सरसों की बुवाई का मौसम शुरू हो चुका है। अक्टूबर से नवंबर के शुरू तक का समय उत्तर भारत में सबसे अच्छा माना जाता है। सही समय और अच्छे बीज से पैदावार अच्छी होती है।
बुवाई का सही समय क्या है
उत्तर भारत में सरसों की मुख्य बुवाई अक्टूबर के मध्य से नवंबर के पहले हफ्ते तक की जाती है। कई जगहों पर 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच बुवाई सबसे बेहतर बताई जाती है। इस समय दिन का तापमान 25 से 30 डिग्री के आसपास रहता है, जो अंकुरण के लिए ठीक रहता है।
जल्दी बुवाई करने वाले इलाकों में सितंबर के अंत से भी शुरू कर सकते हैं, लेकिन देर से बुवाई करने पर पैदावार कम हो सकती है। अपने इलाके के मौसम और मिट्टी के हिसाब से समय चुनें।
बीज खरीदने से पहले ये बातें जरूर देखें
बीज खरीदते समय जल्दबाजी न करें। अच्छी पैदावार के लिए सही किस्म और गुणवत्ता वाले बीज जरूरी हैं।
- प्रमाणित या ट्रेस्ड बीज ही लें, जो सरकारी या विश्वसनीय स्रोत से मिले
- अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्में चुनें जैसे पूसा बोल्ड, आरएच-749 या स्थानीय उन्नत किस्में
- बीज साफ, चमकदार और एक जैसा हो, नरम या फफूंद लगे बीज न लें
- पैकेट पर उत्पादन वर्ष और अंकुरण प्रतिशत लिखा हो
बीज को बुवाई से पहले उपचारित करना अच्छा रहता है। इससे शुरुआती रोग कम लगते हैं।
खेत की तैयारी कैसे करें
बुवाई से पहले खेत को दो-तीन बार अच्छी तरह जोत लें। मिट्टी भुरभुरी होनी चाहिए। पिछले फसल के अवशेष हटा दें। खेत को समतल कर लें ताकि पानी समान रूप से लगे।
एक एकड़ में करीब 1.5 से 2 किलो बीज काफी होता है। लाइन से लाइन की दूरी 30 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेंटीमीटर रखें। बीज की गहराई 3 से 4 सेंटीमीटर से ज्यादा न हो।
खाद और पानी का ध्यान
सरसों में सल्फर बहुत जरूरी है। इससे दानों में तेल की मात्रा बढ़ती है। मिट्टी की जांच के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फोरस और सल्फर डालें। बुवाई के समय आधा नाइट्रोजन और बाकी बाद में दें।
शुरुआत में नमी बनाए रखें। जरूरत से ज्यादा पानी न लगाएं, खासकर फूल आने के समय।
पैदावार बढ़ाने के आसान तरीके
सही समय पर बुवाई, अच्छे बीज और उचित दूरी से फसल मजबूत होती है। खरपतवार समय पर निकालें। कीट-रोग पर नजर रखें। अगर स्केप (फूल की डंडी) निकले तो उसे तोड़ दें, इससे बल्ब बड़ा होता है।
सरसों रबी की महत्वपूर्ण फसल है। सही तैयारी से अच्छी पैदावार मिल सकती है। अपने नजदीकी कृषि विभाग या कृषि वैज्ञानिक की सलाह जरूर लें, ताकि आपके इलाके के हिसाब से सबसे अच्छा तरीका अपना सकें।

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