खेती में फसल को सही मात्रा में नाइट्रोजन, फास्फोरस और जिंक मिलना बेहद जरूरी है। नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और नैनो जिंक जैसे उत्पादों का इस्तेमाल अब कई किसान पत्तियों पर छिड़काव के रूप में कर रहे हैं। लेकिन इनका फायदा केवल बोतल खरीदकर छिड़काव करने से नहीं मिलता, बल्कि सही फसल अवस्था, सही मात्रा, साफ पानी और उचित स्प्रे तकनीक का ध्यान रखना जरूरी है।
खास बात यह है कि नैनो खाद पारंपरिक यूरिया, डीएपी या जिंक का हर स्थिति में सीधा और पूरा विकल्प नहीं मानी जानी चाहिए। फसल की जरूरत, मिट्टी की स्थिति और उत्पाद के लेबल पर दी गई सिफारिश के अनुसार इनका उपयोग करना ज्यादा सुरक्षित और प्रभावी तरीका है।
नैनो यूरिया का सही इस्तेमाल कैसे करें
नैनो यूरिया मुख्य रूप से पत्तियों पर छिड़काव के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य खड़ी फसल में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाना है। वर्तमान नैनो यूरिया प्लस की अनुशंसित सामान्य मात्रा 2 से 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी बताई गई है। फसल की अवस्था और नाइट्रोजन की जरूरत के अनुसार मात्रा तय की जाती है।
अनाज वाली फसलों में पहला छिड़काव सामान्यतः अच्छी पत्तियों और कल्ले निकलने की अवस्था में किया जाता है। दूसरा छिड़काव पहली बार के करीब 20 से 25 दिन बाद या फूल आने से पहले किया जा सकता है। अधिक नाइट्रोजन की जरूरत वाली लंबी अवधि की फसल में अतिरिक्त छिड़काव की आवश्यकता हो सकती है।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नैनो यूरिया का छिड़काव करने के नाम पर बेसल खाद की पूरी मात्रा अचानक बंद नहीं करनी चाहिए। विशेष रूप से बुवाई या रोपाई के समय दी जाने वाली नाइट्रोजन, फास्फोरस और अन्य पोषक तत्वों की मात्रा फसल की अनुशंसित पोषक प्रबंधन योजना के अनुसार ही रखनी चाहिए। नैनो यूरिया का उपयोग मुख्य रूप से ऊपर से दी जाने वाली नाइट्रोजन की जरूरत को बेहतर तरीके से पूरा करने के लिए किया जाता है।
नैनो डीएपी का प्रयोग कब और कितनी मात्रा में करें
नैनो डीएपी से फसल को नाइट्रोजन और फास्फोरस मिलता है। इसका प्रयोग बीज उपचार, पौध की जड़ या कंद उपचार और पत्तियों पर छिड़काव के रूप में किया जा सकता है। फोलियर स्प्रे के लिए सामान्य अनुशंसा 2 से 4 मिलीलीटर नैनो डीएपी प्रति लीटर पानी है।
बीज उपचार में सामान्यतः 3 से 5 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीज की मात्रा बताई गई है। उपचार के लिए नैनो डीएपी को आवश्यक पानी में मिलाकर बीज पर पतली परत के रूप में लगाया जाता है और कुछ समय छाया में सुखाने के बाद बुवाई की जाती है। रोपाई वाली फसलों में पौध की जड़ों को निर्धारित घोल में उपचारित करने का विकल्प भी उपलब्ध है।
खड़ी फसल में पहला पत्तियों का छिड़काव अच्छी पत्ती वृद्धि, कल्ले निकलने या शाखाएं बनने की अवस्था में किया जाता है। लंबी अवधि और अधिक फास्फोरस की जरूरत वाली फसल में फूल आने से पहले दूसरा छिड़काव किया जा सकता है।
नैनो डीएपी को मिट्टी में सामान्य डीएपी की तरह डालना या बिना उत्पाद की अनुशंसा के ड्रिप से देना सही तरीका नहीं है। जिस उत्पाद के लेबल पर जिस विधि और मात्रा की सिफारिश हो, उसी के अनुसार प्रयोग करना चाहिए।
नैनो जिंक में सबसे जरूरी है सही मात्रा
