धान में बालियां निकलते समय बेस्ट स्प्रे |dhan me bali nikalte samay kya dale/ dhan me spray kab kare

धान की फसल में बालियां निकलने का समय उत्पादन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस अवस्था में पौधे की पोषण जरूरत, खेत में नमी और कीट-रोगों की स्थिति पर विशेष ध्यान देना जरूरी होता है।

बालियां निकलते समय बिना जरूरत कोई भी दवा या खाद का स्प्रे करना सही तरीका नहीं है। फसल की वास्तविक स्थिति देखकर ही पोषक तत्व या कीटनाशक का चुनाव करना चाहिए।

धान में बालियां निकलते समय क्या डालें

धान में बालियां निकलने के आसपास की अवस्था को पैनिकल इनिशिएशन और हेडिंग की प्रक्रिया से जोड़कर देखा जाता है। इस समय पौधे की ऊर्जा बालियों और आगे बनने वाले दानों की ओर जाती है। इसलिए खेत में पोषक तत्वों की कमी नहीं होनी चाहिए।

इस अवस्था में सबसे पहले यह देखना जरूरी है कि फसल में किसी पोषक तत्व की कमी के लक्षण तो नहीं हैं। विशेष रूप से जिंक जैसी सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी धान की वृद्धि और उत्पादन को प्रभावित कर सकती है। पोषक तत्वों का उपयोग मिट्टी की स्थिति और फसल की आवश्यकता के अनुसार करना अधिक उचित है।

यदि खेत में पहले से संतुलित पोषण दिया गया है और फसल स्वस्थ है, तो केवल बालियां निकलने लगी हैं इसलिए अतिरिक्त खाद का स्प्रे करना जरूरी नहीं माना जाना चाहिए।

बालियां निकलते समय स्प्रे कब करें

धान में स्प्रे का सही समय इस बात पर निर्भर करता है कि स्प्रे किस उद्देश्य से किया जा रहा है। पोषक तत्वों का छिड़काव और कीट-रोग नियंत्रण के लिए किया जाने वाला छिड़काव एक जैसा नहीं होता।

यदि खेत में कीट या रोग के लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो पहले उनकी पहचान करना जरूरी है। केवल बालियां निकलने की अवस्था देखकर कीटनाशक या फफूंदनाशक का छिड़काव करना उचित नहीं है। धान में तना छेदक, पत्ती लपेटक और अन्य कीटों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी जाती है।

स्प्रे के लिए शांत मौसम चुनना चाहिए। तेज हवा, तेज धूप या बारिश की संभावना के दौरान छिड़काव करने से दवा का प्रभाव कम हो सकता है। फूल आने के समय मधुमक्खियों और अन्य लाभकारी कीटों की मौजूदगी को ध्यान में रखना भी जरूरी है।

पोटाश, जिंक और अन्य पोषक तत्वों का क्या करें

बालियां निकलने के समय किसान अक्सर पोटाश, जिंक, बोरॉन या अलग-अलग माइक्रोन्यूट्रिएंट का स्प्रे करने की सलाह सुनते हैं। लेकिन हर खेत में इन सभी पोषक तत्वों की आवश्यकता एक जैसी नहीं होती।

संतुलित उर्वरक प्रबंधन में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश के साथ आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों की जरूरत को भी ध्यान में रखा जाता है। हाल की कृषि सलाह में भी मिट्टी की जांच और फसल की जरूरत के आधार पर पोषक तत्व देने पर जोर दिया गया है।

धान में जिंक की कमी होने पर सुधार के उपाय किए जा सकते हैं, लेकिन केवल अनुमान के आधार पर अधिक मात्रा में जिंक डालना सही नहीं है। जिंक की कमी की पहचान और खेत की पोषक स्थिति के आधार पर निर्णय लेना बेहतर रहता है।

इसलिए बालियां निकलते समय किसी एक निश्चित “बेस्ट स्प्रे” को हर धान के खेत के लिए समान रूप से लागू करना वैज्ञानिक तरीका नहीं होगा।

कीट और रोग दिखाई दें तो क्या ध्यान रखें

बालियां निकलने और फूल आने के आसपास फसल की नियमित निगरानी बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि तना छेदक, पत्ती लपेटक, ब्राउन प्लांट हॉपर या किसी रोग के स्पष्ट लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसी समस्या के अनुसार नियंत्रण उपाय चुनना चाहिए। कृषि सलाह में भी धान की फसल को नियमित रूप से देखने और कीटों की स्थिति के आधार पर कार्रवाई करने की बात कही गई है।

  • खेत में बालियों और ऊपरी पत्तियों को नियमित रूप से देखें।
  • कीट या रोग की पहचान किए बिना दवा का छिड़काव न करें।
  • जिस कीट या रोग के लिए दवा इस्तेमाल की जा रही है, उसके लिए अनुशंसित उत्पाद और लेबल पर दी गई मात्रा का पालन करें।
  • एक साथ कई दवाओं या पोषक तत्वों को मिलाकर छिड़काव करने से पहले उनकी अनुकूलता और अनुशंसित उपयोग की जांच करें।

खास तौर पर कीटनाशक का चुनाव केवल फसल की अवस्था के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। खेत में कीट की वास्तविक मौजूदगी और नुकसान का स्तर देखकर ही नियंत्रण की जरूरत तय करना अधिक सुरक्षित और किफायती तरीका है।

बालियां निकलते समय खेत में नमी का रखें ध्यान

बालियां निकलने, फूल आने और दाना भरने की अवधि धान के लिए महत्वपूर्ण होती है। इस समय खेत में पानी की स्थिति पर लगातार नजर रखना जरूरी है। ICAR की खरीफ कृषि सलाह में भी फूल आने और दाना भरने जैसी महत्वपूर्ण अवस्थाओं में फसल में पर्याप्त नमी बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर समय खेत में बहुत अधिक पानी खड़ा रखा जाए। जरूरत से ज्यादा पानी और लंबे समय तक जलभराव भी उचित नहीं है। सिंचाई का निर्णय मिट्टी, मौसम और खेत की स्थिति को देखकर करना चाहिए।

सबसे जरूरी बात, बिना जरूरत न करें स्प्रे

धान में बालियां निकलते समय “बेस्ट स्प्रे” का चुनाव फसल की स्थिति पर निर्भर करता है। यदि फसल स्वस्थ है, पोषण पर्याप्त है और कोई कीट या रोग दिखाई नहीं दे रहा है, तो केवल बालियां निकलने के कारण कई तरह की दवाओं का मिश्रण छिड़कना जरूरी नहीं है।

वहीं यदि पोषक तत्व की कमी दिखाई देती है तो उसी कमी को दूर करने के लिए उपयुक्त पोषक तत्व का इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इसी तरह कीट या रोग मिलने पर उसकी सही पहचान के बाद अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाना बेहतर रहता है।

निष्कर्ष

धान में बालियां निकलते समय फसल को अच्छी उपज के लिए संतुलित पोषण, पर्याप्त नमी और कीट-रोगों की नियमित निगरानी की जरूरत होती है। इस अवस्था में कोई एक स्प्रे ऐसा नहीं है जिसे हर खेत के लिए “बेस्ट” कहा जा सके। खेत की स्थिति के अनुसार ही जिंक, पोटाश या अन्य पोषक तत्वों तथा कीटनाशक या फफूंदनाशक का इस्तेमाल करना चाहिए।

किसानों के लिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि बालियां निकलने के समय पहले फसल को ध्यान से देखें, कमी या समस्या की पहचान करें और उसके बाद ही स्प्रे का निर्णय लें। इससे अनावश्यक दवा और खाद का खर्च कम करने के साथ फसल में संतुलित पोषण और बेहतर प्रबंधन बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

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