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धान पागल हो जाएगा! यूरिया में मिलाकर डालें ये खाद, कल्ले देखकर चौंक जाएंगे |

धान पागल हो जाएगा! यूरिया में मिलाकर डालें ये खाद, कल्ले देखकर चौंक जाएंगे |

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धान की फसल में अच्छी बढ़वार और पर्याप्त कल्ले निकलना सीधे तौर पर पोषक तत्वों के संतुलित प्रबंधन से जुड़ा है। सिर्फ यूरिया डालने से हर खेत में मनचाहा परिणाम नहीं मिलता, क्योंकि फसल को नाइट्रोजन के साथ दूसरे जरूरी पोषक तत्व भी चाहिए होते हैं।

खासकर सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था में खेत की स्थिति, मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता और खाद डालने का सही समय काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

कल्ले बढ़ाने में यूरिया की क्या भूमिका है

धान की शुरुआती बढ़वार के बाद जब पौधा सक्रिय रूप से कल्ले निकालता है, उस समय नाइट्रोजन की जरूरत बढ़ जाती है। यूरिया नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत है और उचित मात्रा में इसका इस्तेमाल पत्तियों तथा पौधे की बढ़वार में मदद करता है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि अधिक यूरिया डालने से हमेशा अधिक कल्ले निकलेंगे। जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन देने पर पौधा बहुत नरम और अधिक हरा हो सकता है तथा फसल में गिरने और कुछ कीट-रोगों की समस्या का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए यूरिया की मात्रा फसल की अवस्था और स्थानीय सिफारिश के अनुसार ही तय करनी चाहिए।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की कृषि सलाह में भी धान में नाइट्रोजन को एक साथ देने के बजाय अलग-अलग खुराकों में देने पर जोर दिया गया है। इसमें सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था नाइट्रोजन देने का महत्वपूर्ण समय माना गया है।

यूरिया के साथ जिंक की बात क्यों होती है

धान की फसल में जिंक की कमी होने पर पौधों की सामान्य बढ़वार प्रभावित हो सकती है। कुछ परिस्थितियों में पत्तियों पर कमी के लक्षण दिखाई देते हैं और पौधे कमजोर रह सकते हैं। ऐसे खेतों में जिंक की जरूरत पूरी करना फसल के पोषण प्रबंधन का हिस्सा हो सकता है।

इसी वजह से कई कृषि सलाहों में यूरिया की खुराक के साथ जिंक देने की बात कही जाती है। हालांकि हर खेत में बिना जांच के जिंक डालना जरूरी नहीं है। यदि मिट्टी में पहले से पर्याप्त जिंक मौजूद है तो अतिरिक्त जिंक देने का लाभ जरूरी नहीं कि मिले।

इसलिए किसान को यह समझना जरूरी है कि यूरिया और जिंक कोई ऐसा निश्चित मिश्रण नहीं है जिसे हर धान के खेत में एक जैसी मात्रा में डाल दिया जाए। सही मात्रा मिट्टी की स्थिति, फसल की अवस्था और स्थानीय कृषि सिफारिश पर निर्भर करती है।

धान में खाद डालते समय किन बातों का रखें ध्यान

खाद का सही इस्तेमाल केवल खाद चुनने तक सीमित नहीं है। खेत में पानी की स्थिति और खरपतवार का नियंत्रण भी पोषक तत्वों की उपयोग क्षमता को प्रभावित करते हैं।

धान की फसल में खाद डालते समय इन बातों पर ध्यान देना उपयोगी रहता है:

  • खेत में अनावश्यक रूप से बहुत अधिक पानी भरा होने पर खाद डालने से बचें और स्थानीय सलाह के अनुसार पानी का प्रबंधन करें।
  • यूरिया की मात्रा फसल की अवस्था तथा अनुशंसित नाइट्रोजन खुराक के अनुसार रखें।
  • जिंक तभी दें जब मिट्टी की जांच या स्थानीय कृषि सलाह से इसकी जरूरत स्पष्ट हो।
  • खाद डालने से पहले खेत में खरपतवार की स्थिति भी देखें, क्योंकि खरपतवार भी मिट्टी के पोषक तत्वों का इस्तेमाल करते हैं।

केवल यूरिया डालना क्यों सही तरीका नहीं

धान को सिर्फ नाइट्रोजन की जरूरत नहीं होती। फसल के लिए फास्फोरस, पोटाश और जरूरत के अनुसार जिंक जैसे पोषक तत्व भी महत्वपूर्ण हैं। इन सभी की जरूरत फसल की अवस्था और मिट्टी की स्थिति के हिसाब से अलग हो सकती है।

संतुलित खाद प्रबंधन का मतलब यह नहीं है कि हर खाद को एक साथ मिला दिया जाए। इसका अर्थ है कि जिस पोषक तत्व की जितनी आवश्यकता है, उसे सही समय और उचित मात्रा में उपलब्ध कराया जाए।

कृषि सलाहों में भी नाइट्रोजन को अलग-अलग चरणों में देने और फास्फोरस तथा पोटाश को फसल की जरूरत के अनुसार बांटकर इस्तेमाल करने की बात कही जाती है। इसलिए केवल अधिक यूरिया डालकर कल्ले बढ़ाने की कोशिश करना सही वैज्ञानिक तरीका नहीं माना जा सकता।

कल्ले देखकर चौंकने वाली बात से ज्यादा जरूरी है संतुलित फसल

धान में ज्यादा कल्ले निकलना अपने आप में अच्छी पैदावार की गारंटी नहीं है। कल्ले स्वस्थ हों, पौधे मजबूत रहें और आगे चलकर अच्छी बालियां बनें, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है।

अगर खेत में नाइट्रोजन की कमी है तो उचित समय पर यूरिया देने से पौधे की बढ़वार और कल्ले निकलने में मदद मिल सकती है। वहीं जिंक की वास्तविक कमी होने पर उसकी पूर्ति करना भी उपयोगी हो सकता है। लेकिन बिना जरूरत के अतिरिक्त खाद डालने से खर्च बढ़ सकता है और फसल को नुकसान भी हो सकता है।

इसलिए किसान को सोशल मीडिया पर बताए गए किसी भी एक तय खाद मिश्रण को आंख बंद करके पूरे खेत में लागू करने के बजाय अपनी मिट्टी और फसल की स्थिति को देखना चाहिए। मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर खाद की मात्रा तय करना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।

निष्कर्ष

धान में अच्छे कल्ले निकालने के लिए सिर्फ ज्यादा यूरिया डालना समाधान नहीं है। सक्रिय कल्ले निकलने की अवस्था में नाइट्रोजन की सही मात्रा, जरूरत के अनुसार जिंक की उपलब्धता, संतुलित पोषण और उचित पानी प्रबंधन मिलकर फसल की बढ़वार को बेहतर बनाते हैं।

अगर मिट्टी में जिंक की कमी है तो यूरिया के साथ जिंक का इस्तेमाल कृषि सलाह के अनुसार किया जा सकता है, लेकिन हर खेत में एक जैसी मात्रा लागू करना सही नहीं होगा। आखिरकार मजबूत और अच्छी पैदावार वाली धान की फसल के लिए खाद की मात्रा से ज्यादा महत्वपूर्ण है उसका सही समय, सही पोषक तत्व और सही मात्रा में इस्तेमाल।

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