खेती में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल भारत में तेजी से बढ़ रहा है। अब ड्रोन केवल खेतों में दवा छिड़कने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कृषि सेवाओं, फसल निगरानी और आधुनिक खेती से जुड़े कारोबार का हिस्सा भी बन रहे हैं। हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्य में किसानों और कृषि उद्यमियों के बीच इस तकनीक को लेकर रुचि लगातार बढ़ी है।
हालांकि, हरियाणा के जितेंद्र कुमार के बारे में यह दावा कि उन्होंने ₹1.5 लाख की नौकरी छोड़कर ड्रोन फार्मिंग के जरिए ₹3 करोड़ का कारोबार खड़ा किया, उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों से स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सका है। इसलिए इस दावे को पुष्ट तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।
खेती में क्यों बढ़ रहा है ड्रोन का इस्तेमाल?
कृषि ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से खेतों में तरल उर्वरक, कीटनाशक और अन्य कृषि इनपुट के छिड़काव के लिए किया जा रहा है। ड्रोन कम समय में बड़े क्षेत्र में काम कर सकते हैं और ऐसे खेतों में भी उपयोगी हो सकते हैं जहां पारंपरिक तरीके से छिड़काव करना मुश्किल होता है।
हरियाणा में भी कृषि क्षेत्र में ड्रोन के इस्तेमाल के उदाहरण सामने आए हैं। राज्य में ड्रोन का इस्तेमाल फसल संबंधी कामों के साथ-साथ भूमि मैपिंग और अन्य तकनीकी गतिविधियों में भी किया जा रहा है।
ड्रोन से खेती में कौन-कौन से काम किए जा सकते हैं?
कृषि ड्रोन का उपयोग कई तरह की सेवाओं के लिए किया जा सकता है। इनमें सबसे प्रमुख काम खेतों में तरल कृषि उत्पादों का छिड़काव है।
- फसलों में कीटनाशक और अन्य तरल कृषि उत्पादों का छिड़काव
- बड़े खेतों में कम समय में स्प्रे करने में मदद
- फसल की स्थिति और संभावित नुकसान की निगरानी
- आधुनिक और सटीक खेती से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध कराना
ड्रोन के इस्तेमाल से पानी, श्रम और समय की बचत की संभावना रहती है, हालांकि वास्तविक लाभ फसल, खेत की स्थिति, ड्रोन की क्षमता और इस्तेमाल की तकनीक पर निर्भर करता है।
ड्रोन फार्मिंग से कैसे बन सकता है कारोबार?
कृषि ड्रोन को केवल खेती के उपकरण के रूप में नहीं, बल्कि सर्विस बिजनेस के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें ड्रोन मालिक या प्रशिक्षित ऑपरेटर किसानों के खेतों में निर्धारित सेवा के बदले शुल्क लेकर छिड़काव जैसी सेवाएं प्रदान कर सकते हैं।
केंद्र सरकार ने भी कृषि में ड्रोन और अन्य नई तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों के तहत वित्तीय सहायता का प्रावधान किया है। कृषि मंत्रालय के अनुसार, कुछ श्रेणियों के संस्थानों को ड्रोन की खरीद और प्रदर्शन के लिए सहायता दी जाती है। FPOs को Kisan Drone के प्रदर्शन के लिए सहायता और Custom Hiring Centres तथा कुछ कृषि उद्यमियों के लिए ड्रोन खरीद पर निर्धारित वित्तीय सहायता का प्रावधान है।
Namo Drone Didi योजना से भी बढ़ा अवसर
कृषि ड्रोन को ग्रामीण आय और रोजगार से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार ने Namo Drone Didi योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि ड्रोन उपलब्ध कराकर उन्हें किसानों को ड्रोन सेवाएं देने वाले उद्यम के रूप में विकसित करना है।
केंद्र सरकार के अनुसार योजना के तहत 2023-24 से 2025-26 की अवधि में 15,000 ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था। इसका उद्देश्य कृषि में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के साथ ग्रामीण महिलाओं की आय के अवसर बढ़ाना था।
क्या हर ड्रोन कारोबार ₹3 करोड़ तक पहुंच सकता है?
ऐसा कहना सही नहीं होगा। ड्रोन से कृषि सेवा कारोबार की कमाई कई बातों पर निर्भर करती है, जैसे कितने किसानों को सेवा दी जा रही है, कितने एकड़ में काम मिलता है, प्रति एकड़ सेवा शुल्क कितना है, ड्रोन और बैटरी की लागत क्या है तथा ऑपरेटर और रखरखाव पर कितना खर्च आता है।
इसलिए किसी एक व्यक्ति की बताई गई कारोबार राशि को सभी लोगों के लिए संभावित कमाई मानना सही नहीं है। जितेंद्र कुमार से जुड़ा ₹3 करोड़ का आंकड़ा भी उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित नहीं हुआ है।
कृषि ड्रोन के लिए प्रशिक्षण भी जरूरी
ड्रोन का व्यावसायिक इस्तेमाल केवल मशीन खरीदने से शुरू नहीं हो जाता। ड्रोन संचालन, कृषि उपयोग और लागू नियमों की जानकारी जरूरी होती है। केंद्र सरकार के अनुसार Farm Machinery Training and Testing Institutes किसानों, तकनीशियनों, इंजीनियरों और अन्य लोगों को कृषि मशीनरी तथा Kisan Drone से संबंधित प्रशिक्षण देते हैं। हरियाणा के हिसार में भी ऐसा प्रशिक्षण संस्थान मौजूद है।
किसानों के लिए इसका क्या फायदा है?
यदि कृषि ड्रोन की सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होती हैं, तो किसानों को खेतों में छिड़काव के लिए एक आधुनिक विकल्प मिल सकता है। खासकर बड़े क्षेत्र या ऐसी फसलों में जहां पारंपरिक स्प्रे करना कठिन होता है, ड्रोन सेवा उपयोगी हो सकती है।
ड्रोन तकनीक का उद्देश्य पारंपरिक खेती को पूरी तरह बदलना नहीं है। इसका इस्तेमाल खेती की जरूरत के अनुसार एक अतिरिक्त तकनीकी साधन के रूप में किया जा सकता है।
ड्रोन फार्मिंग भारत में कृषि क्षेत्र के नए कारोबार और तकनीकी अवसरों में से एक बन रही है। केंद्र सरकार कृषि ड्रोन, Custom Hiring Centres, FPOs और Namo Drone Didi जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से इसके इस्तेमाल को बढ़ावा दे रही है।
हरियाणा में भी कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल के उदाहरण मौजूद हैं। हालांकि, “₹1.5 लाख की नौकरी से ₹3 करोड़ के कारोबार” वाली जितेंद्र कुमार की व्यक्तिगत कहानी को उपलब्ध विश्वसनीय स्रोतों से सत्यापित नहीं किया जा सका है। इसलिए इस दावे को पुष्ट सफलता-कहानी के रूप में पेश करने के बजाय, ड्रोन फार्मिंग के वास्तविक और सत्यापित अवसरों पर ध्यान देना अधिक उचित है।