जिंक फसल के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है। इसकी कमी होने पर पौधों की बढ़वार और उपज प्रभावित हो सकती है। धान जैसी फसलों में जिंक की कमी के लक्षण रोपाई के कुछ समय बाद दिखाई दे सकते हैं और ऐसी स्थिति में जिंक प्रबंधन महत्वपूर्ण हो जाता है।
नैनो जिंक की मात्रा को नैनो यूरिया या नैनो डीएपी की तरह सभी उत्पादों के लिए एक समान नहीं माना जा सकता। अलग-अलग उत्पादों में जिंक की सांद्रता और फॉर्मुलेशन अलग हो सकता है। इसलिए बोतल पर लिखी मात्रा को देखकर ही पानी में मिलाना चाहिए। उदाहरण के तौर पर कुछ शोधों में नैनो जिंक ऑक्साइड का 0.1 प्रतिशत फोलियर स्प्रे इस्तेमाल किया गया है, जबकि कुछ तरल नैनो जिंक उत्पादों के परीक्षण में अलग मात्रा का उपयोग हुआ है।
यदि खेत में जिंक की वास्तविक कमी है तो केवल नैनो जिंक पर निर्भर रहने के बजाय मिट्टी की जांच और फसल की स्थिति के आधार पर जिंक की उपयुक्त विधि चुनना बेहतर होता है। कुछ फसलों में मिट्टी में जिंक सल्फेट देना प्रभावी पाया गया है, जबकि पत्तियों पर जिंक का छिड़काव भी कमी सुधारने में उपयोगी हो सकता है।
नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और नैनो जिंक का स्प्रे कैसे करें
इन उत्पादों से अधिक लाभ लेने के लिए केवल मात्रा ही नहीं, बल्कि छिड़काव की गुणवत्ता भी महत्वपूर्ण है। पत्तियों पर घोल की समान परत पड़नी चाहिए और तेज धूप, तेज हवा या बारिश की संभावना के समय छिड़काव से बचना चाहिए।
छिड़काव के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें। बहुत ज्यादा पानी लेकर घोल को अत्यधिक पतला करने या कम पानी में बहुत अधिक उत्पाद डालने से बचना चाहिए। फ्लैट फैन या कट नोजल जैसे उपयुक्त नोजल से पत्तियों पर समान छिड़काव करना बेहतर रहता है।
व्यावहारिक रूप से किसान को इन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- नैनो यूरिया प्लस का सामान्य फोलियर डोज 2 से 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी है, जबकि सही मात्रा फसल और उसकी अवस्था के अनुसार तय की जानी चाहिए।
- नैनो डीएपी का फोलियर डोज सामान्यतः 2 से 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी है और इसे अच्छी पत्ती वृद्धि या कल्ले तथा शाखा बनने की अवस्था में दिया जाता है।
- नैनो जिंक की मात्रा हमेशा उसके उत्पाद में मौजूद जिंक की सांद्रता और लेबल पर दी गई सिफारिश के अनुसार रखें।
- छिड़काव सुबह या शाम के समय करें और बारिश की संभावना होने पर स्प्रे टालें।
तीनों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करना सही है या नहीं
यह सबसे महत्वपूर्ण सावधानियों में से एक है। केवल इसलिए कि नैनो यूरिया और नैनो डीएपी दोनों पत्तियों पर छिड़के जाते हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि हर नैनो जिंक उत्पाद के साथ तीनों को एक ही टंकी में मिलाना सुरक्षित होगा।
नैनो यूरिया प्लस के लिए नैनो डीएपी के साथ अनुकूलता बताई गई है, लेकिन अलग-अलग कृषि रसायनों और पोषक उत्पादों को मिलाने से पहले जार टेस्ट करने की सलाह दी जाती है। नैनो जिंक के मामले में भी उत्पाद की लेबल सिफारिश देखना जरूरी है। यदि किसी मिश्रण की स्पष्ट अनुशंसा नहीं दी गई है, तो तीनों उत्पादों को एक साथ मिलाकर छिड़काव करने की बजाय अलग-अलग छिड़काव करना अधिक सावधानी वाला तरीका है।
