बीकानेर जिले में बागवानी फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए प्लास्टिक मल्चिंग को लेकर महत्वपूर्ण अपडेट सामने आया है। उद्यान विभाग की ओर से प्लास्टिक मल्चिंग को बढ़ावा देने के लिए जिले में 70 हेक्टेयर क्षेत्र का लक्ष्य रखा गया है। योजना के तहत पात्र किसानों को प्लास्टिक मल्च की लागत पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाएगा।
प्लास्टिक मल्चिंग पर मिलेगा 50 प्रतिशत तक अनुदान
प्लास्टिक मल्चिंग का इस्तेमाल खेत में मिट्टी की नमी बनाए रखने, खरपतवार को नियंत्रित करने और सिंचाई के पानी के बेहतर उपयोग के लिए किया जाता है। बीकानेर में उद्यान विभाग की योजना के तहत किसानों को मल्च शीट की लागत का 50 प्रतिशत तक वित्तीय सहयोग मिलने की जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के अनुसार सहायता की अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर रखी गई है। प्रति हेक्टेयर लागत की गणना 40 हजार रुपये या अनुबंधित फर्म की निर्धारित दर, दोनों में से जो कम हो, उसके आधार पर की जाएगी।
बीकानेर में 70 हेक्टेयर का लक्ष्य
उद्यान विभाग ने बीकानेर जिले में कुल 70 हेक्टेयर क्षेत्र में प्लास्टिक मल्चिंग का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इसमें 50 हेक्टेयर क्षेत्र सामान्य किसानों के लिए और 20 हेक्टेयर क्षेत्र अनुसूचित जाति वर्ग के किसानों के लिए निर्धारित किया गया है।
इसका उद्देश्य जिले में बागवानी फसलों के उत्पादन में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाना और किसानों को पानी तथा खेती की लागत के बेहतर प्रबंधन में सहायता देना है।
एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर तक लाभ
योजना के तहत एक किसान को अधिकतम 2 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए अनुदान दिए जाने की जानकारी सामने आई है। यदि पात्र किसान का क्षेत्र इससे अधिक है तो सहायता निर्धारित सीमा के अनुसार ही मिलेगी।
योजना में पहले लाभ नहीं लेने वाले किसानों को प्राथमिकता देने की बात भी सामने आई है। वहीं वर्ष 2025-26 में इस योजना का लाभ ले चुके किसानों के लिए इस वर्ष पात्रता नहीं होने की जानकारी रिपोर्ट में दी गई है।
अनुबंधित फर्म की मल्च शीट का इस्तेमाल जरूरी
अनुदान प्राप्त करने के लिए किसानों को उद्यान विभाग द्वारा अनुबंधित फर्मों से प्लास्टिक मल्च शीट लेने की शर्त बताई गई है। सहायता की गणना निर्धारित लागत और संबंधित अनुबंधित फर्म की दर में से जो कम हो, उसके आधार पर की जाएगी।
इसलिए किसान अपनी ओर से मल्च शीट खरीदने से पहले योजना के वर्तमान नियमों और विभाग द्वारा अधिकृत फर्मों की जानकारी जरूर प्राप्त करें। इससे आवेदन और अनुदान प्रक्रिया में होने वाली परेशानी से बचा जा सकता है।
प्लास्टिक मल्चिंग से किसानों को क्या फायदा
प्लास्टिक मल्चिंग खेत की मिट्टी की सतह को ढकने की तकनीक है। इसका इस्तेमाल खासतौर पर कई बागवानी और सब्जी फसलों में किया जाता है। मल्च की परत मिट्टी से पानी के वाष्पीकरण को कम करने और खरपतवार की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है।
इसके प्रमुख फायदे इस प्रकार हैं:
- मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।
- खेत में खरपतवार की समस्या को कम किया जा सकता है।
- सिंचाई के पानी का बेहतर उपयोग संभव होता है।
- फसल के आसपास का वातावरण अधिक व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।
ऑनलाइन आवेदन के लिए राज किसान पोर्टल
राजस्थान सरकार का राज किसान साथी पोर्टल कृषि और उद्यानिकी विभाग की विभिन्न अनुदान योजनाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा उपलब्ध कराता है। पोर्टल पर विभाग की ओर से यह भी बताया गया है कि अनुदान योजनाओं के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाता है।
प्लास्टिक मल्चिंग के लिए आवेदन करने से पहले किसान अपने जिले में लागू योजना, पात्रता, निर्धारित लागत, आवश्यक दस्तावेज और आवेदन की वर्तमान स्थिति की जानकारी आधिकारिक पोर्टल या संबंधित उद्यान विभाग के कार्यालय से जरूर जांच लें।
किसानों के लिए जरूरी सावधानी
अनुदान की राशि, लक्ष्य, पात्रता और आवेदन की शर्तें वित्तीय वर्ष तथा विभागीय दिशा-निर्देशों के अनुसार बदल सकती हैं। इसलिए किसान किसी एजेंट या अनधिकृत व्यक्ति के भरोसे आवेदन करने के बजाय आधिकारिक विभागीय जानकारी पर ही भरोसा करें।
किसानों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि 50 प्रतिशत अनुदान का मतलब हर स्थिति में कुल खर्च का आधा भुगतान होना नहीं है। योजना में निर्धारित इकाई लागत और अधिकतम सीमा के अनुसार वास्तविक सहायता तय होती है। बीकानेर के लिए उपलब्ध ताजा जानकारी में अधिकतम सहायता 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बताई गई है।
बीकानेर में प्लास्टिक मल्चिंग को बढ़ावा देने के लिए 70 हेक्टेयर का लक्ष्य किसानों के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। पात्र किसानों को निर्धारित नियमों के अनुसार मल्चिंग लागत पर 50 प्रतिशत तक सहायता मिल सकती है, जिसकी अधिकतम सीमा 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर बताई गई है। आवेदन करने से पहले किसान राज किसान साथी पोर्टल और स्थानीय उद्यान विभाग से मौजूदा नियमों की पुष्टि जरूर करें, ताकि सही प्रक्रिया के तहत योजना का लाभ लिया जा सके।