध्यम से गिरदावरी कराने पर असहमति जताते हुए इसे राजस्व विभाग से संबंधित कार्य बताया है। ऐसे में अब विभागों के बीच जिम्मेदारी और प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाना महत्वपूर्ण होगा।

फसल गिरदावरी का सीधा संबंध किसानों के फसल रिकॉर्ड से है, इसलिए विवाद का समाधान इस तरह होना जरूरी है कि डिजिटल प्रक्रिया भी सुचारु रहे और खेत में मौजूद वास्तविक फसल का रिकॉर्ड भी सही तरीके से दर्ज हो।

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