किसानों के लिए कृषि यंत्रों पर सरकारी सब्सिडी खेती की लागत कम करने और आधुनिक मशीनों को अपनाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी योजनाओं के तहत किसानों और किसान समूहों को अलग-अलग कृषि मशीनों की खरीद या मशीनों को किराये पर उपलब्ध कराने वाली व्यवस्था के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है। केंद्र सरकार की Sub-Mission on Agricultural Mechanization यानी SMAM योजना राज्यों के माध्यम से लागू की जाती है।
बिहार में कृषि विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कृषि यंत्रीकरण से संबंधित आवेदन प्रक्रिया शुरू की है। राज्य के आधिकारिक OFMAS पोर्टल पर SMAM, Custom Hiring Center और Farm Machinery Bank सहित विभिन्न श्रेणियों के लिए आवेदन खुले होने की जानकारी दी गई है।
कृषि यंत्रों पर कितनी सब्सिडी मिल सकती है?
सब्सिडी की दर सभी किसानों और सभी मशीनों के लिए एक जैसी नहीं होती। यह किसान की श्रेणी, मशीन, योजना और लागू अधिकतम सीमा के आधार पर निर्धारित होती है।
केंद्र सरकार की SMAM व्यवस्था में व्यक्तिगत किसानों को कृषि मशीनों की खरीद पर सामान्यतः मशीन की लागत का 40 से 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है। वहीं Farm Machinery Banks और Custom Hiring Centers के लिए अलग सहायता दर लागू होती है।
बिहार के 2026-27 के आधिकारिक OFMAS पोर्टल पर SMAM-FMB के लिए 80 प्रतिशत तक और SMAM-CHC के लिए 40 प्रतिशत तक सहायता की दर दिखाई गई है। Special Custom Hiring Center में ट्रैक्टर के लिए 40 प्रतिशत और अन्य मशीनों के लिए 80 प्रतिशत तक सहायता का उल्लेख है।
| योजना/श्रेणी | उपलब्ध सहायता |
|---|---|
| SMAM-CHC | 40% तक, अधिकतम ₹4 लाख |
| SMAM-FMB | 80% तक, अधिकतम ₹8 लाख |
| SMAM-SCHC में ट्रैक्टर | 40% तक, अधिकतम ₹3.40 लाख |
| SMAM-SCHC में अन्य मशीनें | 80% तक |
| SCHC की कुल अधिकतम सहायता | ₹12 लाख तक |
ये सीमाएं बिहार के 2026-27 के आधिकारिक OFMAS विवरण के अनुसार हैं। दूसरे राज्यों में नियम, मशीनों की सूची, अधिकतम अनुदान और आवेदन प्रक्रिया अलग हो सकती है।
86 कृषि यंत्रों की बात क्या है?
कृषि यंत्रीकरण योजनाओं में बड़ी संख्या में कृषि मशीनों और उपकरणों को शामिल किया जाता है। इनमें खेत की तैयारी, बुवाई, रोपाई, सिंचाई, फसल सुरक्षा, कटाई और फसल के बाद होने वाले कार्यों से संबंधित मशीनें शामिल हो सकती हैं।
बिहार के OFMAS पोर्टल पर अलग-अलग कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के लिए स्वीकृत मशीनों और मॉडल की व्यवस्था दी गई है। पोर्टल पर वर्तमान में 86 निर्माताओं और कुल 381 इम्प्लीमेंट्स का रिकॉर्ड भी प्रदर्शित हो रहा है। इसलिए “86 कृषि यंत्र” और “86 निर्माता” को एक ही संख्या समझना सही नहीं होगा।
किसान किन कामों के लिए कृषि यंत्र ले सकते हैं?
कृषि मशीनों का उपयोग खेती के अलग-अलग चरणों में किया जाता है। उदाहरण के तौर पर सुपर सीडर, रोटरी टिलर, धान प्रत्यारोपण मशीन और आलू प्लांटर जैसे उपकरण कृषि कार्यों को अधिक मशीन आधारित बनाने में मदद करते हैं। बिहार के आधिकारिक कृषि यंत्रीकरण पोर्टल पर ऐसे उपकरणों को प्रदर्शित किया गया है।
- खेत की तैयारी और जुताई के काम में मशीनों का इस्तेमाल।
- फसल की बुवाई और रोपाई को आसान बनाने वाले उपकरण।
- फसल सुरक्षा तथा कृषि उत्पादों के छिड़काव से जुड़े उपकरण।
- कटाई और फसल के बाद होने वाले कार्यों के लिए मशीनें।
किसान सब्सिडी का लाभ कैसे उठा सकते हैं?
