सोयाबीन की नई किस्मों को लेकर किसानों में NRC 268 और NRC 292 की काफी चर्चा है। दोनों नाम एक ही फसल की अलग-अलग उन्नत सामग्री से जुड़े हैं, लेकिन इनके परीक्षण और दर्ज विशेषताओं में अंतर है।
ऐसे में केवल नाम या खेत में दिखाई देने वाली फसल के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि हर किसान के लिए एक ही किस्म सबसे अच्छी है। उपलब्ध कृषि परीक्षणों के आधार पर दोनों को अलग-अलग नजरिए से समझना जरूरी है।
NRC 268 की खास पहचान क्या है
NRC 268 सोयाबीन की ऐसी उन्नत सामग्री है जिस पर भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान में खाद्य गुणवत्ता से जुड़े गुणों के लिए भी काम किया गया है। संस्थागत शोध रिकॉर्ड में NRC 268 को लिपोक्सीजिनेज-2 मुक्त जीनोटाइप के रूप में दर्ज किया गया है और इसे प्रारंभिक किस्म परीक्षण में शामिल किया गया था।
इसके अलावा 2024-25 के अखिल भारतीय सोयाबीन अनुसंधान परीक्षणों में NRC 268 ने मध्य क्षेत्र में 2624 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अनाज उपज दर्ज की। इसी परीक्षण में यह संबंधित श्रेष्ठ जांच किस्म की तुलना में 21 प्रतिशत अधिक रही। यह आंकड़ा परीक्षण परिस्थितियों का है, इसलिए इसे हर खेत में मिलने वाली निश्चित उपज नहीं माना जाना चाहिए।
NRC 268 पर किए गए एक अलग क्षेत्रीय अध्ययन में तना मक्खी और गर्डल बीटल के प्रकोप के संदर्भ में भी इसका प्रदर्शन देखा गया। उस अध्ययन में NRC 268 में इन कीटों का प्रकोप कई परीक्षण किस्मों की तुलना में कम पाया गया। हालांकि खेत की स्थिति, मौसम और कीट दबाव के अनुसार वास्तविक परिणाम बदल सकते हैं।
NRC 292 में क्या खास देखने को मिला
NRC 292 अपेक्षाकृत नई उन्नत सोयाबीन सामग्री के रूप में सामने आई है और इसके प्रदर्शन से जुड़े आंकड़े अखिल भारतीय परीक्षणों में दर्ज हुए हैं। 2024-25 के मध्य क्षेत्र के परीक्षण में NRC 292 ने 2695 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अनाज उपज दर्ज की।
इसी परीक्षण में संबंधित श्रेष्ठ जांच किस्म की उपज 1986 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई और NRC 292 की श्रेष्ठता 36 प्रतिशत बताई गई। यह परीक्षण आंकड़ा NRC 292 को उत्पादन क्षमता के लिहाज से ध्यान देने योग्य बनाता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। परीक्षण में अधिक उपज का मतलब यह नहीं है कि हर किसान के खेत में उतनी ही उपज मिलेगी। मिट्टी, वर्षा, बोने का समय, पौधों की संख्या, पोषण, खरपतवार और रोग-कीट प्रबंधन का परिणाम पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
NRC 268 और NRC 292 में कौन आगे
अगर केवल उपलब्ध 2024-25 के मध्य क्षेत्र के परीक्षण आंकड़ों को आधार बनाया जाए, तो अनाज उपज के मामले में NRC 292 का प्रदर्शन NRC 268 से अधिक रहा। NRC 292 ने 2695 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, जबकि NRC 268 ने 2624 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज किया।
हालांकि दोनों के आंकड़े एक ही तरह से सीधे खेत की परिस्थितियों का प्रतिनिधित्व नहीं करते, इसलिए सिर्फ इन दो संख्याओं के आधार पर हर इलाके के लिए अंतिम फैसला करना उचित नहीं होगा।
दोनों की तुलना को सरल तरीके से ऐसे समझ सकते हैं:
- NRC 292 ने 2024-25 के मध्य क्षेत्रीय परीक्षण में 2695 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अनाज उपज दर्ज की।
- NRC 268 ने उसी रिपोर्ट में 2624 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर अनाज उपज दर्ज की।
- NRC 292 का संबंधित श्रेष्ठ जांच किस्म के मुकाबले 36 प्रतिशत श्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज हुआ।
- NRC 268 का संबंधित श्रेष्ठ जांच किस्म के मुकाबले 21 प्रतिशत श्रेष्ठ प्रदर्शन दर्ज हुआ।
किसान के लिए कौनसी किस्म ज्यादा बेहतर मानी जाए
अगर किसान का मुख्य सवाल सिर्फ उपलब्ध परीक्षण आंकड़ों में ज्यादा अनाज उपज को लेकर है, तो NRC 292 इस तुलना में आगे दिखाई देती है। लेकिन किसी किस्म को अपने खेत के लिए चुनते समय केवल उत्पादन क्षमता देखना पर्याप्त नहीं है।
NRC 268 की अपनी अलग विशेषताएं हैं और इस पर खाद्य गुणवत्ता से संबंधित गुणों तथा कीट प्रतिक्रिया को लेकर भी शोध हुआ है। दूसरी तरफ NRC 292 ने मध्य क्षेत्रीय परीक्षण में मजबूत उत्पादन प्रदर्शन दर्ज किया है।
इसलिए किसान को अपने क्षेत्र की अनुशंसित किस्म, मिट्टी और पिछले वर्षों में खेत में आने वाली समस्याओं को ध्यान में रखकर निर्णय लेना चाहिए। खासकर नई किस्मों के मामले में प्रमाणित बीज और स्थानीय कृषि सलाह को प्राथमिकता देना अधिक सुरक्षित रहता है।
NRC 292 को लेकर जल्दबाजी में फैसला क्यों नहीं करना चाहिए
किसी एक परीक्षण वर्ष का बेहतर आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि एक किस्म हर मौसम और हर खेत में दूसरी से बेहतर रहेगी। सोयाबीन में बारिश का वितरण, खेत में जल निकास, तापमान और रोग-कीट का दबाव उपज को काफी प्रभावित कर सकते हैं।
इसी वजह से NRC 292 की 2695 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर वाली उपज को परीक्षण परिणाम के रूप में देखना चाहिए, न कि किसान के लिए गारंटीकृत उत्पादन के रूप में। इसी तरह NRC 268 की 2624 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उपज भी परीक्षण परिस्थितियों का परिणाम है।
किसान यदि दोनों में चुनाव कर रहा है तो अपने क्षेत्र में किस किस्म की आधिकारिक सिफारिश है, उपलब्ध प्रमाणित बीज कौनसा है और उसके खेत की परिस्थितियों में किस किस्म का प्रदर्शन विश्वसनीय रूप से सामने आया है, इन बातों को प्राथमिकता देना बेहतर रहेगा।
निष्कर्ष
NRC 268 और NRC 292 दोनों को एक ही नजर से देखना सही नहीं होगा। उपलब्ध 2024-25 के मध्य क्षेत्रीय परीक्षण आंकड़ों में NRC 292 ने 2695 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की उपज के साथ NRC 268 के 2624 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर प्रदर्शन से अधिक उत्पादन दर्ज किया। इस आधार पर केवल उपज की तुलना करें तो NRC 292 आगे है।
वहीं NRC 268 की पहचान खाद्य गुणवत्ता से जुड़े शोध गुणों और कुछ कीटों के प्रति बेहतर प्रतिक्रिया के अध्ययन के कारण भी महत्वपूर्ण है। इसलिए किसान के लिए सही किस्म वही होगी जो उसके क्षेत्र, मिट्टी, मौसम और खेती की परिस्थितियों के अनुकूल हो। नई किस्म देखकर केवल अधिक उपज के दावे पर निर्णय लेने के बजाय प्रमाणित कृषि परीक्षण और स्थानीय अनुशंसा को आधार बनाना सबसे समझदारी वाला कदम रहेगा।