गन्ने में कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश और कोराजन मिलने पर क्या होगा। कोराजन ।पोटाश । कैल्शियम नाइट्रेट

गन्ने की फसल में किसान अक्सर कीट नियंत्रण के साथ पोषक तत्वों का छिड़काव भी एक ही बार में करना चाहते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कैल्शियम नाइट्रेट, पोटाश और कोराजन को एक ही टैंक में मिलाकर छिड़काव किया जाए तो इसका क्या असर होगा।

यहां सबसे जरूरी बात यह है कि इन तीनों उत्पादों को बिना जांच सीधे मिलाकर छिड़काव करना सुरक्षित नहीं माना जा सकता। कोराजन में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी होता है और गन्ने में इसका इस्तेमाल बोरर जैसे कीटों के नियंत्रण के लिए किया जाता है।

कोराजन गन्ने में क्या काम करता है

कोराजन एक कीटनाशक है, जिसका सक्रिय घटक क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 18.5 प्रतिशत डब्ल्यू/डब्ल्यू एससी है। यह मुख्य रूप से लेपिडोप्टेरन वर्ग के कीटों को नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। गन्ने में अर्ली शूट बोरर और टॉप बोरर जैसे कीट इसके प्रमुख लक्ष्यों में शामिल हैं।

गन्ने में इसके उपयोग को लेकर कृषि अनुसंधान में भी इसकी प्रभावशीलता का परीक्षण किया गया है। पंजाब में किए गए एक अध्ययन में कोराजन 18.5 एससी के अलग-अलग स्तरों का अर्ली शूट बोरर के खिलाफ परीक्षण किया गया और उपचारित फसल में कीट प्रकोप में कमी देखी गई। हालांकि किसान को वास्तविक उपयोग के लिए अपने उत्पाद के वर्तमान लेबल पर दिए गए फसल, कीट, मात्रा और आवेदन विधि का ही पालन करना चाहिए।

इसलिए कोराजन को मुख्य रूप से कीट नियंत्रण वाला उत्पाद समझना चाहिए। कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश की तरह इसे फसल में पोषण देने वाला उत्पाद नहीं माना जा सकता।

कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश मिलाने से क्या होगा

कैल्शियम नाइट्रेट से फसल को कैल्शियम और नाइट्रोजन मिलता है, जबकि पोटाश का उद्देश्य मुख्य रूप से पोटैशियम की आपूर्ति करना होता है। लेकिन यहां “पोटाश” किस प्रकार का है, यह बहुत महत्वपूर्ण है। बाजार में पोटाश अलग-अलग रासायनिक रूपों और फॉर्मुलेशन में उपलब्ध होता है, इसलिए केवल पोटाश नाम के आधार पर उसकी टैंक-मिश्रण संगतता तय नहीं की जा सकती।

कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश को मिलाने से पहले दोनों उत्पादों के लेबल और फॉर्मुलेशन को देखना जरूरी है। खासकर यदि पोटाश में अन्य पोषक तत्व, सल्फर, फॉस्फेट या अलग-अलग रसायन शामिल हैं, तो मिश्रण का व्यवहार बदल सकता है।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हर प्रकार का पोटाश कैल्शियम नाइट्रेट के साथ निश्चित रूप से सुरक्षित है या हर स्थिति में नुकसान करेगा। उत्पाद का वास्तविक फॉर्मुलेशन, पानी की गुणवत्ता और मिश्रण की मात्रा महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

तीनों को एक टैंक में मिलाने पर क्या समस्या हो सकती है

कोराजन एक एससी यानी सस्पेंशन कंसंट्रेट फॉर्मुलेशन है। ऐसे उत्पादों को दूसरे घुलनशील उर्वरकों के साथ मिलाते समय भौतिक संगतता की जांच जरूरी होती है। निर्माता की टैंक-मिश्रण संबंधी जानकारी भी पहली बार किसी नए मिश्रण को इस्तेमाल करने से पहले जार टेस्ट करने की सलाह देती है। मिश्रण में तलछट, परत बनना, गुच्छे बनना या क्रिस्टल बनने जैसी समस्या दिखाई दे तो उसे इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

तीनों उत्पादों को एक साथ मिलाने पर संभावित समस्या यह हो सकती है कि घोल पूरी तरह एकसार न रहे। ऐसी स्थिति में स्प्रेयर की नोजल में रुकावट आ सकती है या खेत में दवा और पोषक तत्व समान रूप से नहीं पहुंच सकते। इसके अलावा, केवल टैंक में मिश्रण ठीक दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि फसल पर उसका असर भी निश्चित रूप से सुरक्षित होगा।

इसी वजह से बिना परीक्षण के कैल्शियम नाइट्रेट, पोटाश और कोराजन का मिश्रण बनाना उचित नहीं है।

अगर मिलाना हो तो किन बातों का ध्यान रखें

यदि किसी विशेष उत्पाद के लेबल में इन उत्पादों को साथ इस्तेमाल करने की स्पष्ट अनुमति नहीं दी गई है, तो पहले छोटे स्तर पर संगतता की जांच करना ज्यादा सुरक्षित तरीका है। जार टेस्ट में उसी अनुपात में पानी और उत्पाद लेकर मिश्रण को कुछ समय देखने की जरूरत होती है। कोराजन की टैंक-मिश्रण संबंधी जानकारी में भी पहली बार मिश्रण करने से पहले संगतता परीक्षण की सलाह दी गई है।

ध्यान रखने वाली मुख्य बातें हैं:

  • सबसे पहले यह देखें कि पोटाश और कैल्शियम नाइट्रेट किस फॉर्मुलेशन में हैं और उनके लेबल पर मिश्रण संबंधी क्या निर्देश दिए गए हैं।
  • अलग-अलग उत्पादों को सीधे आपस में मिलाने के बजाय पर्याप्त साफ पानी वाले टैंक में निर्धारित क्रम से मिलाना चाहिए।
  • पहली बार इस्तेमाल किए जाने वाले मिश्रण का जार टेस्ट करने के बाद ही बड़े क्षेत्र में प्रयोग करना बेहतर है।
  • घोल में तलछट, गुच्छे, क्रिस्टल, अलग परत या असामान्य जमाव दिखाई दे तो उस मिश्रण का छिड़काव नहीं करना चाहिए।

कोराजन के लिए उपलब्ध टैंक-मिश्रण निर्देशों में सस्पेंशन कंसंट्रेट को पानी में मिलाने के बाद घोल को लगातार चलाते रहने और मिश्रण को तैयार करके लंबे समय तक टैंक में न छोड़ने पर जोर दिया गया है।

क्या तीनों को एक साथ डालना जरूरी है

गन्ने में कीट नियंत्रण और पोषण प्रबंधन दो अलग जरूरतें हैं। अगर खेत में बोरर का प्रकोप है तो कीटनाशक का इस्तेमाल फसल और कीट के अनुसार किया जाना चाहिए। वहीं कैल्शियम या पोटैशियम की जरूरत होने पर संबंधित पोषक तत्व का प्रयोग फसल की वास्तविक आवश्यकता और अनुशंसित विधि के अनुसार किया जाना चाहिए।

सिर्फ यह सोचकर कि तीनों चीजें एक साथ डालने से एक ही स्प्रे में कीट नियंत्रण और पोषण दोनों हो जाएगा, मिश्रण तैयार करना सही तरीका नहीं है। इससे समय और मजदूरी बच सकती है, लेकिन यदि मिश्रण असंगत निकला तो दवा की प्रभावशीलता, पोषक तत्वों की उपलब्धता या फसल की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है।

विशेष रूप से कोराजन की मात्रा अपने आप बढ़ाकर या पोषक तत्वों की मात्रा के साथ समायोजित करके नहीं डालनी चाहिए। कीटनाशक की मात्रा हमेशा उसके संबंधित लेबल और गन्ने में स्वीकृत उपयोग के अनुसार ही रखनी चाहिए।

किसानों के लिए सीधी सलाह

अगर किसान गन्ने में कैल्शियम नाइट्रेट, पोटाश और कोराजन एक साथ देने की योजना बना रहे हैं, तो सबसे सुरक्षित निष्कर्ष यही है कि बिना संगतता जांच के तीनों को एक ही टैंक में मिलाकर छिड़काव न करें

पहले पोटाश के वास्तविक प्रकार और फॉर्मुलेशन की पहचान करें। इसके बाद तीनों उत्पादों के लेबल निर्देश देखें और छोटे पैमाने पर जार टेस्ट करें। मिश्रण में कोई भौतिक बदलाव दिखाई दे तो उसे खेत में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। साथ ही, यदि किसी उत्पाद के लेबल में टैंक-मिश्रण की मनाही है, तो उस निर्देश का पालन करना जरूरी है।

गन्ने में कोराजन का इस्तेमाल कीट नियंत्रण के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसे कैल्शियम नाइट्रेट और पोटाश के साथ मिलाने को सामान्य नियम के रूप में सुरक्षित नहीं माना जा सकता। सही तरीका यही है कि उत्पाद के फॉर्मुलेशन, लेबल निर्देश, पानी की स्थिति और मिश्रण की संगतता को देखकर निर्णय लिया जाए। जरूरत होने पर पोषक तत्वों और कीटनाशक का अलग-अलग छिड़काव करना कई परिस्थितियों में अधिक सावधानी वाला विकल्प हो सकता है।

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