सब्सिडी लेने के लिए सबसे पहले किसान को अपने राज्य में लागू कृषि यंत्रीकरण योजना की पात्रता और आवेदन अवधि देखनी चाहिए। बिहार में इसके लिए कृषि विभाग का OFMAS पोर्टल इस्तेमाल किया जा रहा है। पोर्टल पर किसान कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं और अपने आवेदन की स्थिति भी देख सकते हैं।
2026-27 के लिए बिहार के OFMAS पोर्टल पर Farmer Application की अवधि 8 सितंबर 2026 से 30 सितंबर 2026 तक दिखाई गई है। इसी अवधि में Farm Machinery Bank और Custom Hiring Center से जुड़े कुछ आवेदन भी खुले हैं।
आवेदन से पहले इन बातों का रखें ध्यान
किसान को केवल सब्सिडी की प्रतिशत दर देखकर मशीन खरीदने का फैसला नहीं करना चाहिए। पहले यह देखना जरूरी है कि संबंधित मशीन योजना में शामिल है या नहीं, किसान उस श्रेणी के लिए पात्र है या नहीं और अनुदान की अधिकतम सीमा कितनी है।
कृषि यंत्र खरीदने से पहले विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और अधिकृत निर्माता या डीलर की जानकारी भी जांचनी चाहिए। हरियाणा की 2026-27 SMAM प्रक्रिया में चयनित किसानों को पहले परमिट डाउनलोड करने और उसके बाद निर्धारित मशीन खरीदने के निर्देश दिए गए थे। इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्यों में खरीद से पहले विभागीय अनुमति या परमिट जैसी शर्तें लागू हो सकती हैं।
केंद्र सरकार की SMAM योजना क्या है?
Sub-Mission on Agricultural Mechanization यानी SMAM केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसे राज्य सरकारों के माध्यम से लागू किया जाता है। इसका उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों तक कृषि मशीनों की पहुंच बढ़ाना और Custom Hiring Centers के माध्यम से मशीनों को किराये पर उपलब्ध कराना है।
इस योजना के तहत Farm Machinery Banks को भी सहायता दी जाती है। केंद्र सरकार के अनुसार FMB परियोजनाओं के लिए सामान्य राज्यों में परियोजना लागत का 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता का प्रावधान है, जबकि उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए यह दर 95 प्रतिशत तक हो सकती है।
क्या हर किसान को 80% सब्सिडी मिलेगी?
नहीं। 80 प्रतिशत सब्सिडी को हर किसान के लिए सामान्य दर समझना सही नहीं है। सहायता प्रतिशत योजना और लाभार्थी श्रेणी के अनुसार बदलता है।
उदाहरण के लिए, बिहार के 2026-27 OFMAS विवरण में SMAM-FMB के लिए 80 प्रतिशत तक सहायता दी गई है, जबकि SMAM-CHC के लिए 40 प्रतिशत तक की सहायता बताई गई है। व्यक्तिगत किसान के लिए लागू सहायता संबंधित मशीन और पात्रता के अनुसार तय होगी।
आवेदन कहां करें?
बिहार के किसान कृषि यंत्रीकरण योजना के लिए कृषि विभाग के आधिकारिक OFMAS पोर्टल पर आवेदन और आवेदन की स्थिति से संबंधित जानकारी देख सकते हैं। पोर्टल पर 2026-27 की योजनाएं और वर्तमान आवेदन अवधि उपलब्ध है।
अन्य राज्यों के किसान अपने राज्य के कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर लागू कृषि यंत्रीकरण योजना की जानकारी देखें, क्योंकि सब्सिडी की दर, मशीनों की सूची, आवेदन की तारीख और पात्रता राज्य के अनुसार अलग हो सकती है।
कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी किसानों के लिए खेती में आधुनिक मशीनों को अपनाने का अवसर देती है। 2026-27 में बिहार के आधिकारिक पोर्टल पर कृषि यंत्रीकरण योजनाओं के लिए आवेदन खुले हैं और अलग-अलग श्रेणियों में 40 से 80 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान दिखाई देता है।
हालांकि, 40 से 80 प्रतिशत की दर हर किसान और हर कृषि यंत्र पर लागू नहीं होती। किसान को आवेदन करने से पहले अपनी श्रेणी, संबंधित मशीन, अधिकतम अनुदान सीमा और विभागीय नियमों की जांच करनी चाहिए। इस तरह आवेदन करने पर सब्सिडी प्रक्रिया में गलती की संभावना कम की जा सकती है।