मिश्रण करना जरूरी हो तो पहले थोड़ी मात्रा में पानी लेकर छोटा जार टेस्ट किया जा सकता है। घोल में तलछट, गांठ, परत अलग होना या अत्यधिक झाग बनने जैसी समस्या दिखाई दे तो उस मिश्रण का खेत में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
बारिश और मौसम का भी रखें ध्यान
नैनो उर्वरकों का फोलियर स्प्रे पत्तियों पर निर्भर करता है, इसलिए छिड़काव के तुरंत बाद बारिश होने पर उत्पाद का प्रभाव कम हो सकता है। नैनो यूरिया और नैनो डीएपी की अनुशंसाओं में छिड़काव के बाद कुछ घंटों तक बारिश न होने की स्थिति को महत्व दिया गया है।
तेज धूप के समय छिड़काव करने से भी बचना चाहिए। सुबह या शाम का समय सामान्यतः पत्तियों पर फोलियर स्प्रे के लिए अधिक उपयुक्त रहता है। हालांकि बहुत अधिक ओस होने पर भी छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि पानी की अतिरिक्त परत घोल की एकाग्रता और पत्तियों पर उसके फैलाव को प्रभावित कर सकती है।
तेज हवा में स्प्रे करने पर दवा या पोषक घोल फसल की पत्तियों पर समान रूप से नहीं पहुंचता। इससे एक तरफ उत्पाद की बर्बादी हो सकती है और दूसरी तरफ फसल के कुछ हिस्से को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।
नैनो खाद से अधिक लाभ लेने का सही तरीका
नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और नैनो जिंक का बेहतर परिणाम तभी मिल सकता है जब इन्हें फसल की वास्तविक पोषण जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जाए। किसी खेत में नाइट्रोजन की कमी है तो नैनो यूरिया उपयोगी हो सकता है, जबकि फास्फोरस की जरूरत वाली अवस्था में नैनो डीएपी का प्रयोग किया जा सकता है। इसी तरह जिंक की कमी होने पर उचित जिंक प्रबंधन जरूरी है।
मिट्टी की जांच उपलब्ध हो तो उसके आधार पर खाद और सूक्ष्म पोषक तत्वों की योजना बनाना सबसे बेहतर तरीका है। बिना कमी जाने लगातार माइक्रोन्यूट्रिएंट का छिड़काव करने से जरूरी नहीं कि फायदा बढ़ता जाए। पोषक तत्वों की मात्रा हमेशा फसल, मिट्टी, मौसम और विकास अवस्था के अनुसार संतुलित रखनी चाहिए।
सबसे अहम बात यह है कि किसान केवल नैनो उत्पाद की बोतल पर निर्भर होकर पारंपरिक खाद की सभी मात्रा बंद न करे। फसल की पोषण योजना में मिट्टी से मिलने वाले पोषक तत्व, जैविक खाद, बेसल उर्वरक और जरूरत के अनुसार टॉप ड्रेसिंग सभी का संतुलित इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।
निष्कर्ष
नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और नैनो जिंक का सही इस्तेमाल करने का मतलब केवल निर्धारित मात्रा पानी में मिलाकर छिड़काव करना नहीं है। सही फसल अवस्था, सही सांद्रता, साफ पानी, समान पत्तियों पर कवरेज और अनुकूल मौसम इन उत्पादों के प्रभाव को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
नैनो यूरिया और नैनो डीएपी के फोलियर स्प्रे के लिए सामान्यतः 2 से 4 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की मात्रा बताई जाती है, जबकि नैनो जिंक की मात्रा उत्पाद की सांद्रता के अनुसार बदल सकती है। इसलिए जिंक में एक ही मात्रा सभी ब्रांडों पर लागू करना सही नहीं है। किसान यदि फसल की जरूरत को समझकर, मिट्टी की स्थिति को ध्यान में रखकर और उत्पाद के लेबल के अनुसार इनका इस्तेमाल करता है, तो अनावश्यक खर्च और गलत छिड़काव से बचते हुए पोषक तत्व प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।