जम्मू-कश्मीर के शोपियां जिले के अलावपोरा स्थित कृषि विभाग के फार्म की जमीन को लेकर एक महत्वपूर्ण मामला सामने आया है। कृषि विभाग की 1,500 कनाल से अधिक जमीन को Sher-e-Kashmir University of Agricultural Sciences and Technology-Kashmir (SKUAST-K) को देने का प्रस्ताव सामने आया था। इस जमीन पर बागवानी के लिए Centre of Excellence स्थापित करने की योजना पर चर्चा हुई थी। हालांकि, कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि फार्म की जमीन पहले से कई कृषि गतिविधियों में इस्तेमाल हो रही है और फिलहाल इसे विश्वविद्यालय को ट्रांसफर करना विचाराधीन नहीं है।
कहां की जमीन को लेकर है मामला
यह मामला शोपियां के Allowpora Seed Multiplication Farm से जुड़ा है। कृषि विभाग के अनुसार यह फार्म करीब 64.885 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है। यहां बीज उत्पादन और दूसरी कृषि गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
मामला जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भी उठा। शोपियां के विधायक शबीर अहमद कुल्ले ने कृषि विभाग की जमीन के इस्तेमाल और उसे SKUAST-K को देने से जुड़े सवाल पूछे थे। इसके जवाब में विभाग ने प्रस्ताव मिलने और उसे विश्वविद्यालय के पास जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी दी।
University ने क्या प्रस्ताव दिया था
SKUAST-K की ओर से Allowpora में Centre of Excellence विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया था। प्रस्ताव का फोकस गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, बीज उत्पादन और बागवानी से जुड़े प्रशिक्षण एवं अनुसंधान पर था।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्रस्ताव में इन गतिविधियों को शामिल करने की बात कही गई थी:
- रोगमुक्त प्रमाणित पौध सामग्री और बेहतर क्लोनल रूटस्टॉक तैयार करना।
- ब्रीडर और फाउंडेशन सीड उत्पादन को बढ़ावा देना।
- डिप्लोमा और शॉर्ट टर्म सर्टिफिकेट कोर्स संचालित करना।
- प्रदर्शन बाग, मदर ब्लॉक, पॉलीहाउस और किसानों के प्रशिक्षण की सुविधाएं विकसित करना।
विश्वविद्यालय ने Allowpora को दक्षिण कश्मीर में बागवानी के लिए वैज्ञानिक और कौशल विकास केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना भी बताई थी।
कृषि विभाग ने जमीन के बारे में क्या बताया
जमीन को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात कृषि विभाग के जवाब में सामने आई। विभाग ने कहा कि फार्म का बड़ा हिस्सा खाली या अनुपयोगी नहीं है। कुल 64.885 हेक्टेयर में से 58.90 हेक्टेयर क्षेत्र का इस्तेमाल बीज उत्पादन और अन्य विभागीय गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। इनमें मक्का, जई, दलहन, आलू और फ्लोरीकल्चर पौध सामग्री से जुड़ी गतिविधियां शामिल हैं।
इसका मतलब है कि जमीन का इस्तेमाल पहले से कृषि अनुसंधान, बीज उत्पादन और दूसरी गतिविधियों के लिए हो रहा है। इसलिए विश्वविद्यालय को जमीन हस्तांतरित करने का फैसला केवल प्रस्ताव के आधार पर नहीं, बल्कि मौजूदा कृषि गतिविधियों को ध्यान में रखकर ही किया जाना होगा।
जमीन पर पहले से चल रही हैं कई परियोजनाएं
Allowpora फार्म पर कृषि विभाग की कई योजनाएं और परियोजनाएं भी चल रही हैं। विभाग के अनुसार करीब 20 हेक्टेयर जमीन को Saffron Corm Nursery के लिए चिन्हित किया गया है। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से PM-RKVY के तहत 4.03 करोड़ रुपये की मंजूरी का उल्लेख किया गया है।
इसके अलावा फार्म में Centre of Excellence for Precision Farming स्थापित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके लिए चालू वित्त वर्ष में Capex Budget/SASCI के तहत 4.96 करोड़ रुपये के आवंटन की जानकारी दी गई है।
क्या University को जमीन मिल जाएगी?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार ऐसा नहीं है। कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि Allowpora Seed Farm की जमीन पहले से विभिन्न विभागीय गतिविधियों के लिए इस्तेमाल हो रही है। इसी वजह से प्रस्तावित उद्देश्य के लिए जमीन को SKUAST-K को ट्रांसफर करना फिलहाल विचाराधीन नहीं है।
इसलिए इसे जमीन के अंतिम हस्तांतरण का फैसला मानना सही नहीं होगा। अभी मामला प्रस्ताव और विभागीय जांच/विचार के स्तर से जुड़ा रहा है।
किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए इसका क्या मतलब
Allowpora फार्म का महत्व केवल जमीन के रूप में नहीं है। यहां बीज उत्पादन, कृषि तकनीक और दूसरी गतिविधियां चल रही हैं, जिनका संबंध किसानों तक गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री पहुंचाने से है।
दूसरी ओर, विश्वविद्यालय की ओर से प्रस्तावित Centre of Excellence बनने पर बागवानी अनुसंधान, प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री के क्षेत्र में काम बढ़ाने की संभावना थी। ऐसे में किसी भी निर्णय में मौजूदा कृषि गतिविधियों और प्रस्तावित नई सुविधाओं दोनों को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण होगा।
Allowpora Agriculture Farm की 1,500 कनाल से अधिक जमीन को SKUAST-K को देने का प्रस्ताव सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आया। विश्वविद्यालय ने यहां बागवानी से जुड़ा Centre of Excellence और प्रशिक्षण सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन कृषि विभाग के अनुसार फार्म का अधिकांश हिस्सा पहले से उपयोग में है और फिलहाल जमीन को विश्वविद्यालय को ट्रांसफर करना विचाराधीन नहीं है। इसलिए अभी इसे जमीन हस्तांतरण का अंतिम फैसला नहीं, बल्कि सामने आए प्रस्ताव और उस पर विभागीय स्